रकम हड़पने वाले अंतरराज्यीय गिरोह प्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स: AI
नागपुर

10 हजार रुपये की मदद का लालच, किसानों के नाम पर 73.82 करोड़ का लोन! नागपुर में SBI कर्ज घोटाले का खुलासा

Nagpur loan fraud: नागपुर में किसानों को सालाना 10 हजार रुपए की सरकारी मदद दिलाने का झांसा देकर दस्तावेज लिए गए और उनके नाम पर SBI से 73.82 करोड़ रुपये का कृषि कर्ज उठाया गया।

प्रमोद यादव

Nagpur SBI Agriculture Loan Scam: नागपुर के किसानों को सरकारी योजना के तहत हर साल 10 हजार रुपए की मदद दिलाने का झांसा देकर उनके दस्तावेज हासिल किए और उन्हीं के नाम पर भारतीय स्टेट बैंक से 73 करोड़ 82 लाख 92 हजार 850 रुपए का कृषि कर्ज उठा लिया।

फर्जी दस्तावेज और कंपनियां तैयार कर करोड़ों की रकम हड़पने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के एक आरोपी को नागपुर ग्रामीण पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने नागपुर रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान सचिन खुशाल कारेमोरे (40), निवासी नेरी, तहसील मोहाड़ी, जिला भंडारा के रूप में हुई है।

पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य

यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हर्ष ए. पोद्दार, अपर पुलिस अधीक्षक अनिल म्हस्के और आर्थिक अपराध शाखा की पुलिस उपअधीक्षक पूजा गायकवाड़ के मार्गदर्शन में पुलिस निरीक्षक योगेश कामाले और उनकी टीम ने की। पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य गरीब, अशिक्षित और अल्पशिक्षित किसानों को निशाना बनाते थे।

किसानों को बताया जाता था कि फसल नुकसान की सरकारी भरपाई के रूप में हर साल 10 हजार रुपए मिलेंगे और इसके लिए एसबीआई में खाता खुलवाना जरूरी है। इस बहाने किसानों से आधार कार्ड, पैन कार्ड और 7/12 उतारे लिए जाते थे।

इसके बाद उन्हें बैंक ले जाकर अलग-अलग अंग्रेजी भाषा में तैयार दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए जाते थे। आरोप है कि किसानों को इन दस्तावेजों की वास्तविक जानकारी दिए बिना उनके नाम पर लाखों रुपए का कृषि कर्ज उठा लिया जाता था।

पुलिस जांच में सामने आया है कि

नागपुर के एसबीआई की मौदा शाखा से 54 करोड़ 69 लाख 42 हजार 850 रुपए तथा रामटेक शाखा से 19 करोड़ 13 लाख 50 हजार रुपए का कृषि कर्ज किसानों के नाम पर उठाया गया। इस तरह दोनों मामलों में कुल 73 करोड़ 82 लाख 92 हजार 850 रुपए का कर्ज निकाला गया।

फर्जी वेयरहाउस लाइसेंस का भी खेल

जांच में इस मामले के तार अंतरराज्यीय स्तर तक जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य केंद्रीय प्राधिकरण वेयरहाउसिंग डेवलपमेंट एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी, दिल्ली से कथित तौर पर फर्जी वेयरहाउस लाइसेंस हासिल करते थे।

इन लाइसेंस के आधार पर एसबीआई में फर्जी इलेक्ट्रॉनिक निगोशिएबल वेयरहाउस रिसीट गिरवी रखकर 'प्रोड्यूस मार्केटिंग लोन' योजना के तहत किसानों के नाम पर करोड़ों रुपए का कर्ज उठाया जाता था।

कई राज्यों में फैले हैं संबंधित गिरोह के तार

नागपुर जिले के पुलिस जांच में अधिकांश आरोपी अलग-अलग राज्यों के होने की जानकारी सामने आई है। आर्थिक अपराध शाखा की टीम गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है। पुलिस का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर फर्जी दस्तावेज, कंपनियों और बैंक कर्ज के

इस नेटवर्क से जुड़े और भी चौकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं, पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी सचिन कारेमोरे के खिलाफ इससे पहले भंडारा, गडचिरोली और अहेरी में धान घोटाले से जुड़े मामले भी दर्ज होने की जानकारी मिली है। वह पिछले कई महीनों से पुलिस की गिरफ्त से बाहर था। हाल ही में नागपुर उच्च न्यायालय ने उसका गिरफ्तारी पूर्व जमानत आवेदन रद्द कर दिया था।

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