नागपुर

Nagpur News: घनकचरा संकलन में करोड़ों का घोटाला, MLA ठाकरे ने लगाया आरोप

नवभारत डेस्क

नागपुर. महानगर पालिका द्वारा नवंबर 2019 में शहर में घर-घर कचरा संग्रहण करने और इसे भांडेवाड़ी डंपिंग यार्ड तक पहुंचाने के लिए 2 निजी कम्पनियों को काम सौंपा. इनमें एजी एनवायरो इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और बीवीजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं. यह आरोप पश्चिम नागपुर के विधायक विकास ठाकरे ने लगाया. उन्होंने कहा कि दोनों ही कम्पनियां करार की शर्तों का खुला उल्लंघन करते हुए करोड़ों की हेराफेरी कर रही है. पुरानी ऑपरेटर कम्पनी कनक रिसोर्सेज मैनेजमेंट लिमिटेड की तुलना में मनपा द्वारा उपरोक्त कम्पनियों का ज्यादा भुगतान कर रही है. फिर भी यह कम्पनियां घर से मिल रहे सूखे और गीले कचरे का विलगीकरण किये बिना ही डम्पिंग यार्ड पहुंचा रही है. इसमें निर्माण कचरा, बायोमेडिकल कचरा, मिट्टी, गिरे हुए पेड़ और पेड़ की शाखाएं आदि मिलाकर विभिन्न अनियमितताएं चल रही हैं.

कभी नहीं उठाया विलगीकृत कचरा

उन्होंने कहा कि इन कम्पनियों ने पिछले 4 वर्षों में कभी भी पृथक किया किया गया कचरा नहीं उठाया. फिर भी मनपा दोनों कम्पनियों को अधिकारियों की मिली भगत से भारी भरकम भुगतान कर रही है. कई बार कम्पनियों को ठोस कचरे में मिट्टी मिलाते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है. इस पर संज्ञान लेते हुए करीब 2 साल पहले मनपा की आमसभा करार निरस्त करने को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया था लेकिन आज तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.

गैर जरूरी टेंडर किया जारी

ठाकरे ने कहा कि अब मनपा के ठोस अपशिष्ट विभाग ने फैक्ट्री विभाग के साथ मिलकर करीब 24 करोड़ रुपये की लागत से 50 कॉम्पेक्टर और 15 हुक लोडर की खरीद के लिए टेंडर जारी किए हैं. टेंडर में 6 कचरा संग्रहण केंद्रों का 5 वर्ष तक रखरखाव भी शामिल है. नवंबर 2019 में जिन टेंडरों में इन दोनों ऑपरेटरों को नियुक्त किया गया था वे घरेलू कचरा संग्रहण और सीधे प्रसंस्करण केंद्र तक परिवहन से संबंधित थे. कचरा संग्रहण केंद्र के विकास और संचालन एवं रखरखाव पर खर्च करने के लिए मनपा पर कोई दायित्व नहीं है. फिर भी यह निविदा जारी की गई. यह नागपुर के नागरिकों द्वारा चुकाया गया कुल 30 करोड़ को भ्रष्टाचार है. नई निविदा  ऑफलाइन बुलाई गई है. मनपा को यह अधिकार नहीं है. 

कितने वर्ष चलेगी फिजूलखर्ची

मनपा अधिकारियों द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन विभाग में नियुक्त किए गए ये दोनों ऑपरेटर पिछले 4 वर्षों से करोड़ों रुपए का फायदा पहुंचा रहे हैं. इस नये टेंडर के कारण मनपा को 30 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा. इसलिए नागपुर की जनता की गाढ़ी कमाई को संचालक पर उड़ाने की कोशिश करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए और इस टेंडर को तुरंत रद्द किया जाना चाहिए. अगर प्रशासन की ओर से देरी की गयी तो तीव्र जनआंदोलन होगा.

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