एट्रोसिटी पीड़ित, सरकारी नौकरी, प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सौजन्य AI) 
नागपुर

नागपुर जिला: 43 मामलों में 3.46 करोड़ रूपए की आर्थिक मदद; समाज कल्याण विभाग ने 28 और नियुक्तियों को दी मंजूरी

Nagpur Government Jobs: नागपुर में 2012 से 2025 के बीच एट्रोसिटी मामलों में 43 लोगों की मौत दर्ज हुई। परिवारों को आर्थिक सहायता के साथ 31 परिजनों को सरकारी नौकरी देकर पुनर्वास की दिशा में कदम बढ़ाया।

अंकिता पटेल

Nagpur Government Jobs Social Justice: नागपुर जातिगत भेदभाव और अत्याचार (एट्रोसिटी) के मामलों में न्याय और पुनर्वास सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए सरकार ने अत्याचार पीड़ितों के परिजनों (वारिसों) को सरकारी नौकरी देने का निर्णय लिया है। नागपुर जिले में पिछले 13 वर्षों (2012 से 2025) के दौरान अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग पर हुए अत्याचारों में 43 लोगों की मौत होने के मामले दर्ज किए गए हैं।

इन सभी मामलों में मृतकों के परिवारों को कुल 3,46,50,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है और 31 परिजनों को सरकारी सेवा में शामिल किया गया है। समाज कल्याण विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले के कुल 43 मामलों में से 4 परिवारों को पहले ही सरकारी नौकरी दी जा चुकी थी।

शेष 39 मामलों में से 36 के प्रस्ताव प्रशासन को प्राप्त हुए थे जिनमें से 28 परिजनों की नियुक्तियों को मंजूरी दे दी गई है। इनमें से 26 परिजन प्रत्यक्ष रूप से सरकारी सेवा में शामिल (रुजू) भी हो चुके हैं।

5 मामलों में अभी नाबालिग

प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार इसके अलावा 5 परिजन अभी नाबालिग हैं, इसलिए उन्हें प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) में रखा गया है, जबकि 3 लोग नौकरी के लिए अपात्र पाए गए हैं। शेष बचे 3 मामलों में योग्य वारिसों की तलाश अभी समाज कल्याण विभाग द्वारा की जा रही है। सामाजिक न्याय विभाग में विभिन्न पदों पर जिन कुल 31 वारिसों को नियुक्ति दी गई है उनमें नागपुर जिले के 23, भंडारा के 3, गोंदिया के 4 और वर्धा जिले का 1 व्यक्ति शामिल है। समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकार की सामाजिक न्याय नीति को ठोस रूप से लागू किया जा रहा है।

सामाजिक प्रतिबद्धता का किया गया निर्वाह

आयुक्त सहायक समाज कल्याण विभाग, सुकेशिनी तेलगोटे-''एट्रोसिटी (अत्याचार) के पीड़ितों के देने परिजनों को आर्थिक मदद के साथ नौकरी का भी प्रावधान है और इसका कार्यान्वयन किया जा रहा है। अत्याचारग्रस्त परिवारों को केवल सहायता राशि देकर हमारी जिम्मेदारी खत्म नहीं होती बल्कि उन्हें सम्मान के साथ खड़े होने का अवसर देना ही सच्ची सामाजिक प्रतिबद्धता है।''

2012 से 2025 तक के आंकड़े

विवरण आंकड़ा
कुल हत्या के मामले 43
दी गई आर्थिक मदद ₹3.46 करोड़
नौकरी पाने वाले कुल वारिस 31
प्रत्यक्ष रूप से सेवा में शामिल हुए 26
नाबालिग (प्रतीक्षा सूची में) 5

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