Vidarbha 3 New Expressway Projects: महाराष्ट्र में बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास का पहिया अब राज्य के पूर्वी छोर 'विदर्भ' की ओर तेजी से मुड़ गया है। सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उसका ध्यान केवल मुंबई या पुणे के ट्रैफिक और विकास तक सीमित नहीं है। विदर्भ के सुदूर जिलों को आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ने के लिए तीन विशाल एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की घोषणा की गई है, जो इस क्षेत्र के लिए 'लाइफलाइन' का काम करेंगी।
महाराष्ट्र सड़क विकास निगम (MSRDC) के तहत तैयार होने वाले ये प्रोजेक्ट्स पूरी तरह से 'एक्सेस-कंट्रोल्ड' (प्रवेश-नियंत्रित) होंगे, जो ठीक 'समृद्धि महामार्ग' की तर्ज पर बनाए जाएंगे।
| परियोजना | लंबाई (किमी) | कुल लागत (करोड़ रुपए) | भूमि अधिग्रहण लागत (करोड़ रुपए) |
|---|---|---|---|
| नागपुर-गोंदिया एक्सप्रेसवे | 162.577 किमी | 19,582.19 करोड़ रुपए | 3,162.18 करोड़ रुपए |
| भंडारा-गड़चिरोली एक्सप्रेसवे | 94.241 किमी | — | 931.15 करोड़ रुपए |
| नागपुर-चंद्रपुर एक्सप्रेसवे | 204.799 किमी | — | 2,353.94 करोड़ रुपए |
ये सड़कें केवल डामर और कंक्रीट का जाल नहीं हैं, बल्कि ये 'फीडर रूट्स' के रूप में काम करेंगे। इनका मुख्य उद्देश्य छोटे जिलों और औद्योगिक बेल्ट को सीधे 701 किलोमीटर लंबे नागपुर-मुंबई समृद्धि महामार्ग से जोड़ना है।
नागपुर-चंद्रपुर एक्सप्रेसवे का निर्माण विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चंद्रपुर, जो अपने कोयला और स्टील उद्योगों के लिए प्रसिद्ध है, इस सड़क के बनने से सीधा लॉजिस्टिक्स लाभ उठा सकेगा। वहीं, गोंदिया और गड़चिरोली जैसे नक्सल प्रभावित और पिछड़े माने जाने वाले क्षेत्रों को इन सड़कों के माध्यम से विकास की नई किरण मिलेगी। जब कच्चे माल और तैयार माल की आवाजाही तेज होगी, तो परिवहन की लागत कम होगी, जिससे विदर्भ का माल वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बन सकेगा।
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विदर्भ में इन प्रोजेक्ट्स का सबसे बड़ा तात्कालिक असर 'रियल एस्टेट' पर दिखने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सप्रेसवे के पास वाले 'एग्जिट पॉइंट्स' और 'इंटरचेंज' के पास जमीन की कीमतें अगले 2-3 वर्षों में 50% से 100% तक बढ़ सकती हैं। नागपुर, जो पहले से ही भारत का 'लॉजिस्टिक्स हब' है, अब चंद्रपुर और भंडारा जैसे शहरों को अपने 'सैटेलाइट टाउन' के रूप में विकसित होते देखेगा। इससे स्थानीय युवाओं के लिए लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में हजारों नौकरियां पैदा होंगी।
कैबिनेट द्वारा फंडिंग की मंजूरी मिलने के बाद, अब गेंद प्रशासन के पाले में है। वर्तमान में अधिकांश मार्गों का सर्वेक्षण (Survey) पूरा हो चुका है। सरकार का लक्ष्य है कि 2024 के अंत या 2025 की शुरुआत तक निविदाएं (Tenders) जारी कर दी जाएं। हालांकि, जमीन अधिग्रहण की जटिल प्रक्रिया को देखते हुए आम जनता को इन एक्सप्रेसवे पर सफर करने के लिए 4 से 5 साल का इंतजार करना पड़ सकता है।