नासिक रोड (फोटो- सोशल मीडिया) 
नासिक

कुंभमेले की तैयारियों ने बढ़ाई मुश्किलें, नासिक की सड़कों पर धूल, गड्ढे और जाम से जनता बेहाल

Nashik Road Digging Issues: नासिक में आगामी सिंहस्थ कुंभमेले के विकास कार्यों की धीमी गति से यातायात चरमरा गया है। वडाला नाका और द्वारका की खुदी सड़कों के कारण लोग धूल, गड्ढों और जाम से बेहाल हैं।

रूपम सिंह

Nashik Kumbh Mela 2026 Road Digging Issues: आगामी सिंहस्थ कुंभमेले की तैयारियों के तहत नाशिक शहर में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों ने आम नागरिकों के लिए गंभीर समस्या खड़ी कर दी है। शहर के प्रमुख इलाकों जैसे पुराना नाशिक, द्वारका, वडाला नाका और पखाल रोड की सड़कों की हालत अत्यंत दयनीय हो गई है। जगह-जगह चल रही खुदाई, काम की बेहद धीमी रफ्तार और अधूरी छोड़ी गई सड़कों के कारण यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। धूल, गड्डों है। धूल, गड्डों और जाम की निरंतर मार झेल रहे नागरिकों का जीना मुहाल हो गया है।

बदहाल सड़कों का जाल और जनता की दुश्वारियां

नासिक शहर के इन प्रमुख मार्गों पर खुदाई के बाद निर्माण कार्य को महीनों से अधूरा छोड़ दिया गया है, जिससे स्थिति और भी जटिल हो गई है- वडाला नाका से नागसेन नगर तक की मुख्य सड़क लंबे समय से खुदाई के बाद बदहाल पड़ी है। मयूर गैस एजेंसी के आगे सड़क का कुछ हिस्सा तो कंक्रीट का बना दिया गया है, लेकिन वडाला नाका तक का शेष मार्ग अब भी कच्चा और गड्डों से भरा है। द्वारका क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों के कारण यातायात को वडाला नाका, वडालारोड और नागजी चौक जैसे संकरे मार्गों पर मोड़ दिया गया है।

इन संकरे रास्तों पर वाहनों का इतना दबाव बढ़ गया है कि वडाला नाका चौराहे पर दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। सड़कों पर बिखरी निर्माण सामग्री, खुले गड्ढे और उड़ती धूल के कारण दोपहिया वाहन चालकों, विशेषकर महिलाओं और बुजुगों के लिए यहां से निकलना जानलेवा साबित हो सकता है। धूल के गुबार के कारण स्थानीय निवासियों में सांस संबंधी बीमारियां और एलर्जी की शिकायतें भी बढ़ गई हैं। प्रशासन को अब इस समस्या को युद्धस्तर पर लेते हुए

समय सीमा के भीतर काम पूरा करने की सख्त जरूरत है, ताकि आम जनता को नासिक शहर के इस तथाकथित 'विकास' की भारी कीमत अपने स्वास्थ्य और समय के रूप में न चुकानी पड़े। विकास कार्यों के नाम पर हो रही इस लापरवाही को लेकर स्थानीय निवासियों और व्यापारियों में गहरा रोष व्याप्त है। खुले गड्डों को तत्काल भरा जाए और बिखरी निर्माण सामग्री को सड़कों से हटाया जाए ताकि दुर्घटनाओं को रोका जा सके। उड़ती धूल से नागरिकों को बचाने के लिए सड़कों पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जाए या डस्ट बैरियर लगाए जाएं।

स्थानीय नागरिक डॉ. खान अख्तर-उल-इमान ने कहा कि विकास कार्य शहर के लिए जरूरी हैं, लेकिन यदि इन्हें समय पर पूरा नहीं किया गया तो बारिश के मौसम में हालात और गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने प्रशासन से मानसून से पहले सभी प्रमुख सड़कों की मरम्मत और निर्माण कार्य पूरा करने की मांग की।

वहीं व्यापारी लक्ष्मण छल्लानी ने बताया कि बाजार क्षेत्र में दुकानों के सामने सड़कें खोद दिए जाने से ग्राहकों का आना-जाना लगभग बंद हो गया है। इसका सीधा असर व्यापार पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों से बिक्री में भारी गिरावट आई है, जिससे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।

दूसरी ओर वाहन चालक अफजल खान ने खराब सड़कों और ट्रैफिक जाम पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उखड़ी हुई सड़कों पर वाहन चलाना किसी सजा से कम नहीं है। रोजाना लंबी दूरी तय करने वाले लोगों को घंटों जाम में फंसना पड़ रहा है, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही है।

नागरिकों का कहना है कि निर्माण कार्यों की बेहतर योजना बनाकर और तय समयसीमा में उन्हें पूरा कर प्रशासन लोगों की परेशानियां कम कर सकता है। लोगों ने संबंधित विभागों से जल्द से जल्द सड़क निर्माण कार्य पूरा करने और वैकल्पिक यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।

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