जेडपी स्कूल सोलर पैनल( सोर्स: सोशल मीडिया ) 
नागपुर

नागपुर की 277 स्कूलों में सोलर प्रोजेक्ट अटका, बिजली का संकट; बच्चे गर्मी में बेहाल

Nagpur Solar Panel Tender Issue: नागपुर की 277 जेडपी स्कूलों में सोलर पैनल लगाने का काम अटका। बिजली के बिना बच्चे परेशान, मेडा और ठेकेदार पर लापरवाही के आरोप।

अंकिता पटेल

Nagpur ZP Schools Solar: नागपुर जिला परिषद की शालाओं को बिजली बिल से मुक्त करने के लिए तत्कालीन ऊर्जा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने सोलर पैनल लगाने की योजना बनाई थी लेकिन संबंधित अधॉरिटी महाऊर्जा अभिकरण (मेडा) और बेंगलुरु का संबंधित ठेकेदार उनकी संकल्पना को पलीता लगाने पर तुले हुए हैं।

बीते एक वर्ष से जिले की 277 जेडपी शालाओं में सोलर पैनल नहीं लगा है। टेंडर जारी होने के बाद कार्य क्यों नहीं हो रहा, इसकी सूचना तक जिला परिषद प्रशासन को नहीं दी जा रही है।

मेडा के कर्णधारों के मनमानी रवैये के चलते शालाओं में बिजली नहीं है और बच्चों को बिना लाइट व पंखों के बैठने को मजबूर होना पड़ रहा है। प्राथमिक शालाओं के बिजली बिल का विकल्प देने के लिए सोलर पैनल लगाने की पहल बावनकुले ने की थी।

इसके बाद कई स्कूलों में पैनल लगाए भी गए। पिछले वर्ष अप्रैल महीने में 277 स्कूलों में सोलर पैनल लगाने के लिए निविदाएं निकाली गई थीं। इसके लिए जिला नियोजन समिति ने निधि भी उपलब्ध कराई थी। प्रत्येक स्कूल पर 2 किलोवाट क्षमता का सिस्टम लगाने का निर्णय लिया गया था।

लेटलतीफी के कारण पानी से वंचित ग्रामीण

जिला परिषद के यांत्रिकी विभाग का ही एक मामला सामने आया है जहां 7 गांवों की पारधी बस्तियों में जलापूर्ति योजनाओं में सोलर संयंत्र स्थापित करना था। जनवरी महीने में इसका टेंडर निकाला गया था और मार्च तक कार्य कमलीट करना था लेकिन कोई कार्य निर्धारित समयावधि में पूरा नहीं किया गया।

आश्चर्यजनक यह कि विभाग के कर्णधारों ने संबंधित ठेकेदार को लेटलतीफी की एक भी नोटिस जारी नहीं किया, जानकारी के अनुसार, इस योजना के अंतर्गत कैवल पंप इंस्टॉलेशन का काम पूरा होना बाकी है, प्रशासन का दावा है कि 25 अप्रैल तक यह योजना पूरी हो जाएगी और योजनाएं अधूरी नहीं है।

गोंदिया के एक ठेकेदार को यह कार्य दिया गया, 3 महीने के भीतर काम पूरा कर योजना गांव वालों को सौंपनी थी, लेकिन लापरवाही के कारण भीषण गर्मी शुरू होने के बावजूद ग्रामीणों को पानी नहीं मिल सका, दरअसल, समय-समय पर निगरानी न होने से ठेकेदार ने काम बहुत धीमी गति से किया।

कुछ गांवों में तकनीकी समस्याएं आना बताया गया, एक जगह संयंत्र की क्षमता से अधिक मोटर पंप लगायी गयी जो जल गयी। 75 लाख रुपये की अल्पावधि योजना समय पर पूरी न होना आश्चर्यजनक माना जा रहा है।

ऑडिट करना हुआ मुश्किल

बैंगलुरु के एक ठेकेदार को यह काम दिया गया था। टेंडर मिलने के बाद इस प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति क्या है, इसकी जानकारी स्वयं शिक्षा विभाग को भी नहीं है, केवल शुरुआत में एक बैठक होने की जानकारी मिली थी।

मेडा के इस रवैये के कारण शिक्षा विभाग के लिए स्कूलों के सोलर ऑडिट करना भी कठिन हो गया है, मेडा की लचर कार्यप्रणाली से त्रस्त होकर ही 4 वर्ष पूर्व यह प्रस्ताव पारित किया गया था कि यह कार्य जिला परिषद प्रशासन ही करे।

फिलहाल नागपुर जिला परिषद कई महत्वाकांक्षी योजनाएं चला रही है। मांग की जा रही है कि जेडपी प्रशासन इस योजना को लागू कर स्कूलों को सोलर युक्त बनाने के अभियान को गति दे।

तहसीलवार सोलर पैनल

क्रमांक तहसील सोलर पैनल (संख्या)
1 कामठी 20
2 सावनेर 26
3 नागपुर ग्रामीण 30
4 कुही 25
5 उमरेड 25
6 भिवापुर 09
7 काटोल 21
8 नरखेड़ 17
9 कलमेश्वर 19
10 हिंगना 16
11 मौदा 23
12 पारशिवनी 16
13 रामटेक 25

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