Mangesh Chavan Girish Mahajan BJP Nashik (फोटो क्रेडिट-X) 
नासिक

स्थानीय विधायकों की अनदेखी? जलगांव के मंगेश चव्हाण को मिली नासिक की कमान, भाजपा में असंतोष की सुगबुगाहट

Nashik BJP In-charge: गिरीश महाजन के करीबी और चालीसगांव से बीजेपी विधायक मंगेश चव्हाण बने नासिक भाजपा के प्रभारी। स्थानीय विधायकों में बढ़ा असंतोष।

अनिल सिंह

Mangesh Chavan Girish Mahajan BJP Nashik: नासिक भाजपा की आंतरिक राजनीति में एक बड़ा मोड़ आया है। आगामी लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने जिला प्रभारियों की घोषणा की है, जिसमें नासिक शहर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी जलगांव जिले के चालीसगांव से विधायक मंगेश चव्हाण को सौंपी गई है। मंगेश चव्हाण को कैबिनेट मंत्री गिरीश महाजन का सबसे कट्टर समर्थक और "छोटा गिरीश महाजन" माना जाता है। इस नियुक्ति को नासिक की राजनीति पर महाजन की पकड़ और मजबूत करने के 'मास्टर स्ट्रोक' के रूप में देखा जा रहा है।

पिछले एक दशक से गिरीश महाजन नासिक भाजपा के अघोषित सर्वेसर्वा बने हुए हैं। पालक मंत्री न होने के बावजूद, कुंभ मेला मंत्री के रूप में उनका हस्तक्षेप स्थानीय राजनीति में बढ़ा है। अब अपने बेहद करीबी मंगेश चव्हाण को प्रभारी बनाकर उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि नासिक के राजनीतिक समीकरणों की चाबी उन्हीं के पास रहेगी।

स्थानीय बनाम बाहरी का विवाद

इस नियुक्ति ने नासिक भाजपा के भीतर असंतोष को हवा दे दी है। नासिक में भाजपा के तीन स्थानीय विधायक होने के बावजूद जलगांव के एक नेता को प्रभारी बनाना स्थानीय नेताओं को रास नहीं आ रहा है। चर्चा है कि कुंभ मेले की पूर्व-योजना बैठकों में स्थानीय विधायकों के बजाय मंगेश चव्हाण को दी जाने वाली प्राथमिकता से पहले ही बेचैनी थी, जो अब आधिकारिक नियुक्ति के बाद और बढ़ गई है।

महाजन का दबदबा और चुनावी गणित

गिरीश महाजन ने पहले भी स्थानीय विरोध को दरकिनार कर अन्य दलों के नेताओं को भाजपा में शामिल कराकर नगर निगम में 72 सीटों के साथ बहुमत हासिल किया था। उस समय उनके फैसलों को सही ठहराया गया था, लेकिन अब संगठन के स्तर पर 'बाहरी' हस्तक्षेप को लेकर पार्टी के पुराने निष्ठावान कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। मंगेश चव्हाण को "दूसरा गिरीश महाजन" कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि नासिक में अब आधिकारिक तौर पर महाजन की कार्यशैली का विस्तार होगा।

कुंभ मेले पर नजर

आगामी कुंभ मेले के आयोजन और उसमें होने वाले भारी-भरकम फंड के आवंटन को देखते हुए नासिक की कमान अपने हाथ में रखना महाजन के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। प्रभारी के रूप में मंगेश चव्हाण अब स्वतंत्र रूप से नासिक की बैठकों और संगठनात्मक निर्णयों में भाग ले सकेंगे, जिससे स्थानीय विधायकों का प्रभाव कम होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि पार्टी इसे संगठनात्मक प्रक्रिया बता रही है, लेकिन भाजपा के भीतर 'अघोषित असंतोष' चुनाव परिणामों पर क्या असर डालेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

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