Nagpur Isolation Hospital Land: नागपुर जिले में सोमवार को हुई मनपा की सभा में कई विषयों पर जहां हंगामे होते रहे वहीं मनपा के आइसोलेशन अस्पताल की जमीन में से 1 लाख वर्ग फुट जमीन भाजपा के बड़े नेता की संस्था को देने के प्रस्ताव पर बवाल मच गया।
विपक्ष नेता संजय महाकालकर की ओर से केवल 1 रुपए की लीज पर इतनी बड़ी जमीन देने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया गया, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लंबे समय तक तीखी नोकझोंक चलती रही।
इसी मुद्दे के बीच महाकालकर की ओर से सिम्बायसिस को भी इसी तरह से जमीन दिए जाने तथा उसका लाभ सिटी के छात्रों को नहीं मिलना का भी मुद्दा उठाया गया। मनपा ने सिम्बायसिस को इसी शर्त पर जमीन का आवंटन किया था कि वह सिटी के छात्रों के लिए 25% सीटें आरक्षित रखेंगे लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है।
सिटी के छात्रों को सिम्बायसिस में छूट पर प्रवेश नहीं मिल रहा है। बहरहाल तीखी नोकझोंक के बीच ही महापौर नीता ठाकरे ने बहुमत के आधार पर प्रस्ताव को मंजूर किए जाने की घोषणा सदन में की।
चर्चा की शुरुआत करते हुए विपक्ष नेता संजय महाकालकर ने प्रस्ताव पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि शहर के बीचों-बीच स्थित इतनी बड़ी जमीन मात्र 1 रुपये की लीज पर दी जा रही है लेकिन आज की तारीख में इस जमीन की बाजार कीमत (मार्केट वैल्यू) और रेंटल वैल्यू कितनी है, इसका प्रस्ताव में कहीं कोई उल्लेख नहीं है।
विपक्ष की स्पष्ट मांग थी कि किसी संस्था को यह जमीन सौंपने के बजाय महानगरपालिका को खुद अपना सेंटर शुरू करके नागरिकों को ये सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए। विपक्ष के सदस्य अभिजीत झा, शैलेश पांडे, विवेक निकोसे, अभिषेक शंभरकर ने यह भी सवाल उठाया कि प्रस्ताव में कहीं यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह संस्था नागरिकों को किस दर पर सुविधाएं मुहैया कराएगी।
इसके लिए विपक्ष ने सिम्बायोसिस कॉलेज का उदाहरण दिया जिसे मनपा ने 75 एकड़ जमीन मात्र 1 रुपये की लीज पर दी थी। विपक्ष ने आरोप लगाया कि 25% आरक्षण की शर्त के बावजूद नागपुर के आम छात्रों को सिम्बायोसिस में प्रवेश से कोई खास फायदा नहीं मिला है।
सत्ता पक्ष नेता बाल्या बोरकर और अन्य पार्षदों ने इस प्रस्ताव का पुरजोर बचाव करते हुए सिटी की वर्तमान स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को उजागर किया। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने बताया कि 30 से 35 लाख की आबादी वाले शहर में मात्र 12-13 एमआरआई (MRI) और सीटी स्कैन सेंटर हैं।
वर्तमान में निजी सेंटरों में एमआरआई का रेट 6,000 से लेकर 15,000 रुपये तक है और पेट स्कैन का रेट लगभग 25,000 रुपये है जो किसी भी इंश्योरेंस योजना में पूरी तरह कवर नहीं होता और आम आदमी की पहुंच से बाहर है। इस नए सेंटर में एमआरआई की सुविधा मात्र 2,100 रुपये में मिलेगी जो कि सरकारी अस्पतालों और केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना की 2,400-2,500 रुपये की दरों से भी काफी कम है।
इस जोरदार बहस के बीच सता पक्ष के एक सदस्य की जुबान फिसल गई। उन्होंने अपने भाषण के दौरान कह दिया कि महानगरपालिका की खुद की ऐसी हैसियत नहीं है कि वह ऐसे बड़े प्रोजेक्ट खुद खड़े कर सके। इस अपमानजनक टिप्पणी पर विपक्ष ने भारी हंगामा खडा कर दिया जिसके बाद संबंधित सदस्य को अपने शब्द वापस लेने पड़े और उन्हें सदन में माफी मांगनी पड़ी।
सिम्बायोसिस कॉलेज के मुद्दे पर भी सत्ता पक्ष ने विपक्ष को घेरते हुए कहा कि पहले नागपुर के छात्र पढ़ाई के लिए बाहर जाते थे लेकिन अब एक अच्छी संस्था के आने से वे अपने शहर में ही शिक्षा ले रहे हैं। सत्ता पक्ष ने दावा किया कि सिम्बायोसिस में 24 लाख रुपये वाली एमबीए की फीस नागपुर के स्थानीय छात्रों को 18 लाख रुपये की जा रही है।