Nagpur Government School Student Attendance: 'नवभारत एजुकेशन समिट-2026' में विभागीय शिक्षा उपनिदेशक डॉ. माधुरी सावरकर ने कहा कि सरकारी मान्यता प्राप्त विद्यालयों तथा कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को मजबूत बनाए रखना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यालयों की भी समान भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को समझने, उन्हें पर्याप्त समय देने और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराने से ही शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य पूरा किया जा सकता है।
डॉ. सावरकर ने विद्यार्थियों के विकास की तुलना किसान से करते हुए कहा कि जिस प्रकार किसान बीज बोने के बाद उसके अंकुरित होने का धैर्यपूर्वक इंतजार करता है, उसकी देखभाल करता है और उसे अनुकूल वातावरण देता है, उसी प्रकार बच्चों के विकास के लिए भी धैर्य, मार्गदर्शन और निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों पर अनावश्यक दबाव बनाने के बजाय उन्हें सीखने और आगे बढ़ने के अवसर दिए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने शिक्षकों से प्रेरणा लेते हैं। इसलिए शिक्षकों का आचरण, अनुशासन और परिश्रम विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। परिवार और विद्यालय दोनों मिलकर बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करें, ताकि वे जीवन के हर क्षेत्र में सफल बन सकें।
डॉ. माधुरी सावरकर ने कहा कि निजी कोचिंग संस्थानों के बढ़ते प्रभाव के कारण कई विद्यालयों में विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति प्रभावित हो रही है। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने प्रवेश प्रक्रिया को केंद्रीकृत और बायोमेट्रिक बनाया है।
इसके साथ ही विद्यार्थियों की दैनिक उपस्थिति की निगरानी के लिए 'विद्या समीक्षा केंद्र' प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है, जिससे स्कूलों में उपस्थिति पर प्रभावी नजर रखी जा सके।
उन्होंने बताया कि शिक्षा व्यवस्था का केंद्र विद्यार्थी है। बच्चों पर पढ़ाई का अनावश्यक दबाव कम करने के उद्देश्य से 'आनंददायी शनिवार' की अवधारणा लागू की गई है। इसके तहत विद्यार्थियों को रचनात्मक और आनंददायक गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर मिलता है। इसके अलावा विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी के लिए स्कूलों को हेल्थ कार्ड भी उपलब्ध कराए गए हैं।
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