नागपुर स्मार्ट ट्रैफिक बूथ,(सोर्स: सोशल मीडिया) 
नागपुर

नागपुर में स्मार्ट सिटी परियोजना को नुकसान, असामाजिक तत्वों ने ट्रैफिक बूथ बनाए निशाना; कार्रवाई न होने से बढ़

Nagpur Smart Traffic Police Booth: नागपुर में ट्रैफिक पुलिस कर्मचारियों के लिए लगाए गए स्मार्ट बूथ असामाजिक तत्वों के निशाने पर हैं। कई चौराहों पर बूथों के शीशे तोड़े गए हैं।

अंकिता पटेल

Nagpur Traffic Police Booth Damage: नागपुर शहर में लगाए गए स्मार्ट ट्रैफिक बूथ असामाजिक तत्वों के निशाने पर हैं। शहर के कई प्रमुख चौराहों और व्यस्त मार्गों पर बने वृधों के शीशे तोड़ दिए गए हैं लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही। बता दें कि करीब 2 वर्ष पहले स्मार्ट सिटी में यातायात पुलिस विभाग के कर्मचारियों को भीषण गर्मी, बारिश व ठंड से बचाव के लिए शहर में 125 स्मार्ट पुलिस बूध की योजना तैयार की गई थी।

कई स्थानों पर बूध लगाए जा चुके हैं। खराब मौसम में यह यातायात पुलिस विभाग में कार्यरत कर्मचारियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं लेकिन इनकी दुर्दशा देखकर खुद यातायात पुलिस विभाग हैरान है। करीब आधा दर्जन स्थानों पर स्मार्ट ट्रैफिक बूथ के शीशे फोड़े जा चुके हैं। यह कृत्य सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाला है।

जिम्मेदारी से हाथ खड़े कर रही मनपा

ये ट्रैफिक बूथ पुलिस कर्मचारियों की सुविधाओं के लिए स्थापित किए गए थे। इसमें लगी आधुनिक प्रणाली के जरिए ट्रैफिक कर्मचारियों को यातायात सुचारु रखने में काफी सहायता मिलती है लेकिन बूथों के रखरखाव का अभाव नजर आ रहा है। पुलिस विभाग का काम केवल बूथ के जरिए ट्रैफिक सुचारु रखने का है, रखरखाव का जिम्मा मनपा का है लेकिन मनपा अपनी जिम्मेदारी से हाथ खड़े कर रही है।

जनता के करोड़ों रुपयों की बर्बादी

शहर में कुल 125 स्मार्ट ट्रैफिक बूध लगाने की योजना थी। इसमें से करीब ७० चौराहों पर बूथ लगा दिए गए हैं। स्थापित बुधों की कुल कीमत करोड़ों में है। अब ये बूथ अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। यह जनता के पैसों की बर्बादी है।

पुलिस की तीसरी आंख बंद, निगरानी कैसे

स्मार्ट सिटी की और कदम बढ़ाते हुए कई चौराहों पर सीसीटीवी लगाए जा चुके हैं। यह अपराध की जांच में पुलिस के लिए तीसरी आंख का काम करते है। स्मार्ट बूथ की तोडफोड करने वालों की धर पकड़ के लिए सीसीटीवी निगरानी अति आवश्यक है लेकिन कई चौराहों पर पुलिस की तीसरी आंख बंद है। ऐसे में अपराधियों पर निगरानी कैसे लगेगी।

बूथ हूं भाई भूत नहीं

सिटी में स्थापित किए गए स्मार्ट बूथ मानों बूथ नहीं भूत बन गए ही। इक्का-दुक्का स्थानों को छोड़ कई स्थानों पर दूध में पुलिसकर्मी नजर नहीं आते। सौर ऊर्जा संचालित स्मार्ट बूच को ट्रैफिक कर्मचारी स्वयं डिजिटल रूप में संचालित कर सकते हैं।

यूजर आईडी के माध्यम से बूरा को खोलने और बंद करने की सुविधा जोड़ी गई है। एग्जॉस्ट फैन और साधारण पंटों के साथ ही सार्वजनिक उद्‌घोषणा (पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम) भी लगाया गया है। अब यहां से आवाज भी सुनाई देना बंद हो गई है।

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