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नागपुर में आधुनिक ITMS और CCTV व्यवस्था के बावजूद प्रमुख चौराहों पर जाम की समस्या का दावा।
दुकानों के बाहर सामान, फुटपाथों पर ठेले और सड़क किनारे अवैध पार्किंग से यातायात प्रभावित होने की शिकायतें।
कॉटन मार्केट, इतवारी, सीताबर्डी, सक्करदरा, धरमपेठ और मेडिकल चौक का उल्लेख।
अतिक्रमण हटाने के बाद दोबारा कब्जे होने से कार्रवाई की स्थायी प्रभावशीलता पर सवाल।
Nagpur Encroachment Problem: नागपुर जिले में करोड़ों रुपये की लागत से लगा एआई-संचालित इंटेलिजेंस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस), आधुनिक सेंसर, चौराहों पर टंगे 4 सीसीटीवी कैमरे और ट्रैफिक कंट्रोल रूम की बड़ी-बड़ी स्क्रीन्स- कागजों पर नागपुर शहर किसी आधुनिक 'स्मार्ट सिटी' जैसा चमकता है।
लेकिन जमीन पर उतरते ही इस पूरी तकनीक और चकाचौंध पर पानी फिर जाता है। वजह है, सड़कों पर फैला बेकाबू और बेधड़क अतिक्रमण जिसके कारण ऑरेंज सिटी के प्रमुख चौराहे रोज ट्रैफिक जाम लग जाता है।
इन तमाम विषम और अराजक परिस्थितियों के बीच ट्रैफिक पुलिस ने महानगरपालिका के साथ मिलकर अवैध अतिक्रमण हटाने का काम शुरू किया है और बड़ी संख्या में अतिक्रमण भी हटाये भी है लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस नीति ना होने से शहर के अधिकांश चौराहे और फुटपाथ पर अतिक्रमण अमर बेल का रूप ले चुका है।
जितनी बार हटायेंगे, उतनी बार उग आयेंगे' ट्रैफिक पुलिसकर्मी चौराहों पर मैनुअली कमान संभालकर बड़े जाम को टालने का कड़ी मेहनत करते दिखाई दे रहे हैं।
हालांकि केवल पुलिस कार्रवाई से स्थायी राहत नहीं मिल पाती, क्योंकि कार्रवाई के कुछ ही घंटों बाद अतिक्रमणकारी दोबारा अपनी जगहों पर लौट आते हैं।
शहर के ट्रैफिक सिस्टम को इन प्रमुख चौराहों पर सुगम बनाने और अतिक्रमण की मार से बचाने के लिए व्यावहारिक व नीतिगत कदम की जरूरत है।
नागपुर शहर पुलिस और नागपुर महानगरपालिका एक स्थायी साझा दस्ता इन प्रमुख चौराहों पर तैनात किया जाए जो रोजाना बिना किसी डील के अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई करे।
इतवारी, सक्करदरा, गणेशपेठ, मेडिकल, मेयो, बर्डी जैसे इलाकों के रेहड़ी-पटरी वालों के लिए तयशुदा वेंडिंग जोन का निर्माण किया जाए और मुख्य सड़कों को भोपाल शहर की तरह पूर्णतः नो-हॉकिंग जोन घोषित किया जाए।
व्यावसायिक भवनों को बेसमेंट पार्किंग को तुरंत अतिक्रमण मुक्त करवाकर वाहनों की पार्किंग को सख्ती से बहाल किया जाए,
नागपुर शहर की मुख्य धमनिया कहे जाने वाले कई चौराहे अतिक्रमण और अवैध पार्किंग के चलते वाहन चालकों के लिए किसी जंग के मैदान से कम नहीं है।
नागपुर का यहा सबसे पुराना और व्यस्त व्यापारिक केंद्र है। यहां थोक बाजार होने के कारण भारी वाहनों का आना-जाना लगा रहता है लेकिन सहकी के दोनों और दुकानों के सामान, बोर्ड और बाहर खड़े बेतरतीब वाहन आधी सड़क पेर लेते हैं।
नतीजतन, दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकी को यहां रेग-रंगकर चलना पहता है और घंटों जाम में फररना इनकी रोज की मजबूरी बन गई है।
नागपुर शहर वर शॉपिंग हब कहे जाने वाले यहीं क्षेत्र में पटरी दुकानदारों और अवैध ठेली ने फुटपाथों से लेकर सड़क का बड़ा हिस्सा हथिया लिया है।
यहां खरीदारी करने आने वाले लीग अपनी गाड़ियां सड़क किनारे ही पार्क कर देते है जिससे पहले से ही संकरी सड़के और सिकुड़ जाती है। पैदल चलने वालों के लिए जगह न होने के कारण उन्हें मजबूरन बीच सड़क पर चलना पड़ता है जिससे हादसों का खतरा हमेशा बना रहता है।
सक्करदरा चौक दक्षिण नागपुर का यह अति-व्यस्त चौराहा सब्जी बाजार और कमर्शियल दुकानों के अतिक्रमण से घिरा हुआ है, सड़क किनारे सजे फल-सब्जी के ठेले और उनसे सामान खरीदने वाले ग्राहकों की भीड़ के कारण यहा हमेशा अफरातफरी मदी रहती है। स्कूल बसे और एम्बुलेंस भी अक्सर यहां घंटी फंसी नजर आती है।
धरमपेठ के व्यावसायिक परिसरों के बाहर अवैध पार्किंग और बेतरतीब खड़े पाहनों ने ट्रैफिक का गणित बिगाड़ दिया है। बेसमेंट पाकिंग का उपयोग दुकानों के रूप में होने के कारण ग्राहक अपनी गाड़ियां सड़क पर ही पार्क करते हैं जिससे भीषण जाम लगता है।
नागपुर शहर के सबसे महत्वपूर्ण अस्पतालों के करीब स्थित होने के बावजूद इस चौराहे के आसपास अनधिकृत हॉकरो और दुकानों का कब्जा है। यहां से गंभीर मरीजों को लेकर गुजरने वाली एम्बुलेंस को भी अतिक्रमण और जाम के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।