हाई कोर्ट (फाइल फोटो) 
नागपुर

नागपुर के लेडीज क्लब पर लटकी बंदी की तलवार! प्रदूषण नियमों की अनदेखी पड़ी भारी, MPCB ने शुरू की कार्रवाई

Nagpur Lawn Action MPCB: नागपुर के सिविल लाइंस के लान्स पर प्रदूषण विभाग का हंटर। लेडीज क्लब को बंद करने की प्रक्रिया शुरू। हाई कोर्ट की फटकार के बाद MPCB और मनपा सख्त।

प्रिया जैस

Ladies Club Nagpur Notice: नागपुर सिविल लाइंस इलाके में चल रहे लान्स पर हाई कोर्ट की फटकार के बाद महाराष्ट्र राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल एक्शन में है। कुछ पर एक्शन लिया गया है, लेकिन कुछ पर अब भी मेहरबानी की जा रही है। विभागीय अधिकारियों ने एक के बाद एक दर्जन से अधिक संचालकों को नोटिस जारी किया है और वस्तुस्थिति में सुधार लाने को कहा है।

इस क्रम में लेडीज क्लब को भी नोटिस जारी किया गया है, लेकिन संचालकों से अपेक्षित जवाब नहीं मिलने के बाद इसे बंद करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इस बीच सी.पी. क्लब, चिटणवीस सेंटर और गोंडवाना क्लब के संचालकों ने उचित कदम उठाने की इच्छा जाहिर की है। इसलिए वे बच सकते हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि लान्स में ‘स्वागत’ की इजाजत कैसे दी जा रही है।

क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि सभी संचालकों को नोटिस देकर कदम उठाने को कहा गया था। कुछ संचालकों ने नोटिस का जवाब दिया है और यह भी आश्वासन दिया है कि वे उचित कदम उठा लेंगे ताकि प्रदूषण की समस्या का हल निकाला जा सके। विभाग भी उनके जवाब से कुछ हद तक संतुष्ट है, लेकिन लेडीज क्लब की ओर से उचित जवाब नहीं दिए जाने के बाद इसे बंद करने की प्रक्रिया तेज की गई है। जल्द ही इस पर गाज गिरने की संभावना जताई जा रही है।

‘हीरामल’ को भी नोटिस, अधिकारी मौन

इसी प्रकार सिविल लाइंस में चल रहे ‘हीरामल’ को भी नोटिस दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि संचालक के खिलाफ कई शिकायतें मिली हैं, जिसके बाद नोटिस दिया गया, लेकिन संचालक की ओर से कोई भी कदम नहीं उठाया गया। आश्चर्य की बात तो यह कि एसआरओ-1 को मुआयना कर कार्रवाई करने को भी कहा गया, लेकिन एसआरओ-1 ने कोई पहल नहीं की। एसआरओ-1 की चुप्पी काफी कुछ बयां कर रही है। एक ओर हाई कोर्ट हंटर पर हंटर चलाकर नागरिकों को राहत दिलाने का प्रयास कर रहा है, तो वहीं कुछ अधिकारी कार्रवाई में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इससे विभाग का नाम खराब हो रहा है। लोग विभाग से सवाल पूछ रहे हैं। दूसरी ओर ऐसे अधिकारी कार्यालय से बाहर निकलने की जुर्रत तक नहीं कर रहे हैं। इससे नागरिकों में रोष भी व्याप्त हो रहा है।

गाइडलाइन नहीं मान रहे

हाई कोर्ट के हंटर और प्रदूषण नियंत्रण विभाग की गाइडलाइन तक ये संचालक नहीं मान रहे हैं। बार-बार बोलने के बाद अधिकारियों से उम्मीद थी कि वे मैदान में उतरेंगे और नागरिकों को होने वाली समस्याओं का समाधान करेंगे, लेकिन ‘मोह-माया’ के चक्कर में अधिकारी ‘आंखें बंद’ कर चुके हैं और नागरिकों को नारकीय जीवन जीने को मजबूर कर रहे हैं।

मनपा का भी नोटिस, हासिल कुछ नहीं

इस बीच मनपा के अधिकारी भी लान संचालकों को नोटिस जारी कर रहे हैं। मोहलत दे रहे हैं परंतु कार्रवाई कुछ नहीं हो रही है। मनपा का लान्स के प्रति इतना स्नेह क्यों है यह भी नागरिकों की समझ से परे है। जानकारों ने बताया कि मनपा नोटिस जारी करती है, संचालक जवाब तक नहीं देते हैं।

पहले ही गलत कार्य करने वाले संचालक इतने बिंदास हो गए हैं कि नोटिस का भी जवाब देना वे उचित नहीं समझते हैं। अधिकारी इतने लाचार हो गए हैं कि वे मैदान में उतरने से कतराते हैं। वरिष्ठ अधिकारियों के पास इतना टाइम नहीं है कि वे नागरिकों की समस्या का निपटारा करने अपने अधीनस्थ अधिकारियों से सवाल-जवाब तक कर सकें। इस पूरे चक्र में नागरिक बेहाल हो रहे हैं।

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