वडसा-गड़‌चिरोली नई ब्रॉडगेज परियोजना का कार्य पूरा प्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स: AI
नागपुर

गड़चिरोली में पहली बार दौड़ेगी ट्रेन, 49 KM रेल लाइन तैयार, 21 सितंबर को स्पीड ट्रायल, जानें किसे मिलेगा फायदा

Wadsa Gadchiroli Railway Line: दक्षिण-पूर्व-मध्य रेलवे की बहुप्रतीक्षित वडसा-गड़चिरोली ब्रॉडगेज परियोजना पूरी हो गई है। सोमवार 21 सितंबर को वडसा-आरमोरी सेक्शन में स्पीड ट्रायल का आयोजन किया जाएगा।

प्रमोद यादव

Vidarbha Rail Infrastructure: दक्षिण-पूर्व-मध्य रेलवे नागपुर के अंतर्गत बहुप्रतीक्षित और बहुउद्देश्यीय वडसा-गड़‌चिरोली नई ब्रॉडगेज परियोजना का कार्य पूरा हो गया है। सोमवार, 21 सितंबर को वडसा आरमोरी सेक्शन में रेल लाइन का निरीक्षण और स्पीड ट्रायल किया जायेगा।

इसके तहत सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक रेलवे ट्रैक से स्वयं, अपने बच्चों और मवेशियों को दूर रखने के निर्देश दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि गड़चिरोली जिले को पहली बार सीधे रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना से गोंदिया और नागपुर के माध्यम से समूचे विदर्भ के औद्योगिक, सामाजिक और आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी।

गड़चिरोली के जंगलों में पहली बार दौड़ेगी ट्रेन

वडसा, कुरुड, आरमोरी, पालोरा, ठाणेगांव, वासाला, इंजेवारी, देऊलगांव, आकापुर, किटाली और चुरमुरा जैसे ग्रामीण व वन क्षेत्रों से गुजरने वाली यह रेल लाइन जिले के विकास का मुख्य आधार बनेगी, रेलवे द्वारा वडसा को गोंदिया से पहले ही जोड़ा जा चुका है। ऐसे में वडसा-गड़चिरोली रेल लाइन को परिचालन के लिए हरी झंडी मिलते ही गड़चिरोली भी सीधे तौर पर गोंदिया जिला के माध्यम पूरे देश के रेलवे नेटवर्क से जुड़ जायेगा। वर्तमान में गड़चिरोली जिला महाराष्ट्र के उन प्रमुख जिलों में शामिल है। जहां अभी तक रेल नेटवर्क का सीधा विस्तार नहीं हुआ था। इससे जिले को पहली बार ब्रॉडगेज रेल सुविधा मिलेगी।

गड़चिरोली में रेल लाइन बनने के बाद

  • गड़चिरोली से नागपुर और अन्य प्रमुख शहरों तक आवागमन आसान होगा।

  • औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।

  • खनिज, स्टील और अन्य सामान की दुलाई में सुविधा होगी।

  • स्थानीय व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बेहतर होगी।

प्रोजेक्ट देखें एक नजर में

घटक / मानदंडपरियोजना विवरण
रेलवे जोनदक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे (SECR)
रेलवे मंडलनागपुर मंडल
कुल लंबाईलगभग 49.50 किलोमीटर
अनुमानित लागतकरीब ₹1,886 करोड़
निर्माण एजेंसीSECR नागपुर (निर्माण विभाग)
फंडिंग पैटर्न (लागत वहन)50:50 (केंद्र सरकार और महाराष्ट्र सरकार की संयुक्त भागीदारी)

वन क्षेत्र, भूमि अधिग्रहण चुनौती

यह परियोजना कान्हा-नवेगांव-नागझिरा इंद्रावती टाइगर कॉरिडोर क्षेत्र से जुड़े चन क्षेत्र के कारण पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया से भी गुजरी है।

रेलवे ने वन भूमि डायवर्जन और वन्यजीव संरक्षण से संबंधित प्रस्ताव प्रस्तुत किए थे। वन भूमि के लिए करीब 83.431 हेक्टेयर क्षेत्र के डायवर्जन का प्रस्ताव दिया गया था, जबकि गैर-वन भूमि की आवश्यकता भी दर्ज की गई थी।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र के विकास को लगेंगे पंख

  • उद्योगों को मिलेगा रेल कनेक्शन: गड़चिरोली जिला में प्रस्तावित स्टील और खनिज आधारित उद्योगों के लिए माल परिवहन आसान होगा।

  • आदिवासी क्षेत्रों को लाभ :इससे नक्सल प्रभावित दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी।

  • पर्यटन को बढ़ावा: वन क्षेत्रऔर प्राकृतिक पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हो सकती है।

  • रोजगार के अवसर: निर्माण कार्य और उद्योगों के विस्तार से रोजगार की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद है।

  • सतीश दंडारे नवभारत।

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