मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सुप्रीम कोर्ट पर मोर्चा निकालने की बात को लेकर कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के नेताओं की आलोचना की।
उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि सुप्रीम कोर्ट पर मोर्चा निकालने का प्रावधान किस संविधान में है।
मुख्यमंत्री ने 1975 की इमरजेंसी का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा।
जंतर-मंतर के प्रदर्शन को लेकर उन्होंने सोशल मीडिया कंपनियों को भुगतान किए जाने का दावा किया।
विदेशी पैसे के इस्तेमाल संबंधी आरोप की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध कराए गए समाचार विवरण में नहीं है।
Supreme Court March Opposition: मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने कांग्रेस सहित अन्य इंडिया गठबंधन दलों को सुप्रीम कोर्ट पर मोर्चा ले जाने को असंवैधानिक बताते हुए आड़े हाथों लिया।
नागपुर में पत्रकारों चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि मैं तो हैरान हूं कि कोई विपक्ष का नेता ये कैसे कह सकता है कि हम सुप्रीम कोर्ट पर मोर्चा लेकर जाएंगे और चीफ जस्टिस से मिलने की डिमांड कर सकते हैं। सीएम ने कहा कि मैं राहुल गांधी से पूछना चाहता हूं कि यह किस संविधान में लिखा है कि आप सुप्रीम कोर्ट पर मोर्चा निकालें और सीजेआई से मिलने की डिमांड करें।
सीजेआई ने कहा है कि अगर विपक्ष को शिकायत है, आप कोर्ट में आइए। फडणवीस ने कहा कि मैं बार-बार कहता हूं कि विपक्ष के नेताओं का संविधान पर विश्वास नहीं है। ये सभी संविधान विरोधी लोग हैं।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संविधान के मुद्दे पर राहुल गांधी पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता को कांग्रेस के इतिहास को नहीं भूलना चाहिए। 1975 में देश में
इमरजेंसी लगाकर तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी ने संविधान को कमजोर करने की कोशिश की थी। ऐसे लोग अब हमें संविधान की रक्षा करने का पाठ पढ़ा रहे हैं। यह पूरी तरह से हास्यास्पद है।
मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि जब जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ तो सोशल मीडिया कंपनियों को इस विरोध प्रदर्शन की फीड लगातार दिखाने के लिए, एल्गोरिदम सेट करने के लिए पैसे दिए गए थे।
यह बात पार्लियामेंट्री कमेटी के सामने मानी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोस्ट हटाने के लिए मेटा ने माफी भी मागी है। फडणवीस ने कहा कि इस तरह के आंदोलन के लिए मिला पैसा विदेशी हो सकता है।