एमपी से आने वाली ट्रैवल्स बसें सोर्स- नवभारत
नागपुर

रोज आती हैं 70 बारातें, नागपुर में MP की बसों का खेला, RTO और पुलिस की चुप्पी पर उठे सवाल

Nagpur MP Travel Buses Scam: मध्य प्रदेश से नागपुर में रोजाना 140 बसों की आवाजाही होती है। शादी-पिकनिक के अस्थायी परमिट पर धड़ल्ले से अवैध सवारी ढोने का खेल जारी है और प्रशासन मौन है।

प्रमोद यादव

 Nagpur Sitabuldi  Stand  MP Bus: नागपुर जिले में मध्य प्रदेश से रोजाना 70 चारातें आती हैं। जी हां! यह बात हजम होने लायक नहीं है क्योंकि इतनी बाराते तो एक दिन में दिखाई नहीं देतीं, लेकिन हो यही रहा है। मध्य प्रदेश से शहर में प्रति दिन 140 बसों की आवाजाही होती है।

इन बसों के पास केवल अस्थायी परमिट होता है जिसे एक स्थान से दूसरे स्थान के लिए मध्य प्रदेश परिवहन विभाग द्वारा जारी किया जाता है। पैसेंजर की सूची के अनुसार ही बस को आरक्षित किया जाता है लेकिन एमपी से आने वाली अधिकांश ट्रैवल्स बसों में अवैध तरीके से यात्रियों को लाने और ले जाने का धंधा जोरों पर है।

बिना रोक-टोक के रोजाना 70 बसें नागपुर आती है। इन्हें एमपी परिवहन विभाग द्वारा 87 (1) (ए) के तहत परमिट जारी किया जाता है। यह परमिट केवल वैवाहिक कार्यक्रम, पिकनिक या विशेष अवसर पर जारी किया जाता है।

एमपी परिवहन विभाग की मिलीभगत

इसके तहत बस केवल एक निर्धारित स्थान से दूसरे निर्धारित स्थान पर ही जा सकती है लेकिन रेलवे स्टेशन के बगल में मध्य प्रदेश बस अड्डे से नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए ट्रैवल्स बसों का अवैध कारोबार किया जा रहा है।

निश्चित ही एमपी परिवहन विभाग की मिलीभगत के बगैर यह धंधा नहीं चल सकता लेकिन इसमें स्थानीय प्रशासन की चुप्पी भी कई प्रकार के सवाल खड़े करती है।

न तो सिटी पुलिस के ट्रैफिक विभाग का इस ओर ध्यान है और न ही सीताबर्डी पुलिस आधिकारिक प्रादेशिक परिवहन विभाग (आरटीओ) तो हर मामले में कंबल ओढ़कर घी पीने का काम करता है। इस विभाग को शहर की अव्यवस्था से कोई लेना-देना नहीं है।

परिवहन विभाग से कब दी जाती है अनुमति

बारात या किसी विशेष आयोजन पर एक निर्धारित स्थान से दूसरे निर्धारित स्थान पर जाने के लिए मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 87(1)(ए) के तहत परिवहन विभाग द्वारा अनुमति दी जाती है।

इसका परमिट केवल अल्पकालिक होता है। इसका उपयोग आमतौर पर शादियों, पिकनिक, मेलों या धार्मिक आयोजनों जैसे विशेष अवसरों पर यात्री वाहनों को संचालित करने के लिए किया जाता है, लेकिन सीमित समय के लिए।

मध्य प्रदेश मोटर वाहन करावान नियमों के अनुसार, घारा 87 (1)(A) के तहत जारी होने वाले इन अस्थायी परमिट वाले यात्री वाहनी पर प्रति सीट के हिसाब से दैनिक या साप्ताहिक टैक्स और आवेदन शुल्क देय होता है।

जिसमें आवेदक को कार्यक्रम की पत्रिका और सभी पैसेजर वकी लिस्ट देनी होती, वाहन के सामने के हिस्से में कार्यक्रम से संबंधित बैनर लगाना आवश्यक होता है, अब शहर में इस परमिट के तहत आने वाली बसों में तो ऐसा कुछ दिखाई नहीं देता।

बस संचालक और दलालों की साठगांठ

नागपुर जिले में अवैध कारोबार में ट्रैवल्स बस संचालक और दलालों की साठगांठ जबरदस्त है। पहली बात प्रशासकीय अधिकारी और कर्मचारी तो इन बसी को देखकर नजर फेर लेते हैं, लक्ष्मी दर्शन' के बाद भला कोई कार्रवाई क्यों करेगा।

यदि आरोप हो भी जाए तो नेटवर्क इतना तगड़ा है कि प्रशासन के सक्रिय होने से पहले ही नेटवर्क सक्रिय हो जाता है। आरटीओ या पुलिस द्वारा वाहन पकड़े जाने पर कार्रवाई होने से पहले ही बस संचालक भोपाल फोन लगा देते हैं। वहां बैठे दलाल कुछ ही मिनटों में एक परमिट बना देते है।

स्थानीय आरटीओ और पुलिस की आंख बंद

भले ही इन बसों को परमिट देने का काम मध्य प्रदेश परिवहन विभाग द्वारा किया जाता है लेकिन महाराष्ट्र की सीमा के भीतर आते ही यातायात और यात्री आवागमन की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की बन जाती है लेकिन कोई इस अवैध कारोबार पर ध्यान नहीं देता, एमपी बस स्टैंड शहर के बिल्कुल मध्य भाग में है।

रेलवे स्टेशन रोड पर वैसे ही यातायात की समस्या बनी रहती है, ऐसे में एमपी से अवैध परमिट पर आने वाली इन बसों पर नियंत्रण रखना स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है लेकिन अपराधियों की गैंग ने यहां थमा-चौकडी मचा रखी है। अवैध तरीके से वाहनों में सवारियां भरी जा रही है, नियम से ज्यादा शुल्क वसूला जा रहा है।

अभिषेक तिवारी नवभारत।

मान की ईमानदारी का उतरा मुखौटा, CBI जांच के आदेश पर मजीठिया का हमला, बोले- अब सबका हिसाब होगा

Delhi HC: जामिया हिंसा और दिल्ली दंगों से जुड़ी कई याचिकाएं खारिज, कपिल मिश्रा-प्रवेश वर्मा का भी था जिक्र

एशियन गेम्स में महिलाओं का प्रदर्शन अच्छा नहीं, बृजभूषण सिंह ने जताई नाराजगी, कुश्ती खिलाड़ियों पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेताओं ने जस्टिस उज्जल भुइयां की तारीफ में बांधी पुल, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए थे सवाल

उत्तराखंड में कांग्रेस ने दिए यात्रा रोकने के निर्देश, रावत अपने कार्यक्रम पर अड़े, कहा- राज्य में बदलाव जरूरी