Nagpur Koradi Temple Master Plan: नागपुर जिले में कोराडी स्थित सुप्रसिद्ध श्री महालक्ष्मी जगदंबा संस्थान के तीर्थ क्षेत्र विकास प्रारूप के तीसरे और चौथे चरण के विकास कामों को गति देने के लिए 12 करोड़ रुपये की निधि उपलध कराई है।
राज्य सरकार के नगर विकास विभाग ने 12 करोड़ रुपये की नई किस्त जारी करने की मंजूरी प्रदान कर दी है। इस फैसले से तीर्थस्थल पर जारी विकास कार्यों में और तेजी आएगी। गौरतलब है कि महालक्ष्मी जगदंबा संस्थान के समग्र तीर्थक्षेत्र विकास प्रारूप के लिए सरकार द्वारा कुल 214.94 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।
इसमें से चरण 3 और 4 के अंतर्गत विभिन्न चरणों में अब तक 164 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है और अब 12 करोड़ रुपये की निधि जारी कर दी गई है। इस विकास प्रारूप को धरातल पर उतारने के लिए नागपुर महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (NMRDA) कार्यान्वयन प्राधिकरण है।
वहीं वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जिलाधिकारी को नियंत्रक अधिकारी और जिला सह आयुक्त को आहरण एवं संवितरण अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि स्वीकृत निधि का बिना किसी कटौती के सीधा वितरण किया जाए और इसे किसी अन्य कार्य में स्थानांतरित न किया जाए। साथ ही प्राधिकरण को इस निधि के सटीक उपयोग का उपयोगिता प्रमाणपत्र भी जमा करना होगा।
श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाओं का होगा विस्तार
कोराडी स्थित सुप्रसिद्ध श्री महालक्ष्मी जगदंबा संस्थान द्वारा जारी की गई इस नई निधि का मुख्य उद्देश्य मंदिर परिसर में आने वाले देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक नागरिक सुविधाएं और बुनियादी ढांचा तैयार करना है।
इसके तहत परिसर में विशाल भक्त निवास, बहुमंजिला पार्किंग व्यवस्था, आधुनिक कतार प्रबंधन प्रणाली (क्यू मैनेजमेंट), स्वच्छ पेयजल व्यवस्था, और सौंदर्यीकरण के विविध कार्य किए जा रहे हैं।
इसके अलावा, बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन के लिए विशेष रैंप, लिफ्ट और ई-रिक्शा जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं, जिससे नवरात्रि एवं अन्य बड़े त्योहारों के दौरान भीड़ को सुगमता से नियंत्रित किया जा सके।
धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान
नागपुर जिले में कोराडी महालक्ष्मी जगदंबा मंदिर केवल नागपुर ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मध्य भारत के प्रमुख आस्था केंद्रों में से एक है। मास्टर प्लान के पूर्ण होने से यह परिसर अंतरराष्ट्रीय स्तर के धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में उभरेगा।
इससे न केवल तीर्थयात्रियों को विश्वस्तरीय अनुभव प्राप्त होगा, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। स्थानीय छोटे व्यापारियों, परिवहन क्षेत्र और होटल उद्योग को इस विकास से भारी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है, जिससे क्षेत्र की समग्र आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।