Nagpur Fuel Shortage Electric Vehicles: नागपुर इन दिनों पेट्रोल की किल्लत ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। रही-सही कसर मूल्य वृद्धि ने पूरी दी है। दर वृद्धि अच्छे अच्छों को परेशान कर रही है। लोग चिंता में हैं कि काम कैसे होगा। शहर के कई पेट्रोल पंपों पर 'पेट्रोल खत्म, डीजल नहीं के बोर्ड अब भी देखे जा सकते हैं।
बढ़ी कीमतों के कारण लोग पंपों से दूरी बनाने लगे हैं। वाहन चालको की परेशानी कई गुना बढ़ गई है। वहीं एक वर्ग ऐसा भी है जो इन झंझटों से कोसों दूर है। ये हैं इलेक्ट्रिक वाहनों के 'स्वामी।' इन स्वामियों को पेट्रोल-डीजल किल्लत से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। ये मस्त हो अपनी सवारी का आनंद उठा रहे हैं।
इस अफरा-तफरी और परेशानियों के बीच शहर का एक वर्ग ऐसा भी है जो पूरी तरह निश्चिंत और बेफिक्र नजर आ रहा है। यह वर्ग है इलेक्ट्रिक वाहन चालकों का। मूल्य बड़े या फिर पेट्रोल वाहन चलाने वाले लोग धूप में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करें, ईवी चालक आराम से एसी ऑन करके अपनी गाड़ी चला रहे हैं। न उन्हें पेट्रोल पंप की कतार में लगना पड़ता है। न 'नो स्टॉक' का डर सताता है और न ही दामों में वृद्धि की चिंता। उनके लिए चार्जिंग का मतलब है- घर या ऑफिस में प्लग लगाना और कुछ घंटों में वाहन फिर से चलने के लिए तैयार।
कई इंची चालक इस समय खुद को 'फ्यूचर ड्राइवर मानते हुए कहते नजर आ रहे हैं कि उन्होंने पहले ही सही फैसला ले लिया था। एक ईवी उपयोगकर्ता का कहना है कि पहले यह भी पेट्रोल पंपी की लाइन में खड़ा रहता था लेकिन अब सिर्फ रात को गाड़ी चार्ज करता है और सुबह बिना किसी तनाव के निकल जाता है। शहर में बढ़ते चार्जिंग स्टेशनों ने भी ईवी उपयोग को आसान बना दिया है। मॉल, ऑफिस और सार्वजनिक स्थानी पर चार्जिंग पॉइंट्स उपलब्ध होने से लंबी दूरी तय करना भी अब पहले जितना मुश्किल नहीं रहा, जहां पेट्रोल पंपों पर अफरा-तफरी और तनाव का माहौल है वहीं चार्जिंग स्टेशनों पर लोग आराम से बैठकर अपनी गाड़ी चार्ज होने का इंतजार करते हैं, इस संकट के समय में इलेक्ट्रिक वाहन बालकों का अनुभव बाकी लोगों के लिए एक स्पष्ट संदेश दे रहा है कि वैकल्पिक ऊर्जा पर आधारित परिवहन कितना सुविधाजनक हो सकता है।
नागपुर में पैदा हुई स्थिति केवल एक अस्थायी संकट नहीं बल्कि भविष्य के लिए एक बड़ा संकेत भी है। पेट्रोल और डीजल जैसे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता आज की दुनिया में एक जोखिम भरा विकल्प बनती जा रही है, खासकर तब जब वैश्विक घटनाओं का सीधा असर स्थानीय स्तर पर देखने को मिलता है। इलेक्ट्रिक वाहन इस संदर्भ में एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प के रूप में उभर रहे हैं। सबसे बड़ा फायदा यह है कि ईवी चालकों को पेट्रोल पंपों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
यह भी पढ़ें:-30 मई का इतिहास : हिन्दी पत्रकारिता दिवस: 1826 में आज ही निकला था पहला हिन्दी अखबार ‘उदन्त मार्तण्ड’
वे अपने घर या ऑफिस में ही वाहन चार्ज कर सकते हैं जिससे समय और ऊर्जा दोनों की बचत होती है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहनों का संचालन खर्च भी पेट्रोल वाहनों की तुलना में काफी कम होता है जिससे लंबी अवधि में आर्थिक लाभमिलता है। मानसिक शांति भी एक बड़ा कारण है। जहां पेट्रोल की किल्लत के कारण लोग तनाव में हैं वहीं ईवी चालक पूरी तरह टेंशन-फ्री हैं। इस संकट के बाद नागपुर में इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति लोगों की रुचि तेजी से बढ़ी है।
ऑटोमोबाइल डीलरों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में ईवी के बारे में पूछताछ में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। लोग अब समझने लगे हैं कि भविष्य जीवाश्म ईंधन का नहीं बल्कि स्वच्छ और वैकल्पिक ऊर्जा का है। सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी, टैक्स में छूट और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार ने भी इस बदलाव को गति दी है। यह संकट मानो एक चेतावनी है कि समय रहते यदि परिवहन के साधनों में बदलाव नहीं किया गया तो भविष्य में ऐसी समस्याएं और भी बढ़ सकती हैं।