Nagpur Leaders Credit Success To Teachers : जीवन में सफलता हासिल करने के बाद व्यक्ति चाहे कितने ही ऊंचे मुकाम पर पहुंच जाए, उसके पीछे किसी न किसी गुरु का मार्गदर्शन जरूर होता है। शिक्षक केवल किताबों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि जीवन को समझने और सही दिशा चुनने की दृष्टि भी प्रदान करते हैं। समय गुजर जाता है, विद्यार्थी बड़े होकर अलग-अलग क्षेत्रों में पहचान बनाते हैं, लेकिन शिक्षकों से मिले संस्कार और सीख हमेशा उनके साथ रहते हैं। शिक्षक दिवस के अवसर पर शहर की विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों ने अपने गुरुजनों को याद करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
वरिष्ठ मूर्तिकार हीराचंद विकमशी ने अपने कलागुरु कलाचार्य पंधे गुरुजी को याद किया। उन्होंने कहा कि मिट्टी को आकार देने वाले तो कई मिल जाते हैं, लेकिन इंसान के व्यक्तित्व को आकार देने वाले गुरु दुर्लभ होते हैं। खामगांव के तिलक राष्ट्रीय विद्यालय में पंधे गुरुजी से हुई मुलाकात ने उनका जीवन बदल दिया। गुरुजी ने उन्हें केवल कला नहीं सिखाई, बल्कि जीवन को देखने की दृष्टि दी। उन्होंने समझाया कि शिल्प केवल बाहरी आकार नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे व्यक्तित्व और भावनाओं को समझने का माध्यम है।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका लीना निकम ने अपने गुरु बालासाहेब संगई को याद करते हुए कहा कि उनके पढ़ाने का तरीका और आत्मीयता आज भी प्रेरित करती है। वे विद्यार्थियों पर अपनी सोच थोपने के बजाय उन्हें स्वतंत्र रूप से विकसित होने का अवसर देने में विश्वास रखते थे। उनके प्रयासों और दान से सीताबाई संगई एजुकेशन सोसाइटी की स्थापना हुई, जिसने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ जीवन जीने की कला भी सिखाई।
वरिष्ठ रंगकर्मी प्रभाकर आंबोणे ने अपनी सफलता का श्रेय शिक्षकों को दिया। बामणी गांव में प्राथमिक शिक्षा के बाद उन्होंने उमरेड के न्यू आइडियल हाई स्कूल में पढ़ाई की। मुख्याध्यापक विंचुरे और संस्कृत शिक्षक आचार्य ने उन्हें प्रोत्साहित किया। मैट्रिक के दौरान राघोर्ट सर ने उन्हें अपने घर में रखकर पढ़ाई में मदद की। नागपुर शहर आने के बाद मदन गडकरी और रमेश अंभईकर ने उन्हें रंगमंच के क्षेत्र में तराशा।
मनपा स्थायी समिति की अध्यक्ष शिवानी दाणी ने कहा कि उनके जीवन में शिक्षकों का स्थान अतुलनीय है। उन्होंने सोमलवार खामला स्कूल और धरमपेठ साइंस कॉलेज में शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने हरदास मैडम, मेश्राम सर, भोंगड़े सर, भोयर सर और गेहरवार मैडम को याद किया। उन्होंने कहा कि आज भी उनके वार्ड में कुछ शिक्षक रहते हैं, यह उनके लिए खुशी की बात है। दाणी के अनुसार, जीवन में जो भी कमी रह गई, वह उनकी अपनी ग्रहण क्षमता की कमी हो सकती है, लेकिन शिक्षकों का योगदान कभी कम नहीं हो सकता। शिक्षकों का ऋण जीवनभर नहीं चुकाया जा सकता।