RPF Nagpur Railway Bedroll Theft Case: मध्य रेल के नागपुर मंडल ने गैर-किराया राजस्व (Non-Fare Revenue) के जरिए वित्तीय मोर्चे पर शानदार प्रदर्शन किया है। 1 जनवरी 2025 से 31 जुलाई 2026 तक के 19 महीनों के दौरान नागपुर मंडल ने ₹20 करोड़ 84 लाख से अधिक का राजस्व जुटाया है। हालांकि, राजस्व संग्रह में मिली इस बड़ी सफलता के बीच यात्रियों की सुरक्षा और रेलवे संपत्ति की देखरेख करने वाले रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नागपुर रेल मंडल द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार राजस्व के मुख्य स्रोत इस प्रकार रहे:
हॉकर्स, कैटरिंग व लाइसेंस फीस: फेरीवालों, कैटरिंग स्टॉल्स, लाइसेंस फीस और जुर्माने के माध्यम से सर्वाधिक ₹12.79 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ।
पार्किंग ठेके: विभिन्न स्टेशनों पर पार्किंग अनुबंधों से करीब ₹3.93 करोड़ की आय हुई।
विज्ञापन व डिस्प्ले नेटवर्क: विज्ञापनों से ₹3.29 करोड़ का राजस्व मिला।
मिनी रिफ्रेशमेंट रूम: स्टेशन रिफ्रेशमेंट रूम्स से ₹84 लाख की कमाई दर्ज की गई।
एक तरफ जहां राजस्व वसूली में नागपुर मंडल अव्वल रहा, वहीं इसी 19 महीने की अवधि में करीब ₹21.27 लाख मूल्य की रेलवे संपत्ति चोरी होने की शिकायतें दर्ज की गईं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि वातानुकूलित (AC) कोचों से चादर, कंबल और तकिए (बेडरोल) चोरी होने के मामलों में RPF की जांच टीम अब तक किसी भी आरोपी को पकड़ने में नाकाम रही है। कोच अटेंडेंट, ऑन-ड्यूटी स्टाफ और सीसीटीवी कैमरों की मौजूदगी के बावजूद एसी डिब्बों से लगातार हो रही चोरियां RPF के गश्ती व जांच तंत्र पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
हालांकि, यात्रियों की सुरक्षा और सहायता के मोर्चे पर RPF नागपुर शहर का मानवीय चेहरा भी सामने आया है। इस अवधि के दौरान स्टेशन परिसर व ट्रेनों से गुमशुदा हुए 4 में से सभी 4 बच्चों को सकुशल तलाश कर उनके परिजनों को सौंपा गया। इसके साथ ही लापता हुए 8 में से 5 बुजुर्ग नागरिकों को भी खोजने में RPF को सफलता मिली है। अब देखना यह है कि प्रशासन बेडरोल चोरी रोकने और आरोपियों को पकड़ने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।