Nagpur SC Reservation Social Justice: नागपुर अनुसूचित जाति (एससी) आरक्षण में उपवर्गीकरण के प्रस्ताव को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस मुद्दे का विरोध करते हुए अनुसूचित जाति वर्ग के विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से उनके मंत्रालय स्थित कक्ष में मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन सौंपते हुए उपवर्गीकरण के प्रस्ताव पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं और इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की।
बैठक के दौरान विधायकों ने कहा कि अनुसूचित जाति आरक्षण में उपवर्गीकरण का प्रस्ताव सामाजिक संतुलन और आरक्षण व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की बात ध्यानपूर्वक सुनते हुए इस विषय पर अलग से विस्तृत बैठक आयोजित करने का आश्वासन दिया।
उपवर्गीकरण के विरोध में मंगलवार को मुंबई में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इस विशाल मोर्चे का नेतृत्व रिपब्लिकन सेना के आनंदराज आंबेडकर, बौद्ध महासभा के भीमराव आंबेडकर, पूर्व सामाजिक न्याय मंत्री एवं विधायक राजकुमार बडोले तथा पूर्व मंत्री एवं चर्मकार समाज के वरिष्ठ नेता बबनराव घोलप करेंगे।
आयोजकों के अनुसार राज्य के विभिन्न जिलों से हजारों महिला एवं पुरुष कार्यकर्ता मुंबई के लिए रवाना हो चुके हैं। उपवर्गीकरण का विरोध कर रहे अधिकांश विधायक भी इस आंदोलन में शामिल हो सकते हैं, जिससे मोर्चे के और अधिक व्यापक होने की संभावना है।
मुख्यमंत्री को सौंपे गए ज्ञापन पर महायुति सरकार के दो मंत्रियों सहित कुल 27 विधायकों के हस्ताक्षर हैं। इससे स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि यह मुद्दा केवल विपक्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्ता पक्ष के भीतर भी इस विषय पर अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, इस विषय को लेकर मंगलवार को विधानसभा में विपक्ष की ओर से स्थगन प्रस्ताव लाया जा सकता है। वहीं 6 जुलाई को इस मुद्दे पर अल्पकालिक चर्चा कराए जाने के भी संकेत मिले हैं। ऐसे में आगामी विधानसभा सत्र के दौरान अनुसूचित जाति आरक्षण में उपवर्गीकरण का मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर व्यापक बहस का केंद्र बन सकता है।
यह भी पढ़ें:-ऑपरेशन टाइगर पर फिर चर्चा, उद्धव पर तुमाने का हमला, बोले- अब नहीं, पहले मांगनी चाहिए थी माफी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे पर सरकार, विपक्ष और विभिन्न सामाजिक संगठनों के बीच आगामी दिनों में चर्चाएं और तेज होने की संभावना है, क्योंकि यह विषय आरक्षण व्यवस्था और सामाजिक प्रतिनिधित्व से सीधे जुड़ा हुआ है।