नागपुर दंत महाविद्यालय, अस्थायी पद,(सोर्स: सोशल मीडिया) 
नागपुर

राज्य सरकार का बड़ा फैसला, नागपुर दंत महाविद्यालय को राहत, 65 अस्थायी पदों की अवधि बढ़ी

Nagpur Dental College: राज्य सरकार ने नागपुर शासकीय दंत महाविद्यालय एवं अस्पताल के 65 अस्थायी पदों की अवधि 31 अगस्त 2026 तक बढ़ा दी है, जिससे सेवाओं की निरंतरता बनी रहेगी।

अंकिता पटेल

Nagpur Government Hospital: नागपुर शासकीय दंत महाविद्यालय एवं अस्पताल में कार्यरत विभिन्न श्रेणियों के 65 अस्थायी पदों को राज्य सरकार ने बड़ी राहत देते हुए आगामी 6 माह तक जारी रखने का निर्णय लिया है। वैद्यकीय शिक्षा एवं औषधि द्रव्य विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार इन सभी पदों की सेवा अवधि 31 अगस्त 2026 तक बढ़ा दी गई है। इस निर्णय से अस्पताल की चिकित्सा सेवाओं, शैक्षणिक गतिविधियों तथा प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता बनी रहेगी।

राज्य सरकार ने 25 सितंबर 2025 के शासन निर्णय के तहत इन 65 अस्थायी पदों को 1 सितंबर 2025 से 28 फरवरी 2026 तक मंजूरी प्रदान की थी। निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद वैद्यकीय शिक्षा एवं अनुसंधान संचालनालय (डीएमईआर) के आयुक्त कार्यालय ने इन पदों की आवश्यकता को देखते हुए राज्य सरकार को अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा था। प्रस्ताव पर विचार करने के बाद सरकार ने इन पदों को आगे भी जारी रखने की स्वीकृति प्रदान कर दी।

अस्पताल की सेवाओं को मिलेगा बल

अस्पताल विदर्भ का प्रमुख दंत चिकित्सा शिक्षा एवं उपचार संस्थान है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए आते हैं। अस्पताल में दंत रोगों के उपचार, शल्य चिकित्सा, विशेष चिकित्सा सेवाओं तथा प्रशिक्षण कार्यों के संचालन में इन कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में अस्थायी पद समाप्त होने की स्थिति में अस्पताल की कार्यप्रणाली प्रभावित होने की आशंका थी।

मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या और स्वास्थ्य सेवाओं की मांग को देखते हुए इन पदों का बने रहना अत्यंत आवश्यक था। सरकार के इस निर्णय से मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं होगी।

स्थायी समाधान की उठने लगी मांग

हालांकि अस्थायी पदों को 6 माह की राहत मिलने से तत्काल राहत मिली है, लेकिन स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि लंबे समय से अस्थायी आधार पर संचालित पदों के लिए स्थायी समाधान तलाशने की आवश्यकता है। इससे अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों में मानव संसाधन की कमी दूर करने में मदद मिलेगी तथा स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और अधिक बेहतर हो सकेगी।

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