इथेनॉल पेट्रोल, विदर्भ आंदोलन, नागपुर प्रदर्शन, (सोर्स: नवभारत फाइल फोटो) 
नागपुर

इथेनॉल पेट्रोल विवाद: नागपुर में आंदोलनकारियों को पुलिस ने लिया हिरासत में, तहसील थाने में मामला दर्ज

Nagpur Road Petrol Protest: इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की अनिवार्यता के विरोध में नागपुर में विदर्भ राज्य आंदोलन समिति ने रास्ता रोको किया। पुलिस ने 11 प्रदर्शनकारियों पर मामला दर्ज किया।

अंकिता पटेल

Ethanol Blended Petrol Protest: नागपुर केंद्र और राज्य सरकार द्वारा इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को अनिवार्य किए जाने के कारण विदर्भ सहित पूरे महाराष्ट्र के हजारों वाहन चालक इन दिनों भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। इस अनिवार्यता के विरोध में तथा आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए विदर्भ राज्य आंदोलन समिति ने गांधी पुतला चौक इतवारी में रास्ता रोको आंदोलन किया।

आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि ई-व्हीकल कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए इथेनाल मिश्रित पेट्रोल को अनिवार्य किया गया है। यह सरकार की साजिश है। आंदोलनकारियों ने सरकार व केंद्रीय मंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और रोड जाम कर दिया।

इथेनॉल पेट्रोल पर सियासत, सरकार पर गंभीर आरोप

सीए रोड पर लंबा जाम लग गया। पुलिस को आंदोलनकारियों को नियंत्रित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। बाद में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर तहसील थाना ले गई और 11 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया।

वाहनों को किया जा रहा खराब विराआंस युवा आघाड़ी के मुकेश मासुरकर ने आरोप लगाया कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के कारण जानबूझकर वाहनों को खराब किया जा रहा है ताकि परेशान होकर लोग इलेट्रिक वाहनों की ओर रुख करें।

इससे सरकार को दोहरा लाभ होगा। एक ओर 15 वर्ष पुराने वाहनों को स्क्रैप करने का लक्ष्य पूरा होगा तो दूसरी ओर ई-व्हीकल कंपनियों से सरकार को बड़ा राजस्व प्राप्त होगा। आगामी चुनावों में होने वाले खर्च की व्यवस्था जनता की जेब से करने का बड़ा षड्यंत्र रच रही है।

तत्काल खत्म की जाए अनिवार्यता

मांग की गई कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की अनिवार्यता तत्काल और पूरी तरह समाप्त की जाए। साथ ही आम जनता और वाहन मालिकों को अपनी इच्छा के अनुसार शुद्ध पेट्रोल या इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल चुनने की पूरी स्वतंत्रता दी जाए, आंदोलन में पूर्व विदर्भ विभाग अध्यक्ष अरुण केदार, नरेश निमजे, प्रशांत नखाते, गिरीश तितरमारे, ज्योति खांडेकर, शाहिद अनवर, राहुल बन्सोड, गणेश शर्मा, अमूल साकुरे, हरिभाऊ पानबुडे, माधुरी चौवान, अण्णाजी राजेधर, रहमान शेख, लता अवजेकर, चंद्रशेखर शेंडे, तेजराम रेवातकर, चंद्रशेखर पुरी, गंगाधर मुंडकर, नीलकंठराव अंभोरे, मनीषा पुरी, विकास गोहने, अतुल रणदिवे, रामटेके, अशफाक अली, जॉय बांगडकर, अमोल रडके सहित अनेक कार्यकर्ता शामिल हुए।

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