नागपुर में खाद्य तेल पर एफडीए कार्रवाई सोर्स- सोशल मीडिया
नागपुर

पुराने टिनों में तेल पैकिंग पर तुकाराम मुंढे का चाबुक! नागपुर के तेल कारोबारियों में मचा हड़कंप!

Nagpur Oil Packaging: नागपुर में FDA ने पुराने या जंग लगे टिनों में खाद्य तेल की दोबारा पैकिंग और खुले तेल की बिक्री पर सख्ती के निर्देश दिए हैं। कार्रवाई से तेल कारोबारियों में हड़कंप है।

अंकिता पटेल

Nagpur Edible Oil Packaging Rules: नागपुर में खाद्य तेल की पैकिंग और खुली बिक्री को लेकर एफडीए की सख्ती के बाद सिटी के तेल कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट किया है कि इस्तेमाल किए जा चुके अथवा जंग लगे टिनों में खाद्य तेल की दोबारा पैकिंग करना नियमों के खिलाफ है। साथ ही खुले या बिना सील वाले खाद्य तेल की बिक्री पर भी रोक को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

मुंढे की इस कार्रवाई का सीधा असर उन कारोबारियों पर पड़ा है जो कथित तौर पर पुराने टिनों का इस्तेमाल कर उनमें दोबारा खाद्य तेल भरकर अपने ब्रांड के नाम से बाजार में बेचते हैं और लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। इस काम में सिटी के ही अधिकतर तेल व्यवसायी खुद का मार्क लगाकर पुराने डिब्बो में तेल भरकर बेचते हैं। इनमें ऑयल मर्चेंट्स एसोसिएशन के अधिकतर पदाधिकारी भी शामिल हैं।

उपभोक्ताओं की सेहत सबसे बड़ा मुद्दा

खाद्य तेल सीधे लोगों के दैनिक भोजन का हिस्सा है। ऐसे में पैकिंग में लापरवाही, पुराने कंटेनरों का इस्तेमाल, मिलावट या उत्पाद की सही जानकारी छिपाए जाने की आशंका केवल व्यापारिक नियमों का मामला नहीं बल्कि सीधे उपभोक्त्ताओं के स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा बन जाता है। अब देखना यह होगा कि एफडीए नागपुर में पुराने टिनों के इस्तेमाल और दोबारा पैकिंग के खिलाफ कितनी प्रभावी कार्रवाई करता है।

यदि जांच में नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो कार्रवाई केवल छोटे विक्रेताओं तक सीमित न रहकर सप्लाई चेन और पैकिंग करने वाले कारोबारियों तक भी पहुंचनी चाहिए। महाराष्ट्र एफडीए ने खाद्य तेल की सुरक्षा से समझौता न करने का स्पष्ट संदेश दिया है और उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

दोबारा-तिबारा पैकिंग का जमकर चल रहा खेल

सिटी के तेल बाजार में लंबे समय से पुराने टिनों को दोबारा इस्तेमाल कर उनमें खाद्य तेल भरने की प्रथा को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इसमें कई कारोबारी पुराने टिनों पर अपना ब्रांड अथवा मार्क लगाकर उनमें तेल भरकर बाजार में उतारते है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि टिन वास्तव में नया है या पहले उसमें किसी अन्य प्रकार का तेल अथवा अन्य पदार्थ रखा जा चुका है।

इस तरह की पैकिंग व्यवस्था में उपभोक्ता के लिए तेल के वास्तविक स्रोत, पैकिंग की स्थिति और उत्पाद की गुणवत्ता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना मुश्किल हो जाता है। एफडीए ने भी इसी वजह से उपभोक्ताओं को खुले अथवा बिना सील वाले तेल से बचने और सीलबंद, लेबलयुक्त पैकेज खरीदने की सलाह दी है।

क्या मुंढे के आदेश से बदलेगा तेल बाजार

नागपुर के बाजार में पुराने टिनों के इस्तेमाल को लेकर फल्ली तेल, अंकुर, मिलन, सन्नी, दावत, रिद्धि गोल्ड और किंग होली जैसे ब्रांड्स है जो कि पुराने टिन का उपयोग करते हैं। किसी तरह की कार्रवाई नहीं होने और अधिकारियों व कारोबारियों की मिलीभगत होने से यह खेल वर्षों से चला आ रहा है। अब मुढे की कार्रवाई ने नागपुर के तेल बाजार के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

क्या अब पुराने टिनों में बार-बार तेल भरकर बेचने की परंपरा पर पूरी तरह रोक लगेगी या कुछ समय बाद बाजार फिर पुराने दर्रे पर लौट आएगा? एफडीए के मौजूदा निर्देशों के मुताबिक खाद्य तेल को सीलबंद, छेडछाड़-रोधी और पूरी तरह लेबलयुक्त पैकेज में बेचना जरूरी है। चिल्लर विक्रेताओं को भी बिना सील अथवा छेड़छाड़ चाली खेप स्वीकार नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं।

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