रेत खनन (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
नागपुर

नागपुर का 'रेत सिंडिकेट': 80 करोड़ डकार गया कारोबारी, फिर भी रेड कार्पेट बिछाए बैठे हैं खनन अधिकारी!

Bhandara Sand Ghat Fraud: नागपुर-विदर्भ में रेत घोटाले का बड़ा खुलासा। कारोबारी पर 80 करोड़ का बकाया, फिर भी खनन अधिकारी मेहरबान। सीएम फडणवीस की जांच के बीच अधिकारियों की चुप्पी।

प्रिया जैस

Nagpur Sand Mining Scam: नागपुर शहर में रेत की काफी किल्लत है। राज्य सरकार की तमाम योजनाएं फेल रही हैं। वहीं कुछ कारोबारी इसी का लाभ उठाकर सरकार को चूना लगाने में भी पीछे नहीं हैं। एक रेत घाट ठेके में 70-80 करोड़ का चूना लगाने वाले कारोबारियों पर सरकार मेहरबानी कर रही है।

उसी कारोबारी के दूसरे घाट पर भी करोड़ों रुपये का बकाया है, बावजूद खननकर्मी-अधिकारी उसे समय पर समय दिए जा रहे हैं। जिले और विदर्भ में चल रहे खेल का खुलासा मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस को शिकायत कर किया गया है। फडणवीस ने इसे गंभीरता से लिया है लेकिन अधिकारी इस मुद्दे पर ‘कुंडली’ मारकर बैठ गए हैं।

रेत कारोबारी केवल रेत की रायल्टी ही नहीं दे रहे हैं। वे फर्जी चालान बनाकर भी सरकार का ‘भट्ठा बैठा’ रहे हैं। यही कारण है कि पुलिस में शिकायत के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को भी मैदान में उतरना पड़ा था। लगभग 40 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई थी और 150 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आने का दावा किया गया था।

300 करोड़ के खेल का दावा

मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ब्रम्हपुरी, भंडारा, नागपुर सहित कई रेत घाटों में कारोबारी रेत बेचकर निकल जा रहे हैं, जबकि सरकार को रायल्टी का भुगतान नहीं किया जा रहा है। पत्र में कहा गया है कि एक कारोबारी अनोज कुमार अग्रवाल है। इसे ब्रम्हपुरी में रेत घाट दिया गया था।

इसने 13 करोड़ रुपये का भुगतान तक नहीं किया लेकिन वहां के खनन अधिकारी रोशन ठवरे ने 3 बार समय सीमा में वृद्धि कर रेत ले जाने की अनुमति दी। इस अनुमति के कारण जहां सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ वहीं कारोबारी अवैध खनन कर माल कमाता रहा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नये नियम के अनुसार कलेक्टर ही समय सीमा में वृद्धि का पत्र जारी कर सकते हैं लेकिन खनन अधिकारी सरकार के नियमों की अनदेखी कर पत्र जारी करता रहा।

भंडारा में 70 करोड़ नहीं भरे

आश्चर्य इस बात है कि इसी कारोबारी अनोज कुमार अग्रवाल का भंडारा के पवनी में रेत घाट का ठेका है। इस रेत घाट पर कारोबारी पर लगभग 70 करोड़ रुपये का दंड एवं अन्य बकाया है। इसकी वसूली के लिए सरकारी तंत्र हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। वर्षों से बकाया राशि की वसूली के लिए कोई पहल नहीं की गई है। इससे उनके हौसले बुलंद हो गए हैं। जानकारों की मानें तो 70 करोड़ की राशि उस पर बकाया है और इतनी ही राशि की सरकार को चपत भी लगी है। इस मुद्दे की जानकारी भी मुख्यमंत्री को दी गई लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की।

हौसला हुआ बुलंद

भंडारा में 70 करोड़ से अधिक के मामले में कुछ नहीं होने से अग्रवाल के हौसले बुलंद हो गए। इसके बाद उसने ब्रम्हपुरी में सरकार को चपत लगाने का कार्य शुरू कर दिया है। अब तक बकाये की राशि 13 करोड़ से ऊपर पहुंच चुकी है और प्रशासन गहरी नींद में सोया है। कलेक्टर के नाम पर खनन विभाग के अधिकारी ‘एक्टिव’ हो गए हैं। उनकी सक्रियता से ही कारोबारी को भरपूर ‘लाभ’ पहुंच रहा है।

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