हाई कोर्ट (फाइल फोटो) 
नागपुर

शिक्षा विभाग का एक्शन शुरू; नागपुर के उन स्कूलों की लिस्ट तैयार, जिन्होंने हाई कोर्ट के आदेश को दिखाया ठेंगा

Nagpur High Court School Bus Case: नागपुर हाई कोर्ट की स्कूलों को कड़ी फटकार! स्कूल बस सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर 50 हजार का जुर्माना। शिक्षा विभाग को 38 से ज्यादा स्कूलों को नोटिस देने का आदेश।

प्रिया जैस

School Transport Committee Meeting: स्कूल बसों में नियमों की अनदेखी और छात्रों की जान पर खतरे को देखते हुए हाई कोर्ट ने इस पर स्वयं संज्ञान लिया। याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किल्लोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने स्कूलों द्वारा अदालती आदेशों के अनुपालन में की जा रही देरी पर सख्त रुख अपनाया। साथ ही शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि उन सभी स्कूलों को नोटिस जारी किया जाए जिन्होंने अब तक अपना हलफनामा दायर नहीं किया है।

सुनवाई के दौरान अदालत द्वारा नियुक्त अदालत मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता फिरदोस मिर्जा ने 38 स्कूलों की एक सूची पेश की जिन्होंने 6 फरवरी 2026 के अदालती आदेश के पालन में अपने हलफनामे दाखिल कर दिए हैं। हालांकि उन्होंने अदालत को अवगत कराया कि अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल हैं जिन्होंने आदेश का उल्लंघन किया है और हलफनामा पेश नहीं किया है।

3 सप्ताह में नोटिस तामील करने का निर्देश

अदालत ने इस स्थिति पर संज्ञान लेते हुए नागपुर के शिक्षा उपसंचालक को आदेश दिया है कि वे शेष सभी स्कूलों को 3 सप्ताह के भीतर नोटिस भेजें। इन नोटिसों के साथ हाई कोर्ट द्वारा 16 जनवरी 2026 और 6 फरवरी 2026 को जारी किए गए आदेशों की प्रतियां भी संलग्न की जाएंगी।

अखबारों में विज्ञापन देने की अनुमति

अदालत ने शिक्षा उपसंचालक को न केवल व्यक्तिगत रूप से स्कूलों को नोटिस भेजने का निर्देश दिया बल्कि प्रभावी सूचना के लिए समाचार पत्र में सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित करने की भी अनुमति दी है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिन स्कूलों ने अभी तक हलफनामा दायर नहीं किया है उन्हें अगली सुनवाई की तारीख से पहले हर हाल में अपनी रिपोर्ट और हलफनामा प्रस्तुत करना होगा।

पहले भी लग चुकी है फटकार

इसके पूर्व भी अदालत ने स्कूलों को छात्रों की सुरक्षा के प्रति अधिक गंभीरता बरतने के निर्देश दिए थे। कोर्ट का मानना था स्कूल बसों और वैन में उनकी सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने पिछले आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्येक स्कूल को हर 3 महीने में कम से कम एक बार परिवहन समिति की बैठक करना अनिवार्य है लेकिन अधिकांश स्कूलों ने पिछले 2 वर्षों में ऐसी बैठकों का कोई रिकॉर्ड पेश नहीं किया है। सुनवाई के दौरान एक स्कूल ने स्वीकार किया कि उनके यहां पिछले 2 वर्षों से कोई बैठक नहीं हुई जिस पर कोर्ट ने आश्चर्य और नाराजगी जताई।

लगेगा भारी जुर्माना

हाई कोर्ट ने स्कूलों को अंतिम अवसर देते हुए निर्देश दिया था कि वे अगली सुनवाई तक पिछले 2 वर्षों में हुई परिवहन समिति की बैठकों का चार्ट और परिवहन के लिए उपयोग की जा रही बसों व वैन की सूची अदालत में पेश करें। यदि कोई स्कूल इसमें विफल रहता है तो उसे 50,000 रुपये का जुर्माना अदालत में जमा करना होगा।

तेजपाल को जाना ही होगा जेल...सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई याचिका, सरेंडर के लिए दिया दो हफ्ते का टाइम

जंतर-मंतर हिंसा से दिल्ली पुलिस ने ली सीख, तैयार किया नया प्लान, अब हर बड़े प्रदर्शन पर ऐसे रखी जाएगी पैनी नजर

2027 की जनगणना से पहले राहुल गांधी और खड़गे ने PM मोदी को लिखा पत्र, जाति के आंकड़ों पर उठाए सवाल

6 साल में 41 मासूमों की मौत; अमरावती से झांसी तक अस्पताल बने आग का गोला, लेकिन एक भी दोषी को नहीं हुई सजा

मनुस्मृति पर राहुल गांधी के बयान पर भड़के जगद्गुरु अविमुक्तेश्वरानंद, कहा- हिंदू धर्म विरोधी मानसिकता त्यागें