नागपुर साइबर पुलिस ने अलग-अलग मामलों में कुल 8 आरोपियों की गिरफ्तारी का दावा किया है।
ठगी की रकम 24 सेकंड में 38 बैंक खातों में ट्रांसफर की गई।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ₹1.04 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में दो आरोपी गिरफ्तार।
AI वॉइस क्लोनिंग के जरिए ₹50 लाख की ठगी के मामले में इंदौर से एक आरोपी पकड़ा गया।
Interstate Cyber Gang Arrested: ऑनलाइन ठगी के अलग-अलग हथकंडे अपनाकर लोगों को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोहों के खिलाफ नागपुर साइबर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है।
पुलिस ने 4 अलग-अलग मामलों की जांच करते हुए महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में छापेमारी कर कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें 2.87 करोड़ रुपये की शेयर ट्रेडिंग ठगी के मामले में मुंबई के बोरीवली से 2 आरोपियों को पकड़ा गया।
इस गिरोह के तार हांगकांग और दुबई के साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े होने का खुलासा हुआ। एक व्यक्ति को इंस्टाग्राम विज्ञापन और टेलीग्राम ग्रुप के जरिए फर्जी 'एफटीएमओ' शेयर ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर भारी मुनाफे का लालच दिया गया। इसके बाद 33 अलग-अलग लेन-देन में उससे 2.87 करोड़ रुपये निवेश करवाकर ठगी की गई।
जांच में सबसे पहले बीड जिले के पाटोदा निवासी काकासाहेब मोहन दरुंडे को पुलिस ने 15 अक्टूबर को गिरफ्तार किया। वह खुद बैंक खाताधारक नहीं था, बल्कि विभिन्न प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों के करंट कॉर्पोरेट बैंक खाते ऑपरेट कर साइबर ठगी के बड़े हैंडलर्स को उपलब्ध कराता था।
उससे मिले सुराग के आधार पर पुलिस टीम ने मुंबई के बोरीवली इलाके में 6 दिन तक डेरा डाला। आरबीएल बैंक के इंटरनेट बैंकिंग आईपी लॉग, आईपीडीआर, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और लोकेशन के तकनीकी विश्लेषण से आरोपियों का पता लगाया गया।
पुलिस ने फूड डिलीवरी पार्सल आने का बहाना बनाकर 1 आरोपी को घर से बाहर बुलाया और बोरीवली पुलिस की मदद से ब्यावर अजमेर, राजस्थान निवासी भूपेंद्र महावीर जैन (32) और योगेश पारसमल जैन (37) को गिरफ्तार किया गया। न्यायालय ने दोनों को 3 दिन कस्टडी रिमांड मंजूर की।
जांच में सामने आया कि ठगी की रकम आरबीएल के एक कॉर्पोरेट खाते से महज 24 सेकंड में 39 ट्रांजेक्शन के जरिए 38 बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। जिस मोबाइल नंबर से इंटरनेट बैंकिंग संचालित हो रही थी, वही सिम कार्ड और मोबाइल हैंडसेट आरोपियों के पास मिला।
पुलिस ने आरोपियों से 26 बैंक खातों की किट और चेकबुक, 11 मोबाइल, 11 डेबिट कार्ड, 3 डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट टोकन, 2 लैपटॉप, 6 आधार-पैन व मतदाता पहचानपत्र और 11 कंपनियों के रबर स्टैम्प समेत करीब 10 लाख रुपये का सामान जब्त किया। जांच में आरोपियों के हांगकांग और दुबई के साइबर ठगी नेटवर्क से संपर्क होने की जानकारी सामने आई। अन्य फरार आरोपियों और अंतरराष्ट्रीय हैंडलर्स की तलाश जारी है।
एनआईए अधिकारी बनकर एक व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 1।04 करोड़ रुपये का चूना लगाने वाले 2 आरोपियों को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों में सांताक्रूज वेस्ट, मुंबई निवासी दिनेश अंबाभाई रावरीया (32) और ताड़देव रोड निवासी अरविंद कानजी गाला (45) का समावेश है।
शनिवार को पुलिस ने उन्हें मुंबई शहर से गिरफ्तार कर 2 मोबाइल फोन जब्त किए। न्यायालय ने दोनों आरोपियों को 3 दिन का पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर की। इस मामले में पीड़ित को 8।50 लाख वापस भी दिलाए गए।
एआई वॉइस क्लोनिंग तकनीक का इस्तेमाल कर 50 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने वाले एक आरोपी को पुलिस ने इंदौर से गिरफ्तार किया।
हिवरी लेआउट निवासी निखिल निर्मलकुमार नखत के पिता निर्मलकुमार को वॉट्सएप पर समाज के एक प्रतिष्ठित व्यक्ति की तस्वीर लगाकर संदेश भेजा गया। इसके बाद उसी व्यक्ति की आवाज की हूबहू नकल कर उन्हें फोन किया गया और खुद को मुसीबत में बताकर तत्काल पैसों की जरूरत होने का झांसा दिया गया। मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस ने इंदौर के निमावर रोड निवासी नेतराम श्रीराम चडार (29) को 28 अक्टूबर को गिरफ्तार किया।