धनतेरस और दिवाली के दौरान नागपुर में 100 से 125 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान।
सोने-चांदी के ऊंचे भाव के बावजूद सराफा बाजार में अच्छी मांग।
ज्वेलर्स ने नए कलेक्शन और विशेष ऑफर्स के साथ की तैयारी।
धनतेरस के बाद शादी सीजन से भी बाजार को मिलेगा सहारा।
कीमतों में हालिया गिरावट से ग्राहकों को खरीदारी का फायदा मिलने की उम्मीद
Gold Silver Jewellery Shopping Nagpur: नागपुर दिवाली और धनतेरस का शुभ मुहूर्त जेवर के बगैर पूरा नहीं होता। भले ही छोटा-सा खरीदा जाए परंतु खरीदी तो बनती ही है। छोटी-मोटी खरीदी से ही यह बाजार गुलजार हो जाता है।
नागपुर में ही केवल एक दिन में यह विशाल रूप ले लेता है, धनतेरस और दिवाली बाजार के दौरान शहर में ही 100 से 125 करोड़ रुपये के गहनों और चांदी के बर्तनों की खरीदी होती है।
कोई एक से बढ़कर एक ऑफर्स के साथ सुसज्ज है तो कोई विशाल रेंज लेकर, मार्केट में भीड़ बढ़ती जा रही है। धनतेरस तक यह अपने चरम पर पहुंच जाएगी, कीमत अधिक होने के बाद भी सराफा बाजार में मंदी जैसा माहौल नहीं है।
इस बार बार सीजन काफी लंबा खिंचने वाला है। इस बार धनतेरस दिवाली खास रहने वाली है। घनतेरस के बाद भी शादियों का सीजन है जो बाजार को को गुलजार बनाए रखेगा, वैसे भी भारतीय परंपरा में हर बात पर सोने और चांदी की पूछपरख बनी ही रहती है।
- मोहित सेद, बटुक भाई ज्वेलर्स
धनतेरस का मुहूर्त कोई नहीं छोड़ना चाहता है। हर कोई कुछ न कुछ खरीदी करता ही है। इसके लिए पूरे वर्ष लोग बचत करते हैं, इसलिए हमें भी उम्मीद रहती है।
इस बार भी हमने विशेष तैयारी की है। पूरे देश से जहां शानदार कलेक्शन बुलाए गए हैं तो वहीं स्कीम भी अच्छी है। इसके अलावा बायबैंक की योजना भी खास है।
- विराज सेठ, बटुक भई संस
इस बार शादियों के लिए भी अच्छे ७ मुहूर्त है। शादियों पर गहना खरीदना छोटे से छोटे परिवार के लिए भी जरूरी होती है। इसके कारण इस वर्ष सराफा बाजार में लंबी ग्राहकी देखने को मिल सकती है। वैसे भी अभी से ही लोग खरीदी करने लगे है।
इस समय सोने और चांदी की कीमतों में कुछ गिरावट बल रही है जिसका फायदा ग्राहकों को मिल रहा है। सोने और चांदी की कीमत ऊंची होने के बावजूद मार्केट में डिमांड अच्छी बनी रही। अभी दिवाली के साथ शादियों की खरीदी भी शुरू हो गई है।
धनतेरस रस का मुहूर्त काफी महत्वपूर्ण होता है। इसलिए हर कोई कुछन। खरीदी करना ही चाहता है। इसी चाहत के कारण बाजार का माहौल बदलता है और बाजार में खरीदी बढ़ जाती है। इस विश्वास की परंपरा वर्षों से चली आ रही है और युवा पीढ़ी में भी यह मान्यता बनी हुई है, जो बाजार के लिए अच्छा है।पारस रोकड़े, रोकड़े अवेलर्स