West Bengal Polling Percentage: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दौरान हो रहे भारी मतदान ने देश भर के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। महाराष्ट्र के कद्दावर नेता और कैबिनेट मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले (Chandrashekhar Bawankule) ने बंगाल के इस उच्च मतदान प्रतिशत को ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ जनता का प्रचंड आक्रोश बताया है। बावनकुले ने ममता बनर्जी की तुलना 'मुगल शासकों' से करते हुए दावा किया कि अब बंगाल में 'दीदी' के शासन का अंत निश्चित है।
चंद्रशेखर बावनकुले ने मुंबई में मीडिया से बात करते हुए पश्चिम बंगाल की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा, "ममता बनर्जी की सरकार आज जिस तरह से काम कर रही है, वह लोकतांत्रिक कम और 'मुगलिया अंदाज' में ज्यादा है। विपक्ष को कुचलना, हिंसा फैलाना और जनता की आवाज को दबानाये सब मुगलों के दौर की याद दिलाता है। बंगाल की जनता अब इस तानाशाही को और सहने को तैयार नहीं है। बावनकुले का इशारा बंगाल में चुनावों के दौरान होने वाली कथित हिंसा और राजनीतिक द्वेष की ओर था, जिसे भाजपा लगातार जंगलराज और अलोकतांत्रिक करार देती रही है।
पश्चिम बंगाल में शुरुआती चरणों में ही 90% के करीब हुई वोटिंग पर टिप्पणी करते हुए बावनकुले ने कहा कि यह मतदान प्रतिशत ममता बनर्जी की विदाई का स्पष्ट संकेत है। उनके अनुसार, बंगाल की जनता ने इस बार बहुत उत्साह के साथ मतदान किया है। जब भी मतदान का स्तर इतना ऊंचा जाता है, तो इसका सीधा मतलब होता है कि लोग सत्ता परिवर्तन चाहते हैं। यह भारी वोटिंग ममता दीदी के घर जाने की बारी की मुनादी है।
उन्होंने तर्क दिया कि बंगाल के लोग अब विकास और शांति चाहते हैं, और भारी संख्या में घरों से बाहर निकलकर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि वे 'मुगल स्टाइल' शासन के खिलाफ अपना फैसला सुना चुके हैं।
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चंद्रशेखर बावनकुले (Chandrashekhar Bawankule) का यह बयान महाराष्ट्र और बंगाल के बीच के राजनीतिक ध्रुवीकरण को और स्पष्ट करता है। भाजपा इस समय पूरे देश में ममता बनर्जी को एक 'निरंकुश शासक' के तौर पर पेश कर रही है। बावनकुले के 'मुगल' शब्द के इस्तेमाल से चुनावी जंग और अधिक आक्रामक होने की संभावना है। अब सभी की निगाहें चुनाव परिणामों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि यह भारी मतदान वाकई 'जनता का गुस्सा' था या ममता बनर्जी के प्रति उनका अटूट विश्वास।