नागपुर सिविल लाइंस लॉन,(प्रतिकात्मक तस्वीर सोर्स: सोशल मीडिया) 
नागपुर

सिविल लाइंस के अवैध लॉन्स पर HC सख्त: 12 लॉन-क्लब को नोटिस, नागपुर से विदर्भभर में बढ़ सकती है कार्रवाई

Nagpur Civil Lines Lawns: नागपुर सिविल लाइंस के लॉन्स पर हाई कोर्ट सख्त। 12 बिना अनुमति चल रहे लॉन-क्लब को नोटिस, फायर NOC और मंजूरी दस्तावेज 15 दिन में जमा करने के निर्देश।

अंकिता पटेल

Nagpur Illegal Lawn Notices: नागपुर सिटी के सिविल लाइंस में संचालित हो रहे लॉन्स पर लगातार हाई कोर्ट का शिकंजा कसता जा रहा है। अब यह दायरा केवल सिविल लाइंस नहीं बल्की पूरे विदर्भ तक फैलने की संभावना है। याचिका पर सुनवाई के दौरान मनपा की ओर से कोर्ट को बताया गया कि शहर में 12 लॉन और क्लब बिना उचित अनुमति के संचालित होते पाए गए हैं, जिन्हें नोटिस जारी कर दिए गए हैं। हाल ही में हुई एक बैठक की समीक्षा के बाद इन 12 अवैध या बिना अनुमति चल रहे लॉन क्लब की पहचान की गई।

मनपा ने इन्हें नोटिस जारी कर सख्त निर्देश दिए हैं। निर्देश के अनुसार संचालकों को 15 दिनों के भीतर नगर रचना विभाग को भवन निर्माण को मंजूरी का नक्शा, फायर एनओसी और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का प्रमाणपत्र सौंपना होगा।

आदेश का क्या किया अनुपालन दोनों पक्षों की दलीलों के बाद अदालत ने राज्य सरकार के सरकारी वकील को भी पिछले आदेशों के अनुपालन की दिशा में उठाए गए कदमों पर निर्देश प्राप्त करने की कहा।

गत सुनवाई के दौरान यह चौकाने वाला तथ्य सामने आया था कि सिविल लाइंस इलाके में संचालित किसी भी मैरिज लॉन के पास विवाह समारोह या ऐसे अन्य आसयोजनों को करने की वैध अनुमति नहीं है। अदालत ने बिना अनुमति वाले स्ट्रक्चर को गिराने और लॉन मालिकों को नौटिस जारी करने के सख्त निर्देश दिए थे।

डीजे और पटाखों पर नई शर्तें

पटाखे और ढोल-नगाड़ों पर पूर्ण प्रतिबंध लॉन के अंदर या बाहर कहीं भी पटाखे फोड़ने, ढोल बजाने या शोर शराबा करने की सख्त मनाही होगी। लाउडस्पीकर के लिए स्पष्टीकरणः लाउडस्पीकर या साउंड सिस्टम की अनुमति मांगने वाले आवेदकों को स्पष्ट कारण बताना होगा कि उन्हें इसकी आवश्यकता क्यों है। डेसिबल सीमा का पालन आयोजकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि ध्वनि का स्तर तय सीमा (परमिसिबल डेसिबल लिमिट) से अधिक न हो, इन नियमों का उल्लंघन करने पर आयोजन की अनुमति तुरंत रह कर दी जाएगी,

लॉन परिसर के भीतर पार्किंग व्यवस्था अनिवार्य

कोर्ट को बताया गया कि लॉन परिसर के भीतर ही पार्किंग की उचित व्यवस्था करनी होगी। अदालत के ध्यान में यह भी लाया गया कि पिछले आदेशों का ठीक से पालन नहीं हो रहा है।

अदालत मित्र अब्दुल सुभान ने 5 मार्च 2026 के एक पूर्व आदेश का हवाला देते हुए बताया कि महानगर पालिका, राज्य सरकार या केंद्र सरकार की ओर से उस आदेश के पैराग्राफ 9 और 10 का अब तक कोई अनुपालन नहीं किया गया, केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए वकील कार्तिक एन. शुकुल ने अदालत में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार केवल नीति निर्माता है।

ध्वनि प्रदूषण नियम बनाना केंद्र का काम है, लेकिन इन्हें जमीनी स्तर पर लागू करने की जिम्मेदारी पूरी तरह से राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की होती है।

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