नागपुर व्यापार, झांसी रानी चौक, अवैध हॉकर,(सोर्स: नवभारत फाइल फोटो)  
नागपुर

नागपुर में अवैध हॉकरों पर बवाल, सीताबर्डी के बाद झांसी रानी चौक में भी मनपा के खिलाफ व्यापारियों का गुस्सा

Nagpur Municipal Corporation: नागपुर के झांसी रानी चौक व्यापारियों ने मनपा कर्मचारियों पर अवैध हॉकरों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। व्यापारियों ने महापौर और आयुक्त से हस्तक्षेप की मांग की।

अंकिता पटेल

Nagpur Jhansi Rani Chowk Illegal Hawkers: नागपुर सिटी के मुख्य व्यापारिक केंद्र सीताबडीं के व्यापारियों के बाद झांसी रानी चौक के व्यापारियों ने भी मनपा के कर्मचारियों पर संगीन आरोप लगाये हैं और कहा कि उनकी साठगांठ ने पूरा का पूरा बाजार चौपट कर दिया गया है, एसोसिएशन का कहना है कि नियमों को ताक पर रखकर कुछ एनएमसी कर्मचारी अवैध हॉकरों को बढ़ावा दे रहे हैं, जबकि टैक्स भरने वाले वैध दुकानदारों को जानबूझकर प्रताड़ित किया जा रहा है। एसोसिएशन के दल ने महापौर नीता ठाकरे, आयुक्त विपिन इटनकर से मुलाकात कर हस्तक्षेप करने की मांग की है।

झांसी रानी चौक से वैरायटी चौक

झांसी रानी चौक से वैरायटी चौक व्यापार संघ ने अपनी अलग व्यथा सुनाई है। उनका कहना है कि इस चौक पर भी हॉर्कस को मनमानी करने की पूरी छूट दी जा रही है जो गलत है। एक तरफ नागपुर महानगरपालिका पूरे शहर में 'अतिक्रमण मुक्त अभियान' का डिंडोरा पीट रही है वहीं दूसरी तरफ शहर के सबसे व्यस्त और संवेदनशील इलाके झांसी रानी चौक से वैरायटी चौक (विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन व मोर भवन गेट के सामने) पर प्रशासन का दोहरा चरित्र खुलकर सामने आ रहा है। करोड़ों रुपये का निवेश करके ईमानदारी से टैक्स भरने वाला व्यापारी आज अपनी बदहाली पर रो रहा है और अवैध रूप से कब्जा करने वाले हॉकर्स प्रशासन के संरक्षण में फल-फूल रहे हैं। 2 फीट की आड़ में पूरी सड़क पर कब्जा मनपा ने हॉकर्स को महज 2 फीट की जगह अलॉट की है लेकिन इसकी आड़ में इन लोगों ने बॉस और तिरपाल लगाकर पक्के ऊंचे स्ट्रक्बर खड़े कर लिए हैं। इससे पीछे स्थित वैध दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के बोर्ड पूरी तरह छुप गए हैं। मनपा को भारी-भरकम टैक्स देने वाले व्यापारियों का धंधा चौपट हो चुका है।

'नो हॉकिंग जोन' का बोर्ड उखाड़ फेंका, पुलिस भी मौन

व्यापारी जब पुलिस में शिकायत करने जाते हैं तो पुलिस इसे मनपा का मामला बताकर टाल देती है। यहां लगे 'नी हॉकिंग जोन' के बोर्ड की असामाजिक तत्ची ने उखाड़कर फेंक दिया लेकिन प्रशासन ने आज तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं की। आज स्थिति यह है कि हॉकर्स प्रशासन को आंख दिखाकर रईसों की जिंदगी जी रहे है और ईमानदार व्यापारी कर्ज के बोझ तले दब रहा है।

कार्रवाई के नाम पर 'नूरा-कुश्ती' और मिलीभगत

जब भी मनपा का दस्ता आता है, ये हॉकर्स एक कथित कागज (परमिशन) दिखाकर अपनी गाड़ियां दुकानों के ठीक सामने ले जाकर चादरों से डंक देते हैं। मनपा के अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि ये सड़क पर नहीं है इसलिए हम कार्रवाई नहीं कर सकते। यह सीधे तौर पर कानून की आंखों में धूल झोंकने और हॉकर्स को मनमानी की खुली छूट देने जैसा है।

HC के आदेश की धज्जियां

उच्च न्यायालय का स्पष्ट आदेश है कि पैरायटी चौक और झागी रानी चौक के 80 मीटर के दायरे में कोई भी कमर्शियल एक्टिविटी या अतिक्रमण नहीं हो सकता। अगर ऐसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी सीधे प्रशासन की होगी। इसके बावजूद इस वीआईपी जोन में धड़ल्ले से बाजार सज रहा है। न्यायालय के आदेश की अवहेलना करने की हिम्मत इन हॉकर्स को कौन दे रहा है।

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