मालेगांव पावरलूम उद्योग (सोर्सः सोशल मीडिया)
नासिक

मालेगांव के पावरलूम उद्योग पर मंदी की मार, शटडाउन की तैयारी में प्रशासन! बुधवार से 5 दिन बंद रखने का फैसला

Powerloom Industry Slowdown: मालेगांव के पावरलूम उद्योग पर मंदी का संकट गहराने के बाद बुनकर संगठनों ने बुधवार से पांच दिन उत्पादन बंद रखने का फैसला किया है। सरकार से राहत पैकेज की मांग की गई।

आंचल लोखंडे

Malegaon Powerloom Industry: मालेगांव शहर के पावरलूम उद्योग पर पिछले कई महीनों से छाई मंदी अब गंभीर संकट का रूप लेती जा रही है। पिछले दो महीनों से पॉपलिन कपड़ा बनाने वाले बुनकर परेशान थे, वहीं अब पीसी और पॉलिएस्टर कपड़े का उत्पादन करने वाले बुनकर भी मंदी की चपेट में आ गए हैं। बढ़ती परेशानी को देखते हुए रविवार रात शहर की विभिन्न बुनकर संगठनों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें उद्योग की मौजूदा स्थिति पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में उत्पादन को नियंत्रित करने और बाजार में कपड़े की स्थिति में सुधार लाने के उद्देश्य से बुधवार से लगातार पांच दिनों तक पावरलूम बंद रखने का फैसला लिया गया है। मालेगांव में 3 लाख से अधिक पावरलूम होने का अनुमान है। इन पावरलूम पर कॉटन से जुड़े विभिन्न प्रकार के कच्चे कपड़े का उत्पादन किया जाता है। इस उद्योग से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। बताया जाता है कि शहर में करीब डेढ़ लाख मजदूर पावरलूम उद्योग से जुड़े हैं।

राजस्थान की प्रोसेस यूनिट बंद होने का असर

बुनकरों के अनुसार, मौजूदा मंदी की एक प्रमुख वजह राजस्थान के पाली, बालोतरा और जोधपुर में प्रदूषण को लेकर हुई सख्ती और उसके चलते कई प्रोसेस यूनिटों के बंद होना है। इन यूनिटों के प्रभावित होने से मालेगांव से रोजाना भेजा जाने वाला लाखों मीटर कपड़ा अब शहर के गोदामों में जमा हो रहा है। मांग और उठाव कम होने से तैयार कपड़े के दाम भी प्रभावित हुए हैं। दूसरी ओर, यार्न यानी धागे की कीमतों में बढ़ोतरी और तैयार कपड़े को उचित बाजार भाव नहीं मिलने से बुनकरों की परेशानी और बढ़ गई है। बुनकरों का कहना है कि उत्पादन लागत बढ़ रही है, जबकि कपड़े के दाम लागत के अनुरूप नहीं मिल रहे हैं। ऐसे हालात में पावरलूम उद्योग के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

पूरे शहर की अर्थव्यवस्था पर असर

मालेगांव को पावरलूम उद्योग के कारण देशभर में ‘पावरलूम का मैनचेस्टर’ कहा जाता है। शहर का छोटा-बड़ा कारोबार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस उद्योग से जुड़ा हुआ है। ऐसे में पावरलूम उद्योग में लंबे समय तक मंदी रहने का असर केवल बुनकरों और मजदूरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे शहर के व्यापार और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

बुनकर संगठनों का कहना है कि पांच दिनों की बंदी का उद्देश्य उत्पादन को नियंत्रित करना और बाजार में कपड़े की मांग एवं कीमतों में संतुलन लाना है। हालांकि, अगर मंदी का संकट लंबे समय तक जारी रहा तो पावरलूम मजदूरों के सामने रोजगार और रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर गंभीर समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।

सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग

पावरलूम उद्योग को बचाने के लिए बुनकर तंजीम सहित विभिन्न संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। बुनकरों का कहना है कि प्लेन पावरलूम उद्योग के लिए सरकार द्वारा विशेष राहत पैकेज, बाजार उपलब्ध कराने और उत्पादन लागत कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है। बुनकर संगठनों का विश्वास है कि केंद्र और राज्य सरकार समय रहते इस उद्योग की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देकर ठोस निर्णय लेती है, तो मालेगांव के पावरलूम उद्योग को मौजूदा संकट से बाहर निकालना संभव है।

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