मालेगांव के डोंगराले में चार साल की बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न और हत्या का मामला।
दोषी विजय खैरनार को अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने सुनाई मौत की सजा।
पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश।
अभियोजन पक्ष ने अदालत में 24 गवाहों के बयान पेश किए।
विशेष सरकारी वकील के रूप में उज्ज्वल निकम ने पैरवी की।
Nashik Malegaon Child Rape Case Vijay Khairnar Death Penalty: महाराष्ट्र के नासिक के मालेगांव में चार साल की बच्ची के यौन उत्पीड़न और हत्या के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने दोषी विजय खैरनार को मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया। अभियोजन पक्ष ने सुनवाई के दौरान 24 गवाह पेश किए थे।
महाराष्ट्र के नासिक के मालेगांव शहर में चार साल की बच्ची के यौन उत्पीड़न और हत्या के मामले में अदालत ने दोषी विजय खैरनार को मौत की सजा सुनाई है। मालेगांव के डोंगराले में हुई इस वारदात ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश पैदा कर दिया था। अदालत ने पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।
मामले में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, घटना 17 नवंबर 2025 की है। आरोपी ने कथित तौर पर बच्ची को चॉकलेट का लालच देकर अपने साथ ले गया। इसके बाद बच्ची का यौन उत्पीड़न किया और उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम को विशेष सरकारी वकील नियुक्त किया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 24 गवाहों के बयान पेश किए। इसके साथ ही मामले से जुड़े सबूत और अन्य साक्ष्य अदालत के सामने रखे गए।
अभियोजन पक्ष ने इन्हीं साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी के खिलाफ अपना पक्ष प्रस्तुत किया। अदालत ने सुनवाई के बाद विजय खैरनार को दोषी करार दिया।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मालेगांव की अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने 1 अक्टूबर 2026 को विजय खैरनार को दोषी ठहराया था। इसके बाद 16 अक्टूबर 2026 को अदालत ने उसे मौत की सजा सुनाई।
अदालत ने पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है। इस फैसले के साथ ही बच्ची के यौन उत्पीड़न और हत्या के मामले में सुनवाई का अहम चरण पूरा हुआ।
जांच के दौरान पुलिस ने CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों की मदद से आरोपी तक पहुंचने की बात कही है। मामले में आरोप था कि आरोपी ने अपराध को छिपाने के उद्देश्य से बच्ची की हत्या की और शव को मोबाइल टावर के पास सुनसान जगह पर छोड़ दिया।
इस मामले ने बच्चियों की सुरक्षा और ऐसे गंभीर अपराधों में त्वरित न्याय की जरूरत को लेकर व्यापक चिंता पैदा की थी।