नागपुर मनपा (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
नागपुर

पुणे पैटर्न पर चलें नागपुर मनपा! एक ठेकेदार को 3 से ज्यादा काम नहीं; वसीम खान और अभिजीत झा की बड़ी मांग

NMC Standing Committee Nagpur: नागपुर मनपा स्थायी समिति में 40% बिलो टेंडर पर हंगामा! सभापति शिवानी दाणी ने दिए प्रशासक काल के टेंडरों की जांच और ऑडिट के आदेश। भ्रष्टाचार की आशंका।

प्रिया जैस

Shivani Dani NMC Audit: मंगलवार को हुई स्थायी समिति की बैठक में उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब सदस्यों के विचारार्थ सीमेंट रोड के निर्माण के लिए 40 प्रतिशत से भी कम की बोली का टेंडर रखा गया। विशेषत: इसके पूर्व हुई स्थायी समिति की बैठक में भी इस तरह के प्रस्ताव समिति के समक्ष रखे गए थे।

मंगलवार को आए इसी तरह के प्रस्ताव पर सत्ता पक्ष के सदस्य और विपक्षी कांग्रेस सदस्यों के बीच काफी बहस हुई। कांग्रेस सदस्य वसीम खान, अभिजीत झा, अभिषेक शंभरकर का मानना था कि इतनी कम निधि में काम करने से काम की गुणवत्ता पर निश्चित ही असर पडेगा। यहां तक कि ठेकेदार की ओर से विकास काम में गुणवत्ता से समझौता किए जाने से इनकार नहीं किया जा सकता है।

सदस्यों ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कामकाज की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए जिसके बाद स्थायी समिति सभापति शिवानी दाणी ने 40 प्रतिशत से कम की बोली वाले 2 प्रस्तावों को प्रशासन को वापस भेज दिया।

प्रशासक काल में हुए टेंडर की होगी जांच

विपक्षी सदस्यों ने प्रशासक के कार्यकाल के दौरान मंजूर की गई 35 से 40 प्रतिशत बिलो निविदाओं की भी गहन जांच की मांग की है। उन्होंने मांग रखी कि ऐसी सभी निविदाओं का विवरण स्थायी समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाए और सभी कार्यों का ‘थर्ड पार्टी ऑडिट’ कराया जाए। सदस्यों ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सभापति ने वित्तीय वर्ष 2023-24 से अब तक प्रशासक काल में 30 प्रतिशत से कम बोली के प्राप्त टेंडर और प्रशासक काल में ऐसे मंजूर किए गए टेंडर की जांच करने के निर्देश दिए। साथ ही इन सभी मामलों का ऑडिट कराने का भी आदेश दिया।

बताया जाता है कि स्थायी समिति की ओर से केवल एक सप्ताह में ऑडिट करने के निर्देश दिए थे किंतु 3 वर्षों के टेंडर की जांच के लिए समय लगने की जानकारी देते हुए कुछ अधिक समय देने की मांग प्रशासन ने की।

अतिरिक्त काम के नाम पर बिल में वृद्धि

सभापति ने कहा कि एक ओर ठेकेदारों की ओर से टेंडर पाने के लिए कम राशि की बोली लगाई जाती है वहीं काम मिलने के बाद अधिकारियों के साथ साठगांठ कर उसी कार्य में अतिरिक्त काम के नाम पर बाद में बिल में वृद्धि की जाती है। इस तरह से गड़बड़ी होने की आशंका है। यही कारण है कि इस तरह के मामलों को भी उजागर करने के निर्देश प्रशासन को दिए हैं।

एक ठेकेदार को 3 से अधिक काम नहीं

कांग्रेस सदस्यों ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए मांग की कि इन विवादित निविदाओं को तुरंत रद्द कर फिर से 'री-टेंडरिंग' कराई जाए। उन्होंने पुणे महानगरपालिका का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 1 अप्रैल से बेस रेट से कम की निविदाएं स्वीकार न करने का निर्णय लिया गया, साथ ही वहां एक ठेकेदार को 3 से अधिक काम न देने की नीति भी लागू की गई है। मनपा को भी इसी तर्ज पर कड़े नियम बनाने की मांग सदस्यों ने उठाई।

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