नागपुर हाई कोर्ट, भूमि अधिग्रहण, किसान मुआवजा, प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: AI फोटो  
नागपुर

बुनियादी विकास के नाम पर लापरवाही! रिंग रोड के लिए अधिग्रहित की अतिरिक्त जमीन, 3 साल बाद भी नहीं मिला मुआवजा

Nagpur High Court Land Acquisition: नागपुर में आउटर रिंग रोड व समृद्धि महामार्ग परियोजना के लिए अधिग्रहित अतिरिक्त 0.15 हेक्टेयर जमीन का मुआवजा 3 महीने में देने का HC ने राज्य सरकार को आदेश दिया है।

अंकिता पटेल

Nagpur High Court Order Compensation: नागपुर जिले में बुनियादी सुविधाओं के विकास के नाम पर भूमि अधिग्रहण में एक बड़ी विसंगति और लापरवाही का मामला उजागर हुआ। अदालत ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पाया कि आउटर रिंग रोड और समृद्धि महामार्ग के निर्माण के लिए एक किसान की 0.15 हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन बिना कोई मुआवजा दिए ही अधिग्रहित कर ली गई।

इस मामले में सरकारी विभागों के बीच की खींचतान को खत्म करते हुए हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह 3 महीने के भीतर याचिकाकर्ता को इस अतिरिक्त जमीन का मुआवजा दे।

आउटर रिंग रोड और समृद्धि महामार्ग के लिए अधिग्रहण

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि सरकार की ओर से आउटर रिंग रोड और समृद्धि महामार्ग के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण किया गया था। याचिकाकर्ता के पास गट नंबर 68/1 और 68/2 में कुल 1.02 हेक्टेयर जमीन थी। इसमें से सार्वजनिक निर्माणकार्य विभाग द्वारा आउटर रिंग रोड के लिए पहले 0.28 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया था।

इसके बाद महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम ने समृद्धि महामार्ग के निर्माण के लिए 0.09 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया, जिसके एवज में 14 अगस्त 2020 को 14,25,600 रुपये का मुआवजा दिया गया था।

इस हिसाब से कुल 0.37 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होना चाहिए था लेकिन जब याचिकाकर्ता ने अपनी जमीन का निजी माप करवाया, तो उसे पता चला कि उसके पास तय सीमा से कम जमीन बची है और संबंधित विभागों ने ज्यादा जमीन पर कब्जा कर लिया है।

सरकारी माप में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

सुनवाई के दौरान बताया गया कि भूमि अभिलेख उप अधीक्षक द्वारा किए गए संयुक्त मापन की रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि वास्तव में कुल 0.52 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण कर लिया गया है। इसका सीधा अर्थ यह था कि 0.15 हेक्टेयर (0.52 0.37) अतिरिक्त जमीन पर कब्जा कर लिया गया और याचिकाकर्ता को इसका एक रुपया भी मुआवजे के तौर पर नहीं मिला। याचिकाकर्ता अपने इस जायज हक और मुआवजे के लिए वर्ष 2021 से लगातार पत्राचार कर रहा था और पिछले 5-6 वर्षों से न्याय की गुहार लगा रहा था।

सरकारी विभागों में खींचतान

दोनों पक्षों की दलीलों के बाद कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया और स्पष्ट किया कि सरकारी विभागों के आपसी विवाद के कारण नागरिक को उसके उचित मुआवजे से वंचित नहीं रखा जा सकता। राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है कि वह 3 महीने के भीतर याचिकाकर्ता को 0.15 हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन के मुआवजे का भुगतान करे।

मुआवजा देने के बाद राज्य सरकार को भूमि अभिलेख विभाग के माध्यम से स्वतंत्र मापन कराने की स्वतंत्रता होगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह अतिरिक्त जमीन राज्य सरकार ने ली थी या MSRDC ने ली।

यदि मापन में यह साबित होता है कि यह अतिरिक्त जमीन MSRDC के अधिग्रहण के दौरान ली गई थी, तो MSRDC को यह जिम्मेदारी होगी कि वह राज्य सरकार द्वारा चुकाई गई मुआवजे की राशि 8 सप्ताह के भीतर राज्य सरकार को वापस करे, वहीं यदि यह जमीन राज्य सरकार द्वारा ही अधिग्रहित पाई जाती है, तो MSRDC से किसी भी प्रकार की वसूली नहीं की जाएगी।

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