Nagpur SFT Intelligence Wing: नागपुर काले धन को छिपाने के लिए 'नकदी' का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जाता है। इसमें सहकारी संस्थाओं से लेकर कॉर्पोरेट तक शामिल होते हैं। बड़े नकदी के जरिए ट्रांजेक्शन किए जाते हैं और फिर उसकी जानकारी आयकर विभाग को नहीं दी जाती है। इससे काले कारनामे सामने नहीं आ पाते हैं।
सरकार ने इसके लिए एसएफटी भरने की सुविधा दी है परंतु कोई भी इसे गंभीरता से नहीं लेता है। अब एसएफटी वाले खातों की जांच के लिए आयकर विभाग के अंदर ही इंटेलिजेंस एंड क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन विंग (आईएंडसीआई) की स्थापना की गई है। विभाग ने विदर्भ के रजिस्ट्री कार्यालय और सहकारी बैंक संस्थाओं में जिस प्रकार मामलों को उजागर किया वह उल्लेखनीय रहा है।
पिछले वर्ष विभाग ने 52 सर्वे में ही लगभग 25,500 करोड़ रुपये के मामलों का पदार्फाश किया है। विदर्भ जैसे क्षेत्र के लिए यह काफी बड़ी रकम है। इसमें नागपुर-अमरावती ही नहीं बल्कि गड़चिरोली जैसे क्षेत्रों में भी 1,500-₹2,000 करोड़ के मामले सामने आयें हैं।
आईएंडसीआई के जानकारों ने बताया कि सबसे अधिक नकदी लेन-देन का पता सहकारी बैंकों से चला है। गांव में कार्यरत ब्रांचों में भी करोड़ों रुपये का लेन-देन देखा गया और उसे पकड़कर सिस्टम में डाला गया है। ब्रम्हपुरी, गड़चिरोली, अमरावती, गोंदिया जैसे स्थानों में 500-500 करोड़ रुपये लोगों ने नकद में डाले।
इन सभी की जांच की जा रही है। सहकारी बैंकों में हुए सर्वे से लगभग 12,000 करोड़ रुपये का मामला पकड़ा गया है। इन बैंकों के लाखों खातों के ट्रांजेक्शन को खंगाला गया, तब जाकर इतनी बड़ी रकम को सिस्टम में लाने का मौका मिला।
नागपुर के भी कई सहकारी बैंकों में सर्वे किया गया। जांच में पता चला है कि कई बड़े कारोबारी, व्यापारी, बिल्डर, नेता ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित छोटे-छोटे ब्रांचों को 'नकद' जमा करने का ठिकाना बना चुके थे। उन्हें यह आभास था कि इन ब्रांचों तक किसी की नजर नहीं पड़ेगी। लेकिन
विभाग ने जब 'रिटर्न' का मिलान किया तो ऐसे हजारों अकाउंट का पता चला जिसमें लिमिट से ज्यादा नकद जमा कराई गई और करदाता और बैंक ने उक्त जानकारी को छिपाकर रखा।
सभी को पता है कि लोग अपनी काली कमाई संपत्ति बाजार में लगाते हैं। इसके लिए नकदी का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है। आयकर नियम के तहत रजिस्ट्री कार्यालय को एक सीमा के बाद की पूरी जानकारी आयकर विभाग को एसटीएफ के जरिए मुहैया कराना अनिवार्य है लेकिन रजिस्ट्री कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी बड़े सौदे होने की जानकारी विभाग से छुपाते रहे।
यहां तक की एकन ट्रांजेक्शन 100 करोड़ का होने के बाद भी छिपाया गया 50 करोड़ और 20-25 करोड़ के अनेक सौदों को छिपाकर रखा गया था। आईएंडसीआई विभाग ने सपूर्ण विदर्भ में स्थित रजिस्ट्री कार्यालय का सर्वे किया और इन मामलों का खुलासा किया।
गांवों तक में जानकारी छिपाने की बात सामने आने लगी, रजिस्ट्री कार्यालय में सर्वे से विभाग को लगभग 15,000 करोड़ सिस्टम में लाने में सफलता मिली। इसमें भी एक रैकेट के तौर पर काम को अंजाम दिया जा रहा था।
सहकारी और रजिस्ट्री कार्यालय में हुए सर्वे के बाद विभाग ने सभी ज्वेलर्स, हॉस्पिटल और बिल्डर को भी नोटिस जारी कर एसएफटी जमा करने को कहा था लेकिन कई सेक्टरों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, विभाग का कहना है कि इन सेक्टरों से उन्हें काफी कम जानकारी हासिल हो रही है।
इसके बाद कुछ बिल्डरों, ज्वेलर्स और हॉस्पिटल का भी सर्वे किया गया। इन सेक्टर से लगभग 3,000 करोड़ रुपये अघोषित लेन-देन की जानकारी मिली है। इन लेन-देन को सिस्टम में लाया गया है।
आसूचना एवं आपराधिक अन्वेषण निदेशालय ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान विदर्भ क्षेत्र में कुल 52 स्थल-सत्यापन किए, इन सत्यापनों के फलस्वरूप लगभग 40 लाख ऐसे लेन-देन जिनका कुल मूल्य लगभग 25,500 करोड़ रुपये था, 'वित्तीय लेन-देन विवरणी में अनरिपोर्टेड पाए गए।
इन सभी को संबंधित संस्थाओं द्वारा अद्यतन संशोधन विवरणी के माध्यम से एसएफटी प्रवाह में दर्ज कराया गया,
यह अभियान नागपुर एवं अमरावती दोनों संभागों में हुआ। संपत्ति पंजीयन, सहकारी बैंकिंग, अस्पताल, सर्राफा एवं रियल एस्टेट क्षेत्रों में कार्रवाई हुई।
अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में अधिकांश लोगों से फॉर्म भरवाये गए है। अब इन जानकारियों का मिलान और मूल्यांकन किया जा रहा है। आयकर कार्यालय और अन्वेषण विभाग के पास पूरी जानकारी उपलब्ध हो चुकी है।
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इनसे काले धन के बारे में जानकारी हासिल की जाएगी अन्यथा सर्वे और रेड के जरिए टैक्स निकालवाने का काम किया जाएगा, संबंधितों का कहना है कि कई सेक्टर अभी भी एसएफटी को गंभीरता से नहीं ले रहे है। इससे स्पष्ट है कि वे अब भी काले धन को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं। ऐसे में भविष्य में बड़ी संख्या में कार्रवाई की जा सकती है।
सत्यापन हेतु मामलों का चयन किसी एकल आधार पर नहीं बल्कि अनेक कारकों के समन्वय से किया गया। इनमें प्रस्तुत विवरणियों में पाई गई त्रुटियां, विवरणी दाखिल ही न करना, विभाग द्वारा जारी क्वेरी पर अनुत्तरदायी रहना, क्षेत्रीय (फील्ड) इनपुट तथा विभिन्न डेटाबेसों पर आधारित डेटा एनालिटिक्स से अभिज्ञात विसंगतियां शामिल रहीं।
-नवभारत लाइव के लिए नागपुर से नीरज नंदन की रिपोर्ट