नागपुर में चुनावी रैलियां (सौजन्य-नवभारत) 
नागपुर

चुनावी रैलियों के सैलाब में डूबा नागपुर, 992 उम्मीदवारों ने झोंकी पूरी ताकत! बसपा ने दिखाया दमखम

Nagpur NMC Election 2026: नागपुर मनपा चुनाव से पहले रविवार को सभी दलों ने रैलियों और रोड शो से शक्ति प्रदर्शन किया। निर्दलीय भी मैदान में, यातायात व्यवस्था प्रभावित।

प्रिया जैस

Election Rallies Nagpur: नागपुर महानगर पालिका चुनाव की मतदान तिथि करीब आते ही चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। रविवार को अवकाश होने के कारण सभी राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी, जिससे शहर की सड़कें रैलियों और जनसभाओं के सैलाब से पट गईं।

महानगर पालिका चुनाव के लिए रविवार का दिन प्रचार अभियान का सबसे व्यस्त और शोर भरा दिन साबित हुआ। 'छुट्टी' के इस दिन को सभी दलों ने 'वोटों की खेती' के अवसर के रूप में देखा। सुबह 8 बजे से ही सिटी के अलग-अलग प्रभागों में ढोल-नगाड़ों की आवाज और समर्थकों की नारेबाजी सुनाई देने लगी।

शक्ति प्रदर्शन का दौर

सत्ताधारी दल से लेकर विपक्षी गठबंधन और निर्दलीय उम्मीदवारों तक, हर कोई अपनी ताकत दिखाने की होड़ में दिखा। शहर के मुख्य चौराहों से लेकर तंग गलियों तक कई किलोमीटर लंबे रोड शो निकाले गए। कई प्रभागों में स्थानीय उम्मीदवारों के समर्थन में राज्य स्तर के बड़े नेताओं और स्टार प्रचारकों ने भी शिरकत की, जिससे कार्यकर्ताओं का उत्साह दोगुना हो गया। रैलियों के दौरान शहर के विकास, गड्ढा मुक्त सड़कों, जलापूर्ति और साफ-सफाई जैसे स्थानीय मुद्दे छाए रहे। समर्थकों के हाथों में पार्टी के झंडे, टोपी और बैनर 'चुनावी रंग' को और गहरा कर रहे थे। डिजिटल प्रचार के इस दौर में भी 'डोर टू डोर' जनसंपर्क और पैदल यात्राओं का असर साफ देखा गया।

निर्दलीयों ने भी झोंकी ताकत

वार्ड की जगह पर प्रभाग रचना के आधार पर हो रहे महानगर पालिका के चुनाव में प्रमुख राजनीतिक दलों के साथ-साथ निर्दलीयों ने भी ताल ठोंकी हुई है। यही कारण है कि चुनाव में कुल 992 प्रत्याशी खड़े हैं। इनमें 60 प्रतिशत प्रमुख दलों और 40 प्रतिशत निर्दलीय प्रत्याशी हैं। यह आंकड़ा प्रभाग के अनुसार हो रहे चुनावों के मद्देनजर काफी बड़ा है। कुछ निर्दलीय प्रत्याशी भले ही नाम के लिए लड़ रहे हों, लेकिन रविवार को रैली के नाम रहे दिन पर निर्दलीयों ने भी पूरी ताकत झोंकी। कई निर्दलीयों की प्रचार रैली में भी दोपहिया और चारपहिया वाहनों की अच्छी खासी लंबी कतार देखी गई। निर्दलीय के रूप में दमखम दिखा रहे ये प्रत्याशी चर्चा का विषय बने रहे।

चर्चा में बसपा की रैली

भाजपा और कांग्रेस की तरह ही बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशियों ने भी रविवार को शक्ति प्रदर्शन के माध्यम से अपना दमखम दिखाया। कैडर बेस इस पार्टी में आम तौर पर कार्यकर्ताओं के आर्थिक सहयोग से चुनाव लड़ने का काम होता रहा है किंतु बदलते परिवेश में अब बसपा के प्रत्याशियों को भी पैसा खर्च करना पड़ रहा है, जिसका असर रविवार को बसपा प्रत्याशियों की रैली में दिखाई दिया।

रैली में प्रत्याशियों के लिए खुली जीप के अलावा आधुनिक साउंड के साथ चारपहिया वाहनों की संख्या भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशियों की रैली से कम नहीं थी। विशेष रूप से बसपा के पूर्व पार्षदों ने पूरी ताकत झोंक रखी थी। इतनी भारी मात्रा में खर्च किए जा रहे पैसे के चलते बसपा की रैली जगह-जगह चर्चा का विषय बनी रही।

यातायात व्यवस्था पर भी असर

रैलियों के इस 'रेले' का सीधा असर शहर की यातायात व्यवस्था पर पड़ा। प्रमुख मार्गों पर रैलियों की वजह से घंटों लंबा जाम लगा। पुलिस प्रशासन को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कई जगह रास्तों को डायवर्ट करना पड़ा।

हालांकि लोगों को आवाजाही में थोड़ी असुविधा हुई, लेकिन चुनावी उत्साह के आगे यह परेशानी गौण नजर आई। महानगर पालिका का चुनाव सीधे तौर पर जनता की बुनियादी सुविधाओं से जुड़ा है। इसलिए रविवार को उमड़ी यह भीड़ केवल रैलियों का हिस्सा नहीं, बल्कि बदलाव की आकांक्षा है।

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