Nagpur Women Empowerment Politics: नागपुर महानगर पालिका की महापौर और भाजपा की महिला पदाधिकारियों ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। हालांकि, संसद में रखे गए इस विधेयक की आड़ में परिसीमन (डिलिमिटेशन) और जनगणना के आधार को लेकर दागे गए सवालों से बचते हुए महिला आरक्षण विधेयक बिल पारित नहीं होने पर कड़ी आपत्ति जताई।
प्रेस को संबोधित करते हुए महापौर ने कहा कि देश और राज्य के विकास में 50% आबादी वाली महिलाओं की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने नागपुर महानगर पालिका का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां सभी जोनल और विशेष समितियों के सभापति पदों पर महिलाएं आसीन हैं। यहां तक कि उन पदों पर भी महिलाओं को जिम्मेदारी दी गई है जो उनके लिए आरक्षित नहीं हैं, जो भाजपा के असली और स्पष्ट चेहरे को दर्शाता है। उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर आरोप लगाया कि वे महिलाओं को राजनीति में आने और नेतृत्व करने के अवसर से वंचित कर रहे हैं।
'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (महिला आरक्षण बिल) के बारे में विस्तार से पूछने पर उन्होंने बताया कि इसमें महिलाओं के लिए 33% आरक्षण और नई सीटों के लिए परिसीमन का प्रावधान है। इस पर सवाल किया कि जब यह बिल 2023 में पारित हो गया था, तो इसे 2024 के चुनावों में लागू क्यों नहीं किया गया। इसे लेकर उन्होंने कहा कि निश्चित ही वह गलती रही है, किंतु यह भी उचित नहीं है।
महापौर से पूछा गया कि 2029 के चुनावों के लिए परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर क्यों किया जा रहा है। यह तर्क भी दिया कि 2026 में नई जनगणना होनी है और 15 साल पुराने (2011 के) आंकड़ों का उपयोग करने से महिलाओं को कम सीटें मिलेंगी।
यदि नई जनगणना के आधार पर परिसीमन होता, तो महिलाओं का प्रतिनिधित्व और अधिक बढ़ता और उन्हें ज्यादा फायदा होता। जवाब में महापौर और अन्य भाजपा नेताओं ने अपना बचाव करते हुए कहा कि जो अवसर अभी मिल रहा है, उसे चूकने से बेहतर है कि उसे स्वीकार किया जाए।
पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा जनता को गुमराह कर रही है। 28 सितंबर 2023 को लोकसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला विधेयक पारित हुआ था, लेकिन अब तक उस पर अमल नहीं हुआ है। अब भाजपा ने महिला आरक्षण विधेयक को परिसीमन के साथ जोड़ने का प्रयास किया जिसका सभी विपक्षी दलों ने विरोध किया।
चुनावी लाभ लेने के लिए भाजपा अब जनता को गुमराह कर रही है। 28 सितंबर 2023 को यह विधेयक बहुमत से पारित हुआ था। तब सभी दलों ने इसका समर्थन किया था। 33 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए। इसका हम समर्थन करते हैं। शरद पवार ने स्थानीय निकाय संस्थाओं में महिला आरक्षण लागू किया था।
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लोकसभा में 543 सदस्य हैं। ऐसे में 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को दिया जाना चाहिए, लेकिन ढाई साल में भाजपा ने इस दिशा में कुछ भी नहीं किया। भाजपा के मोर्चे पर देशमुख ने कहा कि उन्होंने तय किया है कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर किस तरह लोगों को गुमराह करना है। यह मोर्चा चुनाव में फायदा लेने के लिए निकाला जा रहा है। महिला आरक्षण की आड़ में भाजपा राजनीति कर रही है। बारामती चुनाव पर कहा कि यह एकतरफा चुनाव होगा। सुनेत्रा पवार को हमारा समर्थन है।