Nagpur Lawns Illegal Construction: नागपुर सिविल लाइंस में चल रहे लॉन को लेकर हाई कोर्ट ने काफी सख्ती दिखाई है। लॉन्स का सर्वे करने, उन पर नियमानुसार कार्रवाई करने तक का आदेश जारी किया गया है। स्पष्ट शब्दों में कहा गया था कि यहां पर नियमों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए परंतु महानगरपालिका के अधिकारी कुंभकर्णी नींद में हैं। सर्वे और कार्रवाई की बात तो दूर, इन लॉन्स पर नया निर्माण भी नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है और उन्हें भनक तक नहीं लग रही है।
नए निर्माण का विरोध भी दर्ज कराया गया है, बावजूद मनपा के विभिन्न विभागों की आपसी 'मिलीभगत' से इन लॉन्स संचालकों को 'आशीर्वाद' बना हुआ है। हाई कोर्ट के आदेश को धता बताते हुए मनपा के आलाधिकारी केवल खानापूर्ति कर रहे हैं। पीआईएल में जितने भी आदेश जारी किए जा रहे हैं, उसे हवा में उड़ाने का काम मनपा के अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है। हाई कोर्ट सख्ती अपना रहा है लेकिन मनपा जोन कार्यालय की सुस्त चाल आदेश की हवा निकाल रहा है।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद आयुक्त ने सभी लॉन्स संचालकों की सुनवाई की थी, सुनवाई के बाद आयुक्त ने सहायक आयुक्तों को आदेश दिया था कि जल्द से जल्द इन मुद्दों पर कदम उठाये और कार्रवाई करें लेकिन जोन में फाइल पहुंचने के बाद उन फाइलों
को दबा दिया गया। यह तर्क दिया जा रहा है कि आयुक्त ने जो सुनवाई ली थी, उसकी जानकारी जोन कार्यालय के लोगों को नहीं है। इसके बाद जोन के आला अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठ गए हैं। महीनों गुजरने के बाद भी एक भी लॉन्स पर कार्रवाई करने की जानकारी सामने नहीं है। जो भी कार्रवाई की गई है, वह बस दिखावा था। आदेश जारी किया गया, संचालकों को समय दिया गया ताकि वह
कानूनी दांवपेच अपना सके और अपनी संपत्ति को बचा लें। लोगों की भावना मनपा के प्रति नकारात्मक होती जा रही है, लॉन्स में होने वाले कार्यक्रमों से लोग त्रस्त हो रहे हैं लेकिन मनपा जोन कार्यालय अपनी मदमस्त चाल जारी रखे हुए है।
इस बीच यह भी जानकारी सामने आ रही है कि मनपा के कुछ विभाग अवैध (इलीगल) प्रॉपर्टी को लीगल (वैध)
बनाने के खेल में जुट गए हैं। एक मामले में ऐसा देखा गया है कि मनपा के जोन कार्यालय ने पूरी प्रॉपर्टी को अवैध करार दे दिया। सर्वे, सुनवाई, नोटिस पर नोटिस जारी करने के बाद धारा 54 और 56 के तहत भी नोटिस दिया जाता है। नोटिस का
जवाब मिले, नहीं मिले, नोटिस देने का ही सिलसिला चलता रहता है और संचालकों को इस बीच इतना समय दिया जाता है कि 'नया बिल्डिंग' भी बना लेता है।
यानी पूरे परिसर को जोन कार्यालय अवैध बताता है, वहीं दूसरी ओर अग्निशमन विभाग वहां पर फायर फाइटिंग सिस्टम लगाकर उस अवैध परिसर को वैध बनाने की पहल करता है। सवाल यह उठता है कि अगर जौन कार्यालय किसी निर्माण को अवैध करार देता है तो क्या अग्निशमन विभाग वहां फायर फाइटिंग सिस्टम लगाकर एसओसी दे सकता है।
अगर ऐसा है तो शहर के अधिकांश अवैध बिल्डिंग वाले इसी तंत्र को अपनाएंगे और यह लोगों के लिए जानलेवा साबित होगा। अवैध बिल्डिंग परिसर में अग्निशमन विभाग कैसे एनओसी दे सकता है।
जोन स्तर पर इंजीनियरों का खेल भी कम नहीं चल रहा है। सर्वे, नोटिस के नाम पर नोटिस जारी किया जाता है। लोग घबरा जागते हैं जिसके बाद उसे मिलने के लिए बुलाया जाता है। सुनवाई होती है। आला अधिकारी भी इसमें शामिल होते हैं। और निर्माण कार्य को बिल्कुल गलत बताने की कोशिश की जाती है। इसके बाद सर्वे के नाम पर 'सेटिंग' की जाती है और सेटिंग होते ही उस कथित 'अवैध' निर्माण को वैध बता दिया जाता है।
धरमपेठ जोन में खासकर इस प्रकार का खेल इंजीनियरों की ओर से काफी खेला जा रहा है। ये ये भी भूल चुके हैं कि यह क्षेत्र राज्य के मुख्यमंत्री का क्षेत्र है। धरमपेठ जोन में अवैध बिल्डिंगों की बाढ़ सी आ गई है। जोन के आला अधिकारी भी इस पर खामोशी अपनाये हुए हैं और इंजीनियरों की पूरी छूट दी जा रही है।