नासिक के अंबड औद्योगिक क्षेत्र में अब तक 50 कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई।
रासायनिक युक्त पानी से भूजल और जलस्रोत प्रभावित होने की शिकायतें।
प्रशासन ने संबंधित क्षेत्र की बोरवेल सील कीं।
पालकमंत्री गिरीश महाजन ने सील तोड़कर पानी निकालने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी दी।
नागरिकों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता।
Nashik Water Pollution: नासिक के अंबड औद्योगिक क्षेत्र में दूषित पानी की शिकायतों के बाद राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। अब तक 50 कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। आरोप है कि कुछ कंपनियों से निकलने वाला रासायनिक युक्त पानी जमीन में छोड़े जाने से आसपास के कुओं और अन्य जलस्रोतों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। प्रशासन ने संबंधित क्षेत्र की बोरवेल सील कर दी हैं।
पालकमंत्री गिरीश महाजन ने चेतावनी दी है कि सील तोड़कर पानी निकालने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने संबंधित विभागों को प्रदूषण पर नियंत्रण, जलस्रोतों की निगरानी और नागरिकों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले में प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण और प्रभावित जलस्रोतों की जांच के जरिए स्थायी समाधान सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए अहम होगा।
नासिक शहर के अंबड औद्योगिक क्षेत्र से सटे इलाकों में दूषित पानी की शिकायतों को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। अब तक 50 कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। औद्योगिक गतिविधियों के कारण आसपास के जलस्रोतों के प्रभावित होने की शिकायतों के बाद प्रशासन ने संबंधित क्षेत्र की बोरवेल सील कर दी हैं। पालकमंत्री गिरीश महाजन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि सील तोड़कर बोरवेल से पानी निकालने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि नागरिकों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना प्राथमिकता है और इस मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अंबड औद्योगिक क्षेत्र के आसपास रहने वाले नागरिकों की ओर से दूषित पानी को लेकर लगातार शिकायतें की जा रही हैं। आरोप है कि कुछ कंपनियों से निकलने वाला रासायनिक युक्त पानी जमीन में छोड़े जाने के कारण आसपास के कुओं और अन्य जलस्रोतों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इससे स्थानीय नागरिकों के सामने स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
भूजल पर निर्भर रहने वाले परिवारों के लिए यह समस्या अधिक गंभीर हो सकती है। दूषित पानी की आशंका के बीच नागरिकों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने और जलस्रोतों की स्थिति पर निगरानी रखने की जरूरत बढ़ गई है। इसी पृष्ठभूमि में प्रशासन ने संबंधित क्षेत्र की बोरवेल सील करने का कदम उठाया है।
दूषित पानी की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए अब तक 50 कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। सरकार की ओर से संबंधित कंपनियों पर कार्रवाई के साथ औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, कार्रवाई का विस्तृत स्वरूप और संबंधित कंपनियों के नाम सामने आने पर ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
प्रशासन ने बोरवेल सील करने के बाद उनके अनधिकृत इस्तेमाल को रोकने पर भी जोर दिया है। पालकमंत्री गिरीश महाजन ने चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यक्ति सील हटाकर पानी निकालता हुआ पाया गया, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन को सील की गई बोरवेल पर निगरानी रखने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
महाजन ने बताया कि दूषित पानी की समस्या के समाधान के लिए संबंधित विभागों और एजेंसियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। सरकार का प्रयास है कि जलस्रोतों को दूषित होने से बचाने के साथ नागरिकों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाए। इसके लिए विभागों के बीच समन्वय और शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई करने पर जोर दिया जा रहा है।
औद्योगिक क्षेत्र के आसपास रहने वाले नागरिकों को राहत दिलाने के लिए अब प्रशासन की निगरानी और कार्रवाई कितनी प्रभावी रहती है, इस पर सबकी नजर रहेगी। समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव होगा, जब प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण, प्रभावित जलस्रोतों की जांच और सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।