Nagpur Railway Station Train Theft: नागपुर पिछले कई महीनों से नागपुर स्टेशन और ट्रेनों में चोरों की धमाचौकड़ी आम यात्रियों को लंचा चूना लगा रही है। दूसरी तरफ, यात्रियों की कथित सुरक्षा में तैनात रेलवे सुरक्षा बल और लोहमार्ग पुलिस रेलवे परिसरों में संदिग्धों की पहचान करने में नाकाम साबित हो रही है। यही कारण है कि पहले चार्जिंग पर रखे मोबाइल चोरी करने वाले चोर अब यात्रियों की जेब से मोबाइल और महिलाओं के गले से सोने की चेन पर हाथ साफ करने लगे हैं। चोरों को पता है कि उन पर किसी की नजर नहीं है। फलस्वरूप चोरों की मनमर्जी और सुरक्षा एजेंसियों की नाकामी का खामियाजा उन यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है जो ट्रेनों और स्टेशन परिसर को सुरक्षित समझकर पहुंचते हैं।
भांडापूरी, जिला पहली घटना बालाघाट, मप्र निवासी वीरेन्द्र सिंह अमृत सिंह पारधी (44) का मोबाइल उनकी शर्ट की जेब से चोरी कर लिया गया, घटना तब हुई जब वे स्टेशन के प्लेटफॉर्म 1 के ओपन वेटिंग हॉल में भोजन के बाद बैठे थे, थकावट के कारण उन्हें नींद आ गई और चोर ने 10,000 रुपये कीमत का मोबाइल चोरी कर लिया।
विजयनगर, राजकोट, गुजरात निवासी कन्हैयालाल वाधाजीभाई घोरेचा (53) अपने परिवार के साथ नागपुर से राजकोट जाने के लिए स्टेशन पहुंचे। प्लेटफॉर्म 8 पर आई ट्रेन के एसड कोच की ओर बढ़ते समय किसी संदिग्ध महिला ने भीड़ का फायदा उठाकर उनके गले में बंधा सोने का लकिट चोरी कर लिया। इसकी कीमत 15,000 रुपये बताई गई।
हिवरीनगर निवासी भरतकुमार मुरलीधर आग्रवाल (51) ट्रेन 12139 सेवाग्राम एक्सप्रेस के कोच एसड में कल्याण से नागपुर का सफर कर रहे थे। नागपुर पहुंचने से पहले किसी अज्ञात आरोपी ने उनकी नींद का फायदा उठाकर 10,000 रुपये कीमत का मोबाइल चोरी कर लिया।
खास बात है कि जब भी स्टेशन और ट्रेनों में बढ़ती चोनियों के बारे में आरपीएफ और जीआरपी के वरिष्ट अधिकारियों से सवाल किये जायें तो जवाब से पहले कई कारण बताने शुरू कर दिये जाते है। कभी मैनपावर की कमी तो कभी बीएनएस का रोना, लेकिन परिणाम पर कभी काम होता, जबकि 6 से 7 वर्ष पहले इसी नागपुर स्टेशन पर आरपीएफ और जीआरपी का चोरों का ऐसा खौफ छ कि वे परिसर में पैर रखते ही पकड़े जाने के डर से आते ही नहीं थे।
स्टेशन हो या ट्रेन, अधिकतर चोरियां यात्रियों की गहरी नींद कर फायदा उठाकर की जाती हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों का अक्सर यह कहना रहता है कि यात्रियों को इतनी गहरी नीद में नहीं सोना चाहिए।
यह भी पढ़ें:-नागपुर: 33 महीने में सिर्फ पाए खड़े हुए, साहब! केंद्रीय मंत्री के शहर में कछुए की रफ्तार से दौड़ रहा ‘केबल स्ट
हालांकि यह दलील रेलवे द्वारा प्रदान की जा रही सुविधाओं के उलट नजर आती है। रेलवे स्वयं ही ट्रेनों में स्लीपर कलास की सुविधा देती है लेकिन यात्रियों से यह नहीं कहती कि आपको इस स्लीपर क्लास में सोना नहीं, केवल बैठना है, वो भी जागते हुए।