Nagpur Nag River Water Pollution: नाग नदी के प्रदूषण को लेकर आरटीआई के तहत सामाजिक कार्यकर्ता एवं पूर्व पार्षद वेदप्रकाश आर्य की जानकारी के आधार पर छपी खबरों को लेकर हाई कोर्ट ने स्वयं संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया। गुरुवार को सुनवाई करते हुए न्यायाधीश अनिल किलोर और राज वाकोडे ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ी एक गंभीर चिंता बताते हुए जनहित याचिका के रूप में अदालत के समक्ष प्रेषित करने अधि।
खान को अदालत मित्र के रूप में नियुक्त किया। समाचार पत्र में छपी खबर का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि महानगरपालिका ने खुद यह स्वीकार किया है कि बिना शुद्धिकरण के सीवेज का पानी नदी में छोड़ा जा रहा है जो अंततः नदी को अत्यधिक प्रदूषित कर रहा है।
समाचार पत्रों में छपी खबर के अनुसार शहर में प्रति दिन लगभग 520 मिलियन लीटर (एमएलडी) सीवेज उत्पन्न होता है। इसके मुकाबले नागपुर महानगरपालिका वर्तमान में केवल 423.5 एमएलडी सीवेज को ही ट्रीट कर पा रही है। इस ट्रीट किए गए सीवेज में से 20 एमएलडी पानी बेचा जा रहा है। वहीं बाकी बचा हुआ पानी वापस नाग नदी में बहा दिया जाता है जो धारा के साथ नीचे की ओर बह जाता है। यह पूरी स्थिति सीधे तौर पर पर्यावरण और नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा पैदा कर रही है।
आरटीआई में मिली जानकारी के अनुसार महानगरपालिका ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि नाग नदी से बहने वाला मल-जल सीवेज सीधे गोसीखुर्द बांध को प्रदूषित कर रहा है। इससे न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर भी गंभीर चिंताएं खड़ी हो गई हैं। मनपा के जनस्वास्थ्य इंजीनियरिंग विभाग द्वारा दिए गए जवाब में इसका खुलासा हुआ है।
आरटीआई दस्तावेजों और प्राप्त जानकारी के अनुसार नागपुर शहर हर दिन लगभग 520 मिलियन लीटर (एमएलडी) सीवेज पैदा करता है। वर्तमान में मनपा और प्रन्यास मिलकर इसमें से लगभग 423.5 एमएलडी सीवेज का ही ट्रीटमेंट कर पा रहे हैं। इस उपचारित पानी में से 320 एमएलडी कोराडी और खापरखेड़ा थर्मल पावर स्टेशनों को बेचा जा रहा है।
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आरटीआई के तहत मिली जानकारी का हवाला देते हुए पूर्व नगरसेवक आर्य ने पानी की निगरानी और परीक्षण प्रक्रिया पर गंभीर चिता व्यक्त की है। उन्होंने दावा किया कि पूर्वी नागपुर के अत्यधिक प्रदूषित हिस्सों से पानी के नमूने जानबूझकर नहीं लिए गए जिससे नदी की वास्तविक खराब स्थिति छिप जाती है।
इसके विपरीत सितंबर 2025 की परीक्षण रिपोर्टों में शंकरनगर जैसे अपेक्षाकृत साफ स्थानों से लिए गए नमूनों का उपयोग किया गया जहां बीओडी और सीओडी का स्तर 5mg/L से कम, पर्याप्त धुलित ऑक्सीजन और न्यूनतम जीवाणु संदूषण दिखाया गया। ये आंकड़े मनपा द्वारा स्वीकार की गई व्यापक प्रदूषण की स्थिति से बिल्कुल विपरीत हैं।