नवेगांंव-नागझिरा टाइगर रिज़र्व में मिला बाघ का शव 
नागपुर

वर्चस्व की लड़ाई में बाघ की मौत, नवेगांंव-नागझिरा टाइगर रिज़र्व में मिला शव

महाराष्ट्र में वर्चस्व की लड़ाई में एक नर बाघ की मौत होने की घटना सामने आई है। भंडारा और गोंदिया जिले में आने वाले नवेगांंव-नागझिरा टाइगर रिज़र्व में एक बाघ का शव मिला है। मृत बाघ का नाम टी-9 बताया गया। उसकी उम्र 9-10 वर्ष थी।

आकाश मसने

नागपुर: महाराष्ट्र में वर्चस्व की लड़ाई में एक नर बाघ की मौत होने की घटना सामने आई है। भंडारा और गोंदिया जिले में आने वाले नवेगांंव-नागझिरा टाइगर रिज़र्व में एक बाघ का शव मिला है। मृत बाघ का नाम टी-9 बताया गया। उसकी उम्र 9-10 वर्ष थी। जांच के लिए नमूने लेने के बाद वन विभाग ने बाघ का शव विच्छेदन (पोस्टमार्टम) किया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार की सुबह करीब 10 बजे वन परिक्षेत्र नागझिरा अभयारण्य अंतर्गत सह वन क्षेत्र नागझिरा परिसर, नियत क्षेत्र नागझिरा 1, कक्ष क्र. 96 में मंगेझरी रोड नागदेव पहाड़ी परिसर में एक बाघ मृत अवस्था में मिला।

गश्ती के दौरान मृत बाघ दिखने के बाद बीट रक्षक ने तुरंत वन अधिकारियों को जानकारी दी। सूचना मिलने पर उप वनसंरक्षक जयरामे, राहुल गवई, एमएस चव्हाण, वीएम भोसले और उनकी टीम मौके पर पहुंचे।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की कार्यपद्धति के अनुसार गठित समिति द्वारा घटनास्थल क्षेत्र एवं मृत बाघ का निरीक्षण किया गया। मृत बाघ का पोस्टमार्टम पशु चिकित्सा अधिकारियों की एक टीम द्वारा समिति के सदस्यों की उपस्थिति में किया गया। जांच के लिए बाघ के शव से नमूने एकत्रित किए गए।

अंतिम संस्कार किया गया

पशु चिकित्सा अधिकारियों का अनुमान है कि मृत नर बाघ टी-9 ने वर्चस्व की लड़ाई में गंभीर जख्मी होने के कारण दम तोड़ दिया। मृत बाघ के सभी अंग साबूत पाए गए हैं। पोस्टमार्टम के बाद बाघ का अंतिम संस्कार कर दिया गया। नवेगांव नागझिरा टाइगर रिजर्व के उप निदेशक राहुल गवई के मार्गदर्शन में वन परिक्षेत्र अधिकारी वीएम भोसले आगे की जांच कर रहे हैं।

जानिए, नवेगांव-नागझिरा टाइगर रिज़र्व के बारे में

नवेगांव-नागझिरा टाइगर रिज़र्व महाराष्ट्र के दो जिलों गोंदिया और भंडारा में स्थित है। यहां तेंदुए जैसे बड़े मांसाहारी और जंगली कुत्ते, भेड़िया, गीदड़, जंगल बिल्ली तथा ‘स्लॉथ बीयर’ जैसे छोटे मांसाहारी जानवर पाए जाते हैं। वहीं शाकाहारी जीवों में चीतल, सांभर, नीलगाय, चौसिंगा, कांकड़/बार्किंग डियर, जंगली सुअर और भारतीय गौर शामिल हैं। यहां माउस डीयर को भी देखा गया है। साथ ही यहां पक्षियों की 300 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं।

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