Nashik ZP Education Inquiry( सोर्स: सोशल मीडिया ) 
नासिक

मालेगांव के 28 स्कूलों पर प्रशासक नियुक्त, छात्र संख्या और अनुदान में गड़बड़ी; शिक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई

Nashik  Mid Day Meal Fund Misuse: मालेगांव के महात्मा गांधी विद्या मंदिर संस्थान के 28 स्कूलों में अनियमितताओं के आरोपों के बाद शिक्षा विभाग ने प्रशासक नियुक्त किया है।

अंकिता पटेल

Nashik ZP Education Inquiry: मालेगांव प्रशांत हिरे परिवार द्वारा संचालित 'महात्मा गांधी विद्या मंदिर' संस्थान के 28 माध्यमिक विद्यालयों पर राज्य शिक्षा विभाग ने प्रशासक नियुक्त कर दिया है। भ्रष्टाचार और गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों के बाद हुई यह कार्रवाई संस्थान की साख पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है।

पिछले साल अप्रैल में नासिक जिला परिषद के माध्यमिक शिक्षा अधिकारी द्वारा की गई जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे, मान्यता और सरकारी अनुदान बनाए रखने के लिए कागजों पर विद्यार्थियों की संख्या वास्तविक उपस्थिति से कहीं अधिक दिखाई गई।

छात्र संख्या को आधार बनाकर शिक्षकों के अतिरिक्त पद स्वीकृत कराए गए। कई शिक्षक एक स्कूल में पढ़ा रहे थे और वेतन दूसरे स्कूल से उठा रहे थे। मध्याह्न भोजन योजना के तहत अधिक छात्रों की उपस्थिति दर्ज कर सरकारी निधि का दुरुपयोग करने का गंभीर निष्कर्ष जांच रिपोर्ट में दिया गया है। इन सभी अनियमितताओं के आधार पर शिक्षा संचालक ने पदभार ग्रहण करने से तीन वर्षों तक के लिए प्रशासक नियुक्त करने का आदेश दिया है।

राजनीतिक गलियारों में हलचलः भुसे बनाम हिरे

इस प्रशासनिक कार्रवाई की मालेगांव की स्थानीय राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। स्कूली शिक्षा मंत्री दादा भुसे और हिरे परिवार के बीच दशकों पुरानी राजनीतिक लड़ाई जगजाहिर है।

चुनाव में अद्वय हिरे की हार के बाद इस कार्रवाई को राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन' माना जा रहा है। सुनवाई के दौरान संस्थान के प्रतिनिधियों ने आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया, शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई किसी दबाव में नहीं, बल्कि पुख्ता सबूतों और लंबी प्रशासनिक सुनवाई के बाद की गई है।

कार्रवाई का लेखा-जोखा

संस्थानः महात्मा गांधी विद्या मंदिर (मालेगांव)। प्रभावित विद्यालय। 28 माध्यमिक स्कूल, नियुक्ति अधिकारी डॉ. महेश पालकर (शिक्षा संचालक, राज्य), मुख्य आरोप छात्र संख्या में हेराफेरी, निधि का दुरुपयोग और शिक्षकों के पदों में अनियमितता। अवधि: 3 साल के लिए प्रशासक नियुक्त।

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