नासिक, छात्र प्रदर्शन, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग (फोटो सोर्स: सोशल मीडिया)  
नासिक

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर नासिक में छात्रों का प्रदर्शन, शिक्षा नीति के खिलाफ नारेबाजी

Dharmendra Pradhan Resignation: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और दिल्ली के छात्र आंदोलन के समर्थन में नासिक में छात्रों, युवाओं और सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शन किया। 

अंकिता पटेल

Student Protest Nashik Education: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में नासिक में सोमवार को एक बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। प्रगतिशील लोकतंत्र प्रेमी दल और विभिन्न सामाजिक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया गया, जिसमें छात्रों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार की वर्तमान शिक्षा नीति के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। छात्रों का आरोप है कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार अनियमितताएं बढ़ रही हैं, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो रहा है। आंदोलनकारियों ने मुख्य रूप से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की कमी, प्रवेश प्रक्रिया में गड़बड़ियों और शिक्षा के बढ़ते बाजारीकरण को लेकर गहरा रोष प्रकट किया।

आंदोलन की प्रमुख मांगें

प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के समक्ष छह सूत्रीय मांगें रखी हैं, जिनका समाधान तत्काल करने की अपील की गई है- राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं को समाप्त कर परीक्षा प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत किया जाए। व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए 12वीं के अंकों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) घोटाले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों को सजा मिले। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की समीक्षा और उस पर पुनर्विचार किया जाए। परीक्षा प्रक्रिया की विफलता के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। छात्रों और आंदोलनकारियों पर होने वाले पुलिस दमन को तत्काल रोका जाए।

संगठित शक्ति का प्रदर्शन

इस आदोलन का नेतृत्व डॉ. डी. एल. कराड, कॉ. राजू देसले, डॉ. मिलिंद वाघ, मुकुंद दीक्षित (शिक्षा बाजारीकरण विरोधी मंच) और एड. कृष्णा शिलावट (आरपीआई सेक्युलर) ने किया, इस प्रदर्शन को सीटू, पटक, घंटागाड़ी कर्मचारी संघ, राष्ट्र सेवा दल, मराठी विज्ञान परिषद, संविधान सम्मान वकील संघ, अंनिस, मानवतावादी बहुउद्देशीय संस्था, एनएपीएम, छात्र भारती, संभाजी ब्रिगेड सहित अनेक श्रमिक एवं प्रगतिशील संगठनों का व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ।

आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहा। आयोजकों ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्र सरकार ने छात्रों की इन संवेदनशील मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो आने वाले समय में राज्यभर में आंदोलन को और अधिक उम्र किया जाएगा।

अब नहीं जाएंगे जंतर-मंतर...रिहाई के लिए सौरव दास और आशुतोष रांका ने क्या-क्या वादे किए?

अजेय रणनीतिकार: चुनावी रिकॉर्ड से लेकर बूथ मैनेजमेंट तक, कैसे काम करती है अमित शाह की रणनीति?

Amit Shah Nickname: बचपन में अमित शाह को किस नाम से बुलाते थे? पढ़ें दिलचस्प किस्सा

एपस्टीन के साथ हरदीप पुरी की नई फोटो रिलीज, राहुल गांधी ने पूछा- किस गद्दार को ब्लैकमेल कर रहे हैं?

India Chem 2026: बॉम्बे एग्जीबिशन सेंटर में होगा भव्य आयोजन, केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा करेंगे उद्घाटन