डॉ. गंटावार दम्पति मामले में याचिका ली वापस (सौजन्यः सोशल मीडिया) 
नागपुर

चार्जशीट दायर, याचिका ली वापस, गंटावार दम्पति मामले में सरकारी पक्ष का खुलासा

Charge Sheet Filed: अवैध सम्पत्ति और भ्रष्टाचार प्रतिबंधित कानून के तहत मनपा में अधिकारी रहे डॉ. प्रवीण गंटावार दम्पति की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।

आंचल लोखंडे

Nagpur News: अवैध सम्पत्ति और भ्रष्टाचार प्रतिबंधित कानून के तहत बर्डी पुलिस थाना में दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग करते हुए मनपा में अधिकारी रहे डॉ. प्रवीण गंटावार दम्पति की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। वर्ष 2022 में दायर इस याचिका पर सरकारी पक्ष द्वारा दिए गए आश्वासन की पूर्ति नहीं होने पर पुन: वर्ष 2024 में याचिका दायर की गई।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से उस समय दिए गए आश्वासन पर कोर्ट का ध्यानाकर्षित किया गया। जिसमें आरोप-पत्र दायर किया जा सकता है या नहीं, इस पर निर्णय छह महीने की अवधि के भीतर लेने की जानकारी दी गई थी। चूंकि 6 माह में किसी तरह का निर्णय नहीं लिया गया। ऐसे में एफआईआर रद्द करने की मांग की गई। अब इस मामले में चार्जशीट दायर होने की जानकारी सरकारी पक्ष द्वारा दी गई है। जिसके बाद याचिकाकर्ता की ओर से याचिका वापस ली गई।

लोन अकाऊंट पर लिया जाएगा संज्ञान

याचिकाकर्ता के अनुसार सीए द्वारा प्रस्तुत फारेन्सीक रिपोर्ट अब रेकार्ड का हिस्सा बन चूकी है। जिसमें लोन अकाऊंट का ब्यौरा उजागर किया गया है। इस संदर्भ में खाते का आंकलन करते समय याचिकाकर्ता की आय के संसाधनों में इसे शामिल करने की आशा अदालत द्वारा जताई गई। अदालत ने कहा कि लोन अकाऊंट को भी संज्ञान में लिया जाएगा। याचिकाकर्ताओं का मानना है कि एक पुलिस कांस्टेबल की बेबूनियाद शिकायत के कारण याचिकाकर्ता को प्रताडित किया जा रहा है। दोनों याचिकाकर्ता पेशे से न केवल डाक्टर है, बल्की उच्च डिग्री भी हासिल की है।

बिल देने से बचने के लिए शिकायत

याचिकाकर्ता का मानना था कि शिकायतकर्ता कांस्टेबल ने 6 दिसंबर 2011 को गंटावार के अस्पताल में इलाज के लिए पत्नी को भर्ती कराया था। कैंसर के इलाज के लिए 1,51,800 रु. और 59,020 रु. का फार्मसी का बिल थमाया गया। जिसके बदले रवि ने 60 हजार रु. नगद और बची राशी के 2 चेक अदा किए। किंतु दोनों चेक बाऊंस हो गए। याचिकाकर्ता द्वारा बकाया मांगे जाने पर रवि ने एट्रासिटी एक्ट के तहत शिकायत दर्ज कराई। साथ ही भ्रष्टाचार प्रतिबंधक विभाग के पास झूठी शिकायत भी दर्ज की। गृह विभाग के पास भी बेनामी शिकायत दर्ज कर याचिकाकर्ता की कथित अवैध सम्पत्ति की जांच कराने की मांग की गई।वर्ष 2014 से लेकर 2020 तक जांच तो हुई, लेकिन उसमें कुछ भी अवैध नहीं पाया गया।

सम्पत्ति का गलत आंकलन

  • 15 जून 2018 को जांच पूरी करते हुए एसीबी ने सम्पत्ति को लेकर चार्ट तैयार किया। एसीबी के आडिटर ने सम्पत्ति का गलत लेखाजोखा तैयार किया। जिसमें 35.96 करोड़ की सम्पत्ति दिखाई गई।
  • खर्च के रूप में 18.45 करोड़ तथा 25.58 करोड़ की अचल सम्पत्ति दिखाई गई। एसीबी की ओर से पूरा लेखाजोखा फारेन्सीक आडिटर कम्पनी को क्रास वेरिफिकेशन के लिए भेजा गया।
  • फारेन्सीक आडिटर कम्पनी ने अगस्त 2019 के पूर्व रिपोर्ट पेश की। जिसमें याचिकाकर्ताओं की सम्पत्ति 10.12 करोड़ होने खुलासा किया गया। इसमें 3.17 करोड़ का खर्च और 3.81 करोड़ की अचल सम्पत्ति दर्शाई गई।

हेमंत कैबिनेट के 53 बड़े फैसले: 100 उत्कृष्ट स्कूल, 606 थानों में CCTV, मेडिकल कॉलेजों को करोड़ों की सौगात

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार, महाराष्ट्र में समंदर के नीचे से पहाड़ों तक, एक साथ चल रहा काम

FREMAA Recruitment 2026: IT असिस्टेंट समेत 12 पदों पर भर्ती, 40,000 तक सैलरी; 6 सितंबर तक करें आवेदन

आंध्र प्रदेश में खौफनाक वारदात, श्रीशैलम के लॉज में एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत; 3 दिन से बंद था कमरा

क्या राजनीति छोड़ रहे हैं नितिन गडकरी? संन्यास की अटकलों पर केंद्रीय मंत्री ने तोड़ी चुप्पी, जानिए पूरा सच