पुराना भंडारा रोड, नागपुर सड़क परियोजना, (सोर्स: नवभारत फाइल फोटो)  
नागपुर

3 किमी की सड़क, सालों का इंतजार! नागपुर का पुराना भंडारा रोड कब होगा पूरा? धीमी रफ्तार से बढ़ी परेशानी

Bhandara Nagpur Road Project: नागपुर के 3 किमी लंबे पुराने भंडारा रोड का चौड़ीकरण और सीमेंटीकरण वर्षों से अटका है। धीमी रफ्तार से चल रहे काम से नागरिक और दुकानदार परेशान हैं।

अंकिता पटेल

Nagpur Infrastructure Delay: नागपुर सिटी में एकमात्र ऐसा रोड है जिसकी लंबाई 3 किमी ही है। इस डीपी रोड का चौड़ाईकरण व सीमेंटीकरण किया जाना है। इस रोड को लेटलतीफी पर तो कोई उपन्यास भी लिख सकता है। सबसे अहम यह है कि देशभर सहित जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ों में नेशनल हाईवे का जाल बिछाकर 'रोडमैन' कहलाने वाले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी तक पुराना भंडारा रोड नामक सड़क पर समय-समय पर लगाए जाने वाले 'रोड़ों' से परेशान हो गए हैं।

वे अपने भाषणों तक में अपने गृहनगर नागपुर के एक केलीबाग रोड और दूसरा पुराना भंडारा रोड की तकलीफ बयां कर चुके हैं। केलीबाग रोड तो ले-देकर पूरा हो गया लेकिन पुराना भंडारा रोड कब कम्पलीट हो पाएगा इसकी कोई समय सीमा ही नहीं नजर आ रही है। अनेक तरह के रोड़ों से निपटते हुए कुछ महीनों से काम शुरू भी हुआ है तो उसकी चाल इतनी धीमी है कि नागरिक व दुकानदार परेशान हो गए हैं।

कोई गया कोर्ट, किसी ने रुकवा दिया काम फरवरी महीने से इस रोड के चौड़ाईकरण के लिए बाधित सम्पत्तियों के अधिग्रहण व तोड़ने की कार्रवाई तेज की गई थी। कुल 465 निजी बाधित प्रॉर्टियों में से 298 को संपादित करने का काम पूरा किया जा चुका है। 58 प्रॉपर्टी मनपा, नजूल व एनआईटी की हैं जिनमें कोई बाधा नहीं है। मार्च महीने तक जिलाधिकारी ने कुल 15,000 वर्गमीटर संपादन का अवार्ड पास किया था जिसमें से 9,980 वर्गमीटर जमीन अधिग्रहण हो चुका है।

मेयो हॉस्पिटल चौक से हंसापुरी की ओर और गांजाखेत से शहीद चौक बाले हिस्से में काम शुरू किया लेकिन गति बेहद धीमी है। एक साइड का कहीं बना है तो दूसरी साइड का खोदकर गिट्टी डाली गई है। 7- 8 बाधितों ने अदालत की शरण ली है। जानकारी यह है कि बाधितों की सुनवाई ती पूरी हो चुकी है लेकिन मनपा की ओर वकील अलग-अलग कारण बताकर खुद ही तारीख पर तारीख ले रहा है।

सीएम सिटी में सड़क निर्माण पर सवाल

वहीं रोड की हाइट घरों से अधिक होने के चलते एक नगरसेवक के नेतृत्व में नागरिकों ने काम रुकवा दिया था। एक सप्ताह काम रुका रहा। डाली गई गिट्टी हाइट कम करने के लिए निकाली गई है। काम अभी भी रुका है।

सीएम की सिटी में नहीं सुनवाई हालत यह है कि सीएम की सिटी में एक रोड के साथ लंबे अरसे से खेला' हो रहा है। कुछ बाधितों का मुआवजा पेंडिंग पड़ा है तो कुछ ने नोटिस मिलने के बाद भी मुआवजा के लिए आवेदन नहीं किया है। जिन्होंने आवेदन नहीं किया है उनके खिलाफ सरकार को अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए कार्रवाई करनी चाहिए लेकिन संबंधित विभाग के कर्णधार किसी तरह की कानूनी कार्रवाई कर ही नहीं रहे हैं।

विभागों के प्रमुखों को क्षेत्र के विधायक प्रवीण दटके, कृष्णा खोपड़े ने भी पत्र लिखा है लेकिन सीएम की सिटी में उनके विधायकों की भी सुनवाई नौकरशाही में नहीं है। क्षेत्र के व्यापारी कुछ कहने से डरते हैं। एक ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि एक सप्ताह से काम बंद है। जहां चल रहा है, वहां स्लो है। कुछ नहीं कह सकते, कुछ कहा तो मुझ पर ही 'गारपीट' आ जाएगी।

इस रोठ के लिए हाई कोर्ट में याचिका

दायर की थी, कोर्ट ने 2017 में संबंधित प्रशासन को रोड निर्माण के संदर्भ में आदेश जारी किये थे। सिटी के करीब 4 दर्जन डीपी रोड में सारे के काम हो गए लेकिन यह रोड अब तक लटक रहा है। केंद्रीय मंत्री, सीएम, क्षेत्र के विधायकों तक के सारे प्रयास भी इसे समय पर पूरा नहीं करवा पाए। अब जब सारी निधि सरकार ने दे दी है तो प्रशासन ने तेजी दिखानी चाहिए। -अध्यक्ष मध्य नागपुर विकास आघाड़ी, भूषण दहवे

नजूल व एनआईटी की क्लीयर, 28 वर्षों से चल रही कहानी

  • 465 निजी सम्पत्तियों में से 298 बाधितों ने मुआवजा ले लिया
  • 58 प्रॉपर्टी मनपा, नजूल व एनआईटी की क्लीयर हैं
  • 28 वर्षों से चल रही रोड की कहानी
  • 2027 को हाई कोर्ट ने दिये थे बनाने के आदेश
  • 15,000 वर्गमीटर का अवार्ड कलेक्टर ने पास किया
  • 9,980 वर्गमीटर जमीन अधिग्रहित की जा चुकी
  • 3 किमी लंबा मेयो हॉस्पिटल से सुनील होटल चौक तक बनना है रोड
  • 100 करोड़ रु. केंद्रीय मंत्री गडकरी ने वर्षों पहले दे दिये थे
  • 129.19 करोड़ रु.राज्य सरकार ने अब तक मुआवजा वितरण किया

जहां बाधित हिस्सा तोड़ा गया व जमीन खाली हुई है वहां तो काम करना चाहिए। तोडू कार्रवाई के बाद प्रशासन का कोई अधिकारी नहीं आया है। व्यापारियों का व्यवसाय चौपट हो गया और खाली की गई जगहों पर अब अतिक्रमणकारी ठेले लगा रहे है। लगता है प्रशासन की 'शह पर सब हो रहा है। सराफा में चौपाटी लग रही है। असामाजिया तत्व द्वारा रेकी कर बड़ी वारदात को अंजाम देने का खतरा है। जनप्रतिनिधियों की निष्क्रयता समझ से परे है।

- व्यवसायी, आनंद जैन

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