नागपुर सड़क हादसे, प्रतीकात्मक तस्वीर (साेर्स: एआई फोटो) 
नागपुर

नागपुर में सड़क सुरक्षा का नया मॉडल: सफर शुरू कीजिए, और सही-सलामत घर पहुंचने पर भगवान का कीजिए शुक्रिया अदा!

Nagpur Road Safety: आरटीआई से मिले आंकड़ों के अनुसार नागपुर में पिछले चार वर्षों में सड़क हादसों में सैकड़ों लोगों की जान गई। अजनी, एमआईडीसी और कामठी सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र रहे।

अंकिता पटेल

Nagpur Traffic Accident Data: नागपुर शहर की सड़कें अब नागरिकों के लिए सुरक्षित नहीं रही, जिले में भी स्थिति चिंताजनक है। नागपुर पुलिस यातायात विभाग के आंकड़े यहीं संकेत दे रहे है। खुद आधिकारिक आंकड़ों ने शहर की सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए है। पिछले 4 वर्षों के भीतर नागपुर शहर के प्रमुख इलाकों भीषण सड़क हादसों का तांडव देखने को मिला है।

इस अवधि के दौरान अकेले अजनी जोन में 796 हादसे हुए, जिमे 200 लोगों की मौत हो गई। वहीं एमआईडीसी में 206 हादसों में 217 मौतें और कामठी में 505 हादसे में 191 लोगों की जान चली गई। पूरे शहर में ट्रकों और भारी वाहनों की अनियंत्रित रफ्तार के कारण 250 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि फुटपाथों और सड़कों पर चलने वाले 180 से ज्यादा बेकसूर राहगीरों को अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ा है।

इस खूनी ट्रैफिक की चपेट में आने से ऑन-ड्यूटी तैनात एक महिला पुलिसकर्मी सहित कई पुलिस जवानों की भी मौत हुई है, जो शहर की चरमराती यातायात व्यवस्था और ब्लैक स्पॉट्स की डरावनी हकीकत को बयां करता है। सूचना के अधिकार अंतर्गत मिली जानकरी में यह चौकाने वाले खुलासे हुए है।

एमआईडीसी और अजनी बने 'डेथ ट्रैप'

  • सरकारी दस्तावेजों में कैद आकड़ों के मुताबिक शहर के औद्योगिक और व्यस्त रिहायशी इलाकों में हादसों का ग्राफ सबसे डरावना है। औद्योगिक क्षेत्र एमआईडीसी में पिछले 4 वर्षों में 206 भारी एक्सीडेंट हुए, जिनमें 217 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई।
  • इनमें से 75 मौतों के पीछे सीधे तौर पर भारी वाहन जिम्मेदार थे। वहीं अजनी क्षेत्र में कुल 796 सड़क हादसे दर्ज किए गए, जिनमें से प्राणांतिक हादसों में 200 लोगों ने अपनी जान गंवाई।
  • भारी वाहनों का तांडव, छीनीं सबसे ज्यादा सांसें आकड़ों से साफ़ है की शहर में नो एंट्री के नियमों और भारी वाहनों की तेज रफ्तार पर पुलिस का कोई नियंत्रण नहीं रहा है। सदर यातायात परिमंडल के अंतर्गत ट्रकों के कारण 23 घातक हादसे हुए, जिनमें 26 लोगों की मौत हो गई।
  • जबकि इस जोन में कुल मौतों का आंकड़ा 127 है। इसके अलावा कामठी में भारी वाहनों के कारण 157 दुर्घटनाएं हुई, जिसमें 83 लोगों की मौके पर या इलाज के दौरान मौत हो गई। सीताबर्डी में भारी वाहनों की वजह से 15 दुर्घटनाएं दर्ज हुईं और सभी 15 लोगों की मौत हो गई।

ऑन ड्यूटी तैनात पुलिसकर्मियों ने भी गंवाई जान

चौकाने वाले खुलासों में यह बात भी सामने आई है कि सड़कों पर अनियंत्रित ट्रैफिक का शिकार कानून के रखवाले भी हो रहे है। वर्ष 2025 में कॉटन मार्केट यातायात परिमंडल के तहत ऑन ड्यूटी तैनात एक महिला पुलिस कर्मचारी की सड़क हादसे में दर्दनाक मृत्यु हो गई। इसके अलावा अजनी क्षेत्र में भी 2 पुलिसकर्मियों की सड़क हादसों में मौत दर्ज की गई है।

फ्लाईओवर और नेशनल हाईवे पर 'स्पीड का ओवरडोज'

फ्लाईओवर और हाईवे पर रफ्तार का रोमांच लोगों की जिंदगी खत्म कर रहा है। आकड़ों के अनुसार इन चार वर्षों की अवधि में कामठी हाईवे पर हादसों में 99 लोगों की जान गई है। वहीं सदर क्षेत्र के नेशनल हाईवे पर 45 हादसों में 53 लोगों की मृत्यु हुई है। सदर के फ्लाईओवर पर 6 हादसों में 10 लोगों की मौत दर्ज की गई।

फुटपाथ गायब, राहगीर लाचार

आकड़े बता रहे है कि शहर में पैदल चलना किसी खतरे से खाली नहीं है। गाड़ियों की लापरवाही के कारण सड़कों पर चलने वाले राहगीर सबसे ज्यादा निशाना बन रहे है। अकेले सदर क्षेत्र में 32 और कामठी में 53 पैदल यात्रियों की गाड़ियों की चपेट में आने से मौत हुई है। वहीं सीताबड़ीं में 23 और सोनेगांव में भी 23 पैदल चलने वाले नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

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