हाई कोर्ट (फाइल फोटो) 
नागपुर

कर्मचारी के खुलासे ने पलटा केस! हाई कोर्ट में चिया टेक्नोलॉजी की बोलती बंद, रजिस्ट्री में जमा करने होंगे 5 लाख

Chia Technologies High Court Fine: नागपुर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला। चिया टेक्नोलॉजीज पर 5 लाख का जुर्माना। अदालत को गुमराह करने और 'मजाक बनाने' पर भड़के जज। कस्टम विभाग की जब्ती का है मामला।

प्रिया जैस

Justice Anil Pansare Nagpur HC: विदेशों से आयात किए गए माल की जब्ती को लेकर चिया टेक्नोलॉजीज की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायाधीश अनिल पानसरे और न्यायाधीश निवेदिता मेहता ने याचिकाकर्ता मेसर्स चिया टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ ही सख्त रवैया अपनाते हुए ‘अदालत को गुमराह करने’ की कोशिश के लिए रजिस्ट्री में 5 लाख रुपये जमा करने का आदेश जारी किया।

उल्लेखनीय है कि गत सुनवाई को ही हाई कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि जो भी पक्ष अदालत को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है, उसे न केवल भारी जुर्माने का सामना करना पड़ेगा बल्कि उसके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही और मुकदमा भी चलाया जा सकता है।

कर्मचारियों के बयानों से खुला राज

याचिकाकर्ता के अनुसार आयातित 4 कंटेनरों में ‘स्केटबोर्ड’ थे, जबकि कस्टम विभाग का दावा है कि उनमें ‘स्कूटर (खिलौने)’ थे। मुख्य विवाद ‘अधिकृत एजेंट’ की पहचान को लेकर है। सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 147 (3) के तहत अधिकृत एजेंट वह होता है जिसे मालिक या आयातक द्वारा स्पष्ट या निहित रूप से अधिकृत किया गया हो। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रतिवादी राइडर शिपिंग लाइंस के प्रतिनिधि ईशान वासनिक और प्रतिवादी 7 अंकुश गोविंद राऊत से पूछताछ की।

वासनिक ने बताया कि उन्हें मोबाइल और वाट्सएप के माध्यम से याचिकाकर्ता कंपनी से अधिकार पत्र मिले थे। वहीं अंकुश राऊत ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि उनसे एक ऐसे पत्र पर हस्ताक्षर कराए गए थे जिसमें लिखा था कि वह कंपनी के लिए काम नहीं करते हैं, जबकि वे साल 2024 से कंपनी के लिए काम कर रहे हैं और उन्हें भुगतान भी मिल रहा है।

याचिकाकर्ता को हाजिर रहने का भी आदेश

हाई कोर्ट ने इन बयानों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता ने अदालत का मजाक बनाया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता को अगली सुनवाई से पहले 5 लाख रुपये कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कराने होंगे। इसी तरह से अगली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता को स्वयं अदालत में उपस्थित रहना होगा। अदालत ने याचिकाकर्ता को दी गई अंतरिम राहत को जारी रखने से भी इनकार कर दिया।

गत समय कस्टम विभाग का कहना है कि जब्ती की कार्रवाई 30 सितंबर और 22 अक्टूबर 2025 को भारत शिपिंग एजेंसी की मौजूदगी में की गई थी। याचिकाकर्ता कंपनी यह तो मानती है कि भारत शिपिंग एजेंसी साल 2020 से उनके लिए काम कर रही है लेकिन उनका दावा है कि एजेंसी को केवल नियमित जांच के लिए अधिकृत किया गया था, माल की जब्ती की प्रक्रिया के लिए नहीं।

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