नागपुर एयरपोर्ट, प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स- सोशल मीडिया
नागपुर

Nagpur Airport: विदर्भ में 7 एयरपोर्ट, लेकिन 6 पर नियमित उड़ानें नहीं; नागपुर की कनेक्टिविटी भी सीमित

Nagpur Airport News: निजीकरण में देरी और उड़ानों के घटने से नागपुर समेत विदर्भ के एयरपोर्ट्स बेहाल हैं। कतर एयरवेज द्वारा दोहा सेवा बंद करने से अब सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान बची है।

रूपम सिंह

Highlights

  • विदर्भ के 7 में से 6 एयरपोर्ट पर नियमित उड़ानें नहीं।

  • दोहा फ्लाइट बंद होने से नागपुर की अंतरराष्ट्रीय सेवा घटेगी।

  • कई शहरों से सीधी उड़ानों की मांग, लेकिन सेवाएं घट रहीं।

Nagpur Airport Privatization: सिटी तेजी से विकास कर रही है। विदर्भ में औद्योगिक क्रांति का दौर चल रहा है। लाखों करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया जा रहा है। उद्योग लग रहे हैं। बात में सच्चाई भी है, कई नए उद्योग विदर्भ में लगे हैं और विकास को पंख भी लगे हैं। बाहर से लोग आए भी हैं और कनेक्ट भी हुए हैं। अफसोस तो यह है कि इस कनेक्टिविटी का लाभ एविएशन सेक्टर को नहीं मिल रहा है। विमानतल के निजीकरण में हुई लेटलतीफी का खामियाजा हमें आज भी भुगतना पड़ रहा है।

आलम यह है कि हम फ्लाइट बढ़ाने की मांग करते हैं लेकिन सच्चाई यह है कि कंपनियां फ्लाइट घटाकर हमें 'दो कदम' पीछे धकेल देती हैं। विदर्भ में नागपुर के साथ जब इतना सौतेला व्यवहार हो रहा है तो अमरावती, गोंदिया, अकोला, यवतमाल और चंद्रपुर की कहानी खुद समझी जा सकती है। गड़चिरोली में एयरपोर्ट बनाने की बात चल रही है लेकिन सवाल यही है कि जब अन्य एयरपोर्ट्स को अब तक 'हवाई जहाज' नहीं मिल सके हैं तो गढ़चिरोली का क्या होगा ?

इन शहरों के साथ जुड़ाव होगा अहम

भोपाल, सूरत, जयपुर, विशाखापत्तनम, कोच्चि, कोयंबटूर, कालीकट, भुवनेश्वर, गुवाहाटी, चंडीगढ़, रांची, लखनऊ, पटना सहित अन्य स्थानों से सीधी कनेक्टिविटी की सुविधा होगी तो यहां के व्यापारियों और उद्यमियों के साथ-साथ छात्रों और नौकरीपेशा यात्रियों को भी काफी सहूलियत होगी।

वहीं सिं सिंगापुर, बैंकॉक और कुआलालंपुर जाने के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट्स का सहारा लेना पड़ता है। इनसे टूट टूट गया हवाई संपर्कः चेन्नई, बेलगावी, कोल्हापुर, औरंगाबाद, नाशिक और लखनऊ के साथ अब तो किशनगढ़ से भी डायरेक्ट हवाई संपर्क टूट गया है।

7 एयरपोर्ट में से 6 बंद

विदर्भ की प्रगति को ध्यान में रखकर 7 एयरपोर्ट्स पर काम किया। गया। 7 में से नागपुर ही है जो देश के बीचों-बीच होने के बाद भी देश के 12 डेस्टिनेशन्स को जोड़ पाया है। अमरावती से कभी फ्लाइट शुरू होती है तो कभी बंद, कमोबेश यही स्थिति गोंदिया की है। यवतमाल, अकोला और चंद्रपुर की हवाईपट्टियों पर यदा-कदा ही हवाई जहाज उतर पाते हैं लेकिन नियमित हवाई सेवा के लिए ये अब भी तरस रहे हैं। इन सभी को अब भी नागपुर पर ही निर्भर रहना पड़ता है। नागपुर आने में इन्हें जितना वक्त लगता है, अगर इनके जिले में एयरपोर्ट क्रियाशील रहता तो वे इतने समय में 'दुबई' और 'दिल्ली' तक पहुंच सकते थे।

लेकिन नेता और अधिकारी बातें तो बड़ी-बड़ी कर रहे हैं, पर समाधान निकालने में सफल नहीं हो पा रहे हैं। अमरावती में वर्तमान में मुंबई के लिए सप्ताह में चार दिन (सोमवार, बुधवार, शुक्रवार तथा रविवार) फ्लाइट उपलब्ध है। वहां पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क बन रहा है जिससे वहां आने वाले उद्योगों को सूरत और अहमदाबाद से जोड़ने की जरूरत होगी परंतु ऐसा कोई प्रयत्न कहीं दिखता नहीं है। गोंदिया से हैदराबाद और इंदौर के लिए फ्लाईट शुरू हुई थी। जो बंद पड़ गई है। 'उड़ान' स्कीम की 'हवा' निकल चुकी है।

अब तक देश के इतने शहरों को ही जोड़ पाए

अब तक देश के दिल्ली, मुंबई, पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद, इंदौर, कोलकाता, अहमदाबाद, नादेड और गोवा को ही जोड़ पाए हैं। इस तरह देखें तो अभी मात्र 10घरेलू और 2 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन हो रहा है।

2 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में दोहा और शारजाह शामिल है लेकिन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कतर एयरवेज ने 22 अक्टूबर से 29 मार्च 2027 तक अपनी नागपुर-दोहा-नागपुर उड़ान सेवा को वापस लेने की घोषणा की है। इससे 22 अक्टूबर के बाद नागपुर से केवल एक ही अंतरराष्ट्रीय उड़ान रह जाएगी।

बस 17 इंटरनेशनल एयरपोर्ट, यहां फ्लाइट नहीं

देश में पिछले कुछ वर्षों में एयरपोर्ट की संख्या तेजी से बढ़ते हुए 160 के आसपास पहुंच गई है। इंटरनेशनल एयरपोर्ट की संख्या देश में 17 है। इसमें एक नाम नागपुर शहर का भी है। अफसोस यह है कि नाम के इस इंटरनेशनल एयरपोर्ट से सिर्फ 2 विमान ही संचालित हो पाती है। उसमे से भी एक बंद होने वाली है। किसी ने इंटरनेशनल रूट बढ़ाने के प्रयास नहीं किए, घोषणाएं काफी की परंतु किसी को सफलता नहीं मिली। दुनिया अपनी पहुंच से दूर' की 'दूर' रह गई है।

निजीकरण की राह, राहत नहीं

काफी मशक्कत के बाद केंद्र से नागपुर एयरपोर्ट के निजीकरण को मंजूरी मिली। मंजूरी मिलने के बाद इसे जीएमआर को सौंपा गया है। 'उड़ान' को लेकर उम्मीदें काफी बढ़ी है लेकिन सच्चाई यह है कि नागपुर से विमान बढ़ने के बजाय घटते चले गए। डेस्टिनेशन के नाम पर उंगलियों पर गिनने लायक ही जगहें हैं।

देश के मध्य में होने के बाद भी पूरे देश को जोड़ने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पाया है। देश तो दूर, राज्य की राजधानी को छोड़कर कोई और फ्लाइट यहां से शुरू नहीं की जा सकी है। जब राज्य को ही पूरी तरह से नहीं जोड़ पाए है तो हमारे नेता 'उड़ान' भरने की बात कैसे कर सकते हैं?

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