Eastern Vidarbha Industrial Corridor: पूर्वी विदर्भ की खनिज संपदा, कृषि और वन संसाधनों का पूर्ण उपयोग कर इस क्षेत्र की तस्वीर बदलने के लिए राज्य सरकार ने 'ईस्टर्न विदर्भ इंडस्ट्रियल कॉरिडोर' की एक महत्वाकांक्षी विकास योजना तैयार की है।
नागपुर, वर्धा, गड़चिरोली, चंद्रपुर, भंडारा और गोंदिया-इन छह जिलों में फैला यह कॉरिडोर राज्य के औद्योगिक क्षेत्र में सबसे बड़े अवसर के रूप में उभर रहा है। वर्तमान में राज्य की कुल औद्योगिक अर्थव्यवस्था में इन छह जिलों का योगदान 5% से भी कम है। इस स्थिति को बदलने और 5 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करने के उद्देश्य से यह योजना बनाई गई है।
कॉरिडोर की निगरानी के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक 'स्टेट स्टीयरिंग कमेटी' और स्वतंत्र सीईओ वाला एक प्राधिकरण काम करेगा, इससे पूर्वी विदर्भ के आर्थिक विकास के साथ-साथ युवाओं के पलायन को रोकने में मदद मिलेगी। मिशन डायरेक्टर उद्योग विभाग के सचिव पी। अनबलगन और को-मिशन डायरेक्टर विभागीय आयुक्त विजयलक्ष्मी बिदरी को बनाया गया है।
श्रमिकों के रहने और काम करने के लिए एक एकीकृत इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा, जिसका भूमि उपयोग इस प्रकार होगा। 55% केवल उद्योगों के लिए। 12% ग्रीन बेल्ट (हरित पट्टी), 12% - सड़कें और नागरिक सुविधाएं शेष क्षेत्र आवासीय और व्यावसायिक उपयोग के लिए रहेगा। अन्य प्रमुख सुविधाएंः 25,000 से 40,000 निवासियों के लिए आवास, 500 मेगावाट से अधिक का बेसलोड पावर ग्रिड और ई-रिक्शा ट्रैक।
इस परियोजना को 6 वर्ष (72 महीने) में 5 चरणों के तहत पूरा किया जाएगा 1 से 12 महीने में 6 नो का सर्वेक्षण और क्षेत्रीय योजना बनाई जाएगी। 13 से 24 महीने में कॉरिडोर अथॉरिटी की स्थापना और फंड को मंजूरी दी जाएगी।
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25 से 36 महीने में अंतिम डीपीआर स्वीकृति और एमआईडीसी भूखंडों का आवंटन / सक्रियकरण किया जाएगा। 37 से 48 महीने में रेलवे और एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी को पूरा किया जाएगा। 49 से 72 महीने में पहले स्टील का उत्पादन, एंकर कंपनियों का संचालन और मेगा फूड पार्क की शुरुआत की जाएगी।